पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल का 90 वर्ष की उम्र में निधन
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संवाद 24, नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल का शुक्रवार सुबह लातूर में 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे और लातूर स्थित अपने आवास देवघर में इलाजरत थे। सुबह 6:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
परिवार में उनके बेटे शैलेश पाटिल, बहू अर्चना पाटिल (जो BJP नेता हैं) और दो पोतियां हैं।
शिवराज पाटिल को भारतीय राजनीति में एक सादा जीवन, उच्च विचार वाले नेता के रूप में जाना जाता था।
सात बार सांसद और इंदिरा-राजीव के विश्वस्त
लातूर लोकसभा सीट से 7 बार सांसद रहे शिवराज पाटिल को इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का भरोसेमंद नेता माना जाता था।
1980 के दशक में वे रक्षा मंत्री रहे।
1991–96 के बीच वे लोकसभा के 10वें अध्यक्ष बने—यह उनके राजनीतिक करियर की सबसे प्रतिष्ठित भूमिकाओं में से एक रही।
2004 में यूपीए सरकार के दौरान उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री बनाया गया, जहां वे 2008 तक पद पर रहे।
मुंबई हमले के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दिया इस्तीफा
26/11 मुंबई हमलों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विपक्ष और मीडिया ने शिवराज पाटिल की कड़ी आलोचना की।
हमलों की गंभीरता के बीच दिन में कई बार कपड़े बदलने को लेकर भी उन्हें निशाने पर लिया गया।
हमले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था—भारतीय राजनीति में यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
बायोग्राफी में 26/11 का जिक्र नहीं
अपनी आत्मकथा ‘Odyssey of My Life’ में पाटिल ने गृह मंत्रालय की नीतियों और अनुभवों पर विस्तार से लिखा,
लेकिन मुंबई हमलों का उल्लेख नहीं किया, जिस पर बाद में सवाल भी उठे।
गीता-कुरान तुलना पर विवादित बयान
2022 में पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई की बायोग्राफी के विमोचन समारोह में पाटिल ने कहा था—
- जिहाद की अवधारणा केवल कुरान में नहीं, गीता और ईसाई धर्म की शिक्षाओं में भी है।
- श्रीकृष्ण ने भी अर्जुन से जिहाद समान कर्तव्य निभाने को कहा है।
उनके इस बयान पर काफी विवाद हुआ और कई राजनीतिक दलों ने इसकी आलोचना की।






