अगर आप भी शाकाहारी हैं, तो B12 की कमी से बचने के लिए इन पत्तों को अपनाए, ये आम भारतीय पत्ते B12 के लिए क्यों हो रहे हैं लोकप्रिय?

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संवाद 24 डेस्क। विटामिन B12 (कोबालामिन) हमारे शरीर के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण विटामिन है। यह विटामिन लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, तंत्रिका तंत्र की कार्यक्षमता, डीएनए संश्लेषण और ऊर्जा उत्पादन जैसे कई आवश्यक जैविक प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। शरीर में B12 की पर्याप्त मात्रा न हो तो कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे थकान, कमजोरी, याददाश्त में कमी, तंत्रिका क्षति, और अवसाद जैसी स्थितियाँ।

विशेष रूप से भारत में, शाकाहारी भोजन पर निर्भर अधिकांश लोगों में यह कमी देखी जाती है क्योंकि विटामिन B12 प्रायः मांस, मछली, अंडा और डेयरी उत्पादों में अधिक मात्रा में पाया जाता है और प्लांट-बेस्ड डाइट में इसकी मात्रा कम होती है।

विटामिन B12 की कमी के लक्षण-
जब शरीर में B12 पर्याप्त मात्रा में नहीं होता, तो शुरुआत में ध्यान न देने योग्य हल्के लक्षण दिख सकते हैं, लेकिन समय के साथ ये गंभीर रूप ले सकते हैं:

  1. शारीरिक संकेत
    लगातार थकान और ऊर्जा की कमी
    कमजोरी और सुस्ती
    त्वचा का पीलापन
    हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्न अवस्था
  2. तंत्रिका तथा मस्तिष्क से जुड़ी समस्याएँ
    याददाश्त में कमी
    ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
    मानसिक स्थिति में बदलाव
    झुनझुनी या तंत्रिका क्षति के कारण चलने-फिरने में मुश्किल। इन लक्षणों को अक्सर लोग सामान्य कमजोरी समझ लेते हैं, लेकिन लंबे समय तक B12 की कमी स्थायी तंत्रिका क्षति, डिमेंशिया-समान लक्षण और गहन अवसाद जैसी परिस्थितियाँ पैदा कर सकती है। यह विटामिन हमारी नर्वस सिस्टम की संरचना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर माइलिन शीथ के संरक्षण में।

भारत में B12 की कमी क्यों अधिक आम है?
भारत में B12 की कमी का कारण मुख्य रूप से खान-पान की आदतें हैं। शाकाहार का प्रभावी रूप, जिनमें मांस, मछली और अंडों का सेवन नहीं होता, B12 की कमी के जोखिम को बढ़ाते हैं। इसके अलावा:

  • कुछ लोगों में आंत में B12 के अवशोषण की समस्या हो सकती है।
  • आयु के साथ विटामिन का अवशोषण घट सकता है।
  • कुछ दवाइयाँ भी B12 के अवशोषण को प्रभावित करती हैं।
    यह कमी सिर्फ वयस्कों तक सीमित नहीं है, बच्चों और बुजुर्गों में भी काफी सामान्य हो रही है। पिछले अध्ययन बताते हैं कि उत्तर भारत में लगभग आधी आबादी में B12 की कमी पाई जाती है।

पारंपरिक पत्तेदार सब्जियों में B12: क्या सम्भव है?
प्लांट-बेस्ड डाइट वाले लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि प्राकृतिक रूप से पत्तेदार सब्ज़ियों में विटामिन B12 की मात्रा सीमित और संदिग्ध होती है। अधिकांश वैज्ञानिक शोध के अनुसार पौधों में B12 पर्याप्त मात्रा में नहीं पाया जाता, और जो थोड़ा B12 मिलता है वह मानव शरीर द्वारा आसानी से अवशोषित नहीं हो पाता।

लेकिन कुछ भारतीय पारंपरिक हरे पत्तों का सेवन स्वास्थ्य के अन्य कई लाभ देता है और संभावित तौर पर B12 के स्तर को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है खासकर जब उन्हें अन्य B12 स्रोतों के साथ संतुलित किया जाए।

  1. सहजन की पत्तियाँ (Moringa/Drumstick leaves) – पोषक तत्वों से भरपूर, विटामिन A, आयरन, कैल्शियम और फाइबर का अच्छा स्रोत। नियमित सेवन से पाचन बेहतर होता है, ऊर्जा बढ़ती है और कमजोरी कम होती है। सहजन के पत्तों में B12 के साथ अन्य आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।
  2. पालक (Spinach) – आयरन, फोलेट और विटामिन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और निःशक्तता से राहत मिल सकती है। हालांकि B12 की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, पर इसे संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में शामिल कर लाभ मिलता है।
  3. सरसों के पत्ते (Mustard Greens) – सर्दियों में मिलने वाली यह भाजी विटामिन C और A के साथ पोषित होती है। B12 के साथ साथ एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भी भरपूर। रोज़ाना सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में सुधार हो सकता है।
  4. करी पत्ता (Curry Leaves) – भारतीय खाने में सामान्य तौर पर तड़के में उपयोग किया जाता है। Calcium, Iron, Fat और Protein के साथ कुछ मात्रा में B12 भी माना जाता है। इसके सेवन से त्वचा और बालों को भी लाभ मिलता है।

इन पत्तों के सेवन से पूरा B12 पोषण मिलना वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है, लेकिन वे आहार में माइक्रोनुट्रिएंट्स की विविधता और पोषण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

B12 के अन्य विश्वसनीय स्रोत
प्लांट-बेस्ड आहार अपनाने वाले लोगों के लिए कुछ और विश्वसनीय B12 स्रोत हैं, जिनकी चिकित्सीय और पोषण विशेषज्ञों द्वारा पुष्टि की जाती है:
???? डेयरी उत्पाद
दूध, दही, पनीर आदि विटामिन B12 के अच्छे स्रोत हैं।
नियमित सेवन से B12 की दैनिक आवश्यकता पूरा होती है।
???? मछली और सीफूड
साल्मन, टूना, मैकेरल जैसे मछलियों में B12 की मात्रा अधिक होती है। ये स्रोत विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी हैं जो मांस खाते हैं।
???? अंडे
अंडे की जर्दी में B12 पाया जाता है। शाकाहारी (लेकिन जो अंडा खाते हैं) लोगों के लिए यह अच्छा विकल्प है।
???? फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ
कुछ अनाज, फोर्टिफाइड मिल्क और पौष्टिक खमीर (nutritional yeast) में B12 जोड़ा जाता है। यह विशेष रूप से शाकाहारियों और वीगनों के लिए सहायक है।

B12 की कमी से बचने के व्यावहारिक उपाय
✔ भोजन में विविधता रखें — डेयरी प्रोडक्ट, पत्ते सभी को शामिल करें।
✔ यदि आप शाकाहारी हैं, तो फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ और सप्लीमेंट्स के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।
✔ नियमित स्वास्थ्य चेक-अप करायें, खासकर रक्त परीक्षण के माध्यम से B12 स्तर की जाँच।
✔ पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाएं, क्योंकि B12 का अवशोषण आंत में होता है।

विटामिन B12 हमारे स्वास्थ्य का एक अनिवार्य आधार है। इसकी कमी से शरीर और मस्तिष्क दोनों ही प्रभावित हो सकते हैं। B12 की कमी को दूर करने के लिए शाकाहारियों को डेयरी फोर्टिफाइड फूड्स और संतुलित पत्तेदार सब्ज़ियों को मिलाकर एक समग्र और व्यवहारिक आहार अपनाना सबसे प्रभावी तरीका है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी भी प्रकार से चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी लक्षण, निर्णय या उपचार के लिए अपने व्यक्तिगत चिकित्सक, या किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। samvad24.com प्रस्तुत जानकारी की चिकित्सकीय सटीकता, पूर्णता या उपयुक्तता के लिए उत्तरदायी नहीं है तथा इसके उपयोग से होने वाली किसी भी हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।

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