एक छत के नीचे होगा 602 जोड़ों का भव्य सामूहिक विवाह, लक्ष्य आर्थिक तंगी से कोई बेटी शादी से वंचित न रहे
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संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कानपुर में इस बार शादियों का मौसम कुछ अलग अंदाज में मनाया जाएगा। 11 दिसंबर को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए विवि) के मैदान में एक छत के नीचे 602 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न होगा। खास बात यह है कि इस समारोह में हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों के जोड़े शामिल होंगे। यह आयोजन न केवल सामाजिक समरसता का संदेश देगा, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत भी प्रदान करेगा।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत होने वाले इस कार्यक्रम में प्रत्येक जोड़े पर सरकार करीब एक लाख रुपये खर्च कर रही है। इसमें नवविवाहित जोड़े को 60 हजार रुपये नकद (लड़की के खाते में सीधे ट्रांसफर), 25 हजार रुपये की घरेलू उपयोग की सामग्री (बर्तन, कपड़े, बिस्तर आदि) और शादी के आयोजन पर 15 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। समाज कल्याण विभाग ने दावा किया है कि दी जाने वाली सभी सामग्रियों की गुणवत्ता की सख्ती से जाँच कर ली गई है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी शिल्पी सिंह ने बताया, “यह पहली बार है जब कानपुर में इतने बड़े स्तर पर एक साथ एक छत के नीचे सामूहिक विवाह का आयोजन हो रहा है। पहले अलग-अलग ब्लॉकों में छोटे-छोटे समारोह होते थे, लेकिन इस बार पूरा जिला एक साथ जुड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा कि इस वर्ष का लक्ष्य 959 जोड़ों का था, जिसमें से अभी तक 602 जोड़ों का सत्यापन पूरा हो चुका है। बाकी आवेदनों की जाँच चल रही है और शेष जोड़ों का विवाह बाद के चरण में कराया जाएगा।
सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। अब तक आए आवेदनों में से करीब 200 आवेदन विभिन्न अनियमितताओं और अपात्रता के कारण निरस्त कर दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी दस्तावेज, पहले से शादीशुदा होना या आय सीमा से अधिक होना जैसी कमियाँ पाई गईं।
तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। पंडाल, भोजन, मंच सज्जा, धार्मिक अनुष्ठान से जुड़ी सभी व्यवस्थाएँ युद्धस्तर पर की जा रही हैं। हिन्दू जोड़ों के लिए वैदिक मंत्रोच्चार के साथ फेरे होंगे तो मुस्लिम जोड़ों के लिए निकाह की रस्म पूरी की जाएगी। दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग व्यवस्था रहेगी, ताकि सभी अपनी परंपराओं के अनुसार बंधन में बंध सकें।
यह आयोजन केवल शादी का उत्सव नहीं, बल्कि समाज में फैली कुरीतियों, विशेष रूप से दहेज प्रथा पर करारा प्रहार भी है। सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक तंगी के कारण कोई बेटी शादी से वंचित न रहे। कानपुर के इस भव्य सामूहिक विवाह समारोह से न केवल 602 परिवारों की खुशियाँ दोगुनी होंगी, बल्कि सामाजिक एकता और सौहार्द का संदेश भी पूरे प्रदेश में गूंजेगा। 11 दिसंबर का दिन कानपुर के लिए ऐतिहासिक होने जा रहा है जहाँ प्यार की जीत होगी और सरकार की संवेदनशील योजनाएँ रंग लाएंगी।






