बाड़मेर में बच्चोें से भरी स्कूल बस देखकर जज भड़कीं, कहा एक सीट पर सिर्फ 1 बच्चा बैठे
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संवाद 24 संवाददाता। राजस्थान के बाड़मेर में एक मिनी स्कूल बस में बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाने का मामला सामने आया। बस को मॉडिफाई कर उसमें 22 बच्चे बैठाए गए थे। यह दृश्य देखकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव (जज) कृष्णा गुप्ता भड़क गईं। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
जज कृष्णा गुप्ता ने कहा कि अभिभावकों को यह जानना जरूरी है कि उनके बच्चे किस हालत में स्कूल जा रहे हैं “स्कूल बस की क्षमता क्या है? सीटें कितनी हैं? हम तब दुख मनाते हैं, जब हादसा हो जाता है। 100–200 रुपए बचाने के चक्कर में बच्चों की सुरक्षा खतरे में डाल दी जाती है। थोड़ी जागरूकता जरूरी है।”
CBSE और सरकार के नियम क्या कहते हैं?
स्कूल बसों को लेकर केंद्र सरकार और CBSE ने स्पष्ट निर्देश जारी कर रखे हैं:
- बस के अंदर और बाहर ट्रांसपोर्ट मैनेजर का नाम और मोबाइल नंबर लिखा होना चाहिए।
- ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य है।
- ड्राइवर के साथ कंडक्टर का होना जरूरी।
- बस में लेडी अटेंडेंट की उपस्थिति अनिवार्य है।
- बस में पीने का पानी उपलब्ध हो।
- क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाना सख्त मना है।
नियम न मानने पर—
- स्कूल की बस सीज हो सकती है।
- ड्राइवर–कंडक्टर पर कानूनी कार्रवाई।
- स्कूल पर भारी जुर्माना।
- लगातार उल्लंघन पर स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
शिकायत सीधे केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को पत्र या ईमेल के माध्यम से की जा सकती है।
पेरेंट्स एसोसिएशन ने कहा— नियम हैं, पर पालन नहीं होता
दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने कहा कि ऐसी घटनाएं देशभर से लगातार सामने आती हैं।
उनके मुताबिक—
- अधिकारी अक्सर ऐसे मामलों को नजरअंदाज कर देते हैं।
- सुप्रीम कोर्ट तक ने स्कूल बस सुरक्षा के नियम तय किए हैं, लेकिन कई जगह पालन नहीं होता।
- नियम के अनुसार छोटे बच्चे 2 सीटों पर 3 बैठ सकते हैं, जबकि बड़े बच्चे सिर्फ 2—लेकिन व्यवहार में इसका उलटा देखा जाता है।
उन्होंने कहा, “अगर किसी ट्रैफिक पुलिसकर्मी के सामने ऐसी बस गुजरती है तो उसे तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। बच्चों की सुरक्षा में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होनी चाहिए।”






