पूजा के दीपक से लगी आग, पूरा फ्लैट राख… हर पल मौत नाच रही थी सामने; दमकल जवानों ने ऐसे बचाईं तीन जानें

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संवाद 24 संवाददाता। रविवार की शाम थी। त्रिवेणी कैस्टल अपार्टमेंट, ओल्ड विजय नगर कॉलोनी। चौथी मंजिल, फ्लैट नंबर 401, पूजा घर में जल रहा था एक छोटा-सा दीपक। बस यही दीपक मौत बनकर भड़क उठा। मिनटों में लपटें पूरे घर को निगल गईं। अंदर फंसे थे तीन लोग – गृहिणी रंजना अग्रवाल (55), बहू शिवांगी (28) और बेटी मुस्कान (19)। दरवाजे से आग की लपटें बाहर निकल रही थीं। सीढ़ियां जहरीले धुएं से भरी थीं। चीखें गूंज रही थीं “बचाओ… बचाओ…”
बाहर खड़े लोग हाथ-पैर मार रहे थे, लेकिन कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था।

“लगा था, आज सब खत्म हो जाएगा”
राजीव अग्रवाल (एलआईसी एजेंट) उस वक्त कमला नगर गए थे। शाम करीब 4 बजे फोन आया – “भैया, घर में आग लग गई है!” जब तक पहुंचे, पूरी बिल्डिंग में भगदड़ मच चुकी थी। “मैं ऊपर भागा तो देखा दरवाजे से आग की लपटें बाहर निकल रही थीं। मेरी पत्नी, बहू और बेटी अंदर थीं। एक पल को लगा कि अब सब खत्म हो गया।” – राजीव की आंखें आज भी नम हो जाती हैं।

दमकल जवान बने फरिश्ते
दमकल की चार गाड़ियां पहुंचीं। लेकिन सीढ़ी सीढ़ियों से जाना नामुमकिन था। तब जवानों ने छत से रस्सी बांधी। बिना ऑक्सीजन मास्क के, बिना एक पल सोचे खिड़की तोड़कर जलते फ्लैट में कूद पड़े। धुएं और आग के बीच एक-एक कर तीनों को गोद में उठाया और बाहर निकाला। पूरे एक घंटे तक चला खतरनाक रेस्क्यू। हर सेकंड मौत सामने खड़ी थी।

पूजा घर का दीपक बना काल
फायर अधिकारी महेंद्र प्रसाद वाजपेयी ने बताया, “ड्राइंग रूम में ही पूजा घर था। दीपक की लौ से कपड़े पकड़े, फिर पर्दे, फिर लकड़ी की अलमारी। आग इतनी तेजी से फैली कि घरवाले पहले तो बुझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन जब तक समझ पाते, लपटें चारों तरफ थीं। गनीमत रही कि तीनों खिड़की के पास खड़े होकर चिल्ला रहे थे, जिससे धुआं बाहर निकलता रहा। नहीं तो दम घुटने से भी जान जा सकती थी।”

सब कुछ राख, सिर्फ लड्डू गोपाल की मूर्ति बची
सोमवार को जब राजीव फ्लैट में घुसे तो पैर रखने की जगह नहीं थी। एसी, फ्रिज, वाशिंग मशीन – सब कबाड़, सोफा, पलंग, दरवाजे-खिड़कियां जले हुए, फॉल सीलिंग गिर चुकी थी, झूमर पिघल गया, पूजा घर की दीवारें काली, लड्डू गोपाल की मूर्ति पर जले हुए कपड़े, फर्श की टाइल्स तक उखड़ गईं, राजीव बोले, “लाखों का सामान गया, लेकिन मेरी तीनों जानें बच गईं। दमकल वालों ने जो किया, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता।”

सबक
पूजा के बाद दीपक-धूपबत्ती को पूरी तरह बुझाकर ही छोड़ें, घर में फायर एक्सटिंग्विशर जरूर रखें, पुरानी वायरिंग की नियमित जांच कराएं। तीन जिंदगियां तो बच गई, लेकिन वो एक छोटा-सा दीपक आज भी सबको रुला रहा है।

Deepak Singh
Deepak Singh

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