क्या आप जानते हैं आपके शरीर में भी बन सकता है “आम”? जानिए इसका मतलब और इसके खतरनाक असर।
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संवाद 24 डॉ. अजय सिंह पटेल। आयुर्वेद में एक अत्यंत महत्वपूर्ण शब्द है “आम”। इसे किसी भी हाल में फलों का राजा आम समझने की भूल मत कीजिए। जहां फलों का राजा आम रसदार, मीठा और मन को प्रसन्न कर देता है। वहीं आयुर्वेद में वर्णित ये आम बिल्कुल उलटा है कड़वा, भारी, चिपचिपा और शरीर के लिए विष जैसा।
यह तब बनता है जब आपका पाचन तंत्र कमजोर होता है या भोजन इतना भारी और तैलीय होता है कि वह पूरी तरह पच नहीं पाता। अधपचा भोजन धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर “आम” बन जाता है। यह नाड़ियों और धमनियों को जाम करता है, अंगों की कार्यक्षमता कम करता है, और आपकी प्रतिरोधक क्षमता तक को कमजोर कर देता है। जहाँ फलों का राजा आम आपकी इम्यूनिटी बढ़ाता है, वहीं यह वाला आम इम्यूनिटी गिरा देता है। यानी नाम समान, लेकिन प्रभाव जमीन आसमान। एक आम खुशी का स्रोत है, दूसरा बीमारियों का।
आयुर्वेद में स्वास्थ्य का मूल आधार हमारी अग्नि यानी पाचन शक्ति को माना गया है। जब अग्नि मजबूत होती है तो भोजन अमृत की तरह शरीर को पोषण देता है, लेकिन जैसे ही यह अग्नि कमजोर पड़ती है, वही भोजन शरीर में विष की तरह कार्य करने लगता है।
इसी अपच और अवशेष को आयुर्वेद में “आम” या “अमा” कहा गया है। आधुनिक भाषा में आम को टॉक्सिन या शरीर में जमा हानिकारक पदार्थ भी समझा जा सकता है। यह चिपचिपा, भारी और अवांछनीय तत्व शरीर की नाड़ियों, अंगों और रक्त-प्रवाह में बाधा पहुँचाता है और कई रोगों की जड़ बन जाता है।
आम शरीर में किन रोगों को जन्म देता है?
आयुर्वेद में कहा गया है “आम सर्वरोगाणां मूलम्”, अर्थात् अधिकांश रोगों की जड़ यही आम है। यह शरीर के विभिन्न हिस्सों में फँसकर कई तरह की समस्याएँ पैदा करता है:
- कब्ज
- गैस और एसिडिटी
- जोड़ों में दर्द
- सिरदर्द
- त्वचा रोग
- मोटापा
- लगातार थकान
- कमजोर इम्यूनिटी
आम बनने के प्रमुख कारण
- गलत भोजन संयोजन
- जंक फूड और तली-भुनी चीजें
- देर रात तक जागना
- तनाव और मानसिक दबाव
- मौसम के विपरीत आहार
- बार-बार स्नैकिंग और ओवरईटिंग
आयुर्वेद आम हटाने के दो मुख्य उपाय बताता है
- दीपन-पाचन (Agni Deepana & Pachana)
अग्नि को मजबूत करने के लिए अदरक, काली मिर्च, जीरा, अजवाइन, हल्दी, त्रिफला और नींबू जैसे द्रव्य अत्यंत उपयोगी माने गए हैं। - आम निष्कासन हेतु औषधियाँ
- Trivrit Churna (त्रिवृत चूर्ण)
- Eranda Taila (एरण्ड तेल)
- Vaishwanar Churna (वैश्वानर चूर्ण)
- Icchabhedi Ras (इच्छाभेदी रस)
- Pathyadi Kwath (पथ्यादि क्वाथ)
ध्यान: इनका उपयोग वैद्यकीय सलाह के आधार पर ही करें।
सुबह गुनगुना पानी: सबसे आसान लेकिन प्रभावी उपाय
सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना आम को पिघलाने का सबसे सरल तरीका है। नींबू और शहद मिलाकर लेने से यह प्राकृतिक डिटॉक्स की तरह काम करता है और नाड़ियाँ खोलता है।
उपवास और फलाहार: पाचन को आराम देने का तरीका
सप्ताह में एक दिन हल्का उपवास या केवल फल, सब्जियाँ, नारियल पानी लेने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है। आयुर्वेद में इसे लंघन कहा गया है।
त्रिफला: आँतों की प्राकृतिक सफाई
रात में गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेने से आंतों की सफाई होती है, कब्ज ठीक होती है और पाचन बेहतर होता है।
योग और प्राणायाम: भीतर से पाचन सुधारने वाले उपाय
सूर्य नमस्कार, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, कपालभाति और अनुलोम-विलोम आम निष्कासन में अत्यंत लाभकारी हैं। ये आसन गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याएँ कम करते हैं।
पंचकर्म: शरीर की डीप क्लीनिंग का आयुर्वेदिक विज्ञान
- वमन
- विरेचन
- नस्य
- बस्ती
- रक्तमोक्षण
पंचकर्म शरीर को भीतर से शुद्ध करता है और अग्नि को फिर से सक्रिय बनाता है।
आम बनने से रोकने वाली जीवनशैली
- सुबह जल्दी उठें, पर्याप्त नींद लें
- ताजा, हल्का और मौसमी भोजन करें
- ओवरईटिंग न करें
- भोजन के तुरंत बाद पानी न पिएँ
- तनाव कम करें
- अधिक देर तक बैठे या खड़े न रहें
आयुर्वेद के अनुसार स्वास्थ्य की कुंजी हमारी पाचन अग्नि है। जब यह अग्नि संतुलित रहती है, तो शरीर स्वस्थ रहता है, लेकिन इसके कमजोर पड़ते ही आम बनने लगता है, जो कई रोगों का कारण बनता है। सही भोजन, संतुलित दिनचर्या, योग, उपवास, औषधियाँ और पंचकर्म के माध्यम से इस आम को हटाया भी जा सकता है और इसके बनने से बचा भी जा सकता है।
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