लोकसभा में आज वंदे मातरम् पर 10 घंटे की चर्चा: PM मोदी करेंगे शुरुआत, 150 वर्ष पूरे होने पर खास बहस
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संवाद 24, नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के छठे दिन सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा होगी। इसके लिए 10 घंटे का समय तय किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर 12 बजे चर्चा की शुरुआत करेंगे।
सरकार की तरफ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, संस्कृति मंत्री और कई अन्य केंद्रीय मंत्री हिस्सा लेंगे। कांग्रेस की ओर से पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी, लोकसभा के उपनेता प्रतिपक्ष गौरव गोगोई सहित कम से कम 8 सांसद चर्चा में बोलेंगे। अन्य दलों के सांसद भी अपने विचार रखेंगे।
एक साल का राष्ट्रीय कार्यक्रम
राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने पर सरकार ने सालभर का स्मृति कार्यक्रम आयोजित किया है। इसी सिलसिले में 2 दिसंबर को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें 8 दिसंबर को लोकसभा और 9 दिसंबर को राज्यसभा में वंदे मातरम् पर चर्चा का निर्णय लिया गया।
संसद में वंदे मातरम् पर चर्चा क्यों? 5 प्रमुख वजहें
- राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पहचान
- वंदे मातरम् पर चर्चा के जरिए सरकार राष्ट्रीय भावनाओं, सांस्कृतिक गौरव और एकता का संदेश देना चाहती है। यह विषय देश की जनभावनाओं से जुड़ा हुआ है।
- बंगाल चुनाव की रणनीति
- वंदे मातरम् का जन्मस्थान और इसका आंदोलन बंगाल से जुड़ा है। 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा इसे राजनीतिक लाभ के संकेत के रूप में भी उपयोग कर सकती है।
- 1937 की ऐतिहासिक बहस को सामने लाना
- 1937 में धार्मिक आपत्तियों के चलते वंदे मातरम् के दूसरे हिस्से को हटाया गया था। सरकार इस फैसले को “तुष्टिकरण की राजनीति” से जोड़कर संसद में बहस कराना चाहती है।
- स्वतंत्रता आंदोलन और बंगाल विभाजन की भूमिका
- वंदे मातरम् का नारा 1905 के बंगाल विभाजन के खिलाफ आंदोलनों का केंद्र था। सरकार इस इतिहास को दोबारा उठाकर देशभक्ति की भावना मजबूत करना चाहती है।
- संसदीय तनाव कम करने की रणनीति
- स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) सहित अन्य विवादों के कारण संसद में चल रहे तनाव को कम करने के लिए सरकार इस विषय पर सर्वमान्य और भावनात्मक चर्चा का उपयोग कर रही है।
PM मोदी का पुराना बयान फिर चर्चा में
7 नवंबर को हुए 150वीं वर्षगांठ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा था कि 1937 में वंदे मातरम् का एक हिस्सा “टुकड़ों में काट दिया गया”, जिससे विभाजनकारी सोच मजबूत हुई। उन्होंने इसे आज भी देश के लिए चुनौती बताया।
प्रधानमंत्री ने उस दिन राष्ट्रगीत पर आधारित डाक टिकट, सिक्का जारी किया और एक विशेष वेबसाइट लॉन्च की थी। उन्होंने सामूहिक गायन में भी भाग लिया था।






