चौबेपुर रेल ट्रैक पर फिर शरारत: बेंच डालकर ट्रेन डिरेल करने की कोशिश, सैकड़ों यात्रियों की जान पर बन आई
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संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश के कानपुर-फर्रुखाबाद रेल मार्ग पर एक बार फिर अराजक तत्वों ने खतरनाक खेल खेला। सोमवार देर रात कानपुर-कासगंज पैसेंजर ट्रेन (उत्तरगामी) को डिरेल करने की नीयत से किसी शख्स ने रेलवे ट्रैक पर लकड़ी की भारी बेंच रख दी। समय रहते लोको पायलट की नजर पड़ गई और उन्होंने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर स्पीड कम कर दी, लेकिन ट्रेन पूरी तरह रुक पाती, उससे पहले इंजन का पेंट्रो बेंच से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बेंच के चिथड़े उड़ गए।
घटना देदूपुर अंडरपास के पास बर्राजपुर-चौबेपुर स्टेशन के बीच रात करीब 11:42 बजे की है। लोको पायलट ने तुरंत वॉकी-टॉकी से गार्ड और कंट्रोल रूम को सूचना दी। ट्रेन को 6 मिनट तक रोका गया और तकनीकी जांच की गई। सबकुछ ठीक पाए जाने पर ट्रेन को कानपुर की ओर रवाना किया गया। रात में ही मिली टूटी बेंच चौबेपुर स्टेशन मास्टर को सूचना मिलते ही नाइट पेट्रोलिंग कर रहे ट्रैकमैन कमलेश कुमार मौके पर पहुंचे। ट्रैक से महज दो फीट दूर उन्हें लकड़ी की टूटी हुई बेंच मिली। मंधना के जूनियर इंजीनियर पंकज गुप्ता ने चौबेपुर थाने में अज्ञात शरारती तत्वों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
ठेले वाले की बेंच, शरारती तत्वों का हथियार पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पास के रेलवे चेक पोस्ट पर एक ठेला लगाने वाला दुकानदार अपनी बेंच छोड़कर जाता था। पिछले 10 दिनों से बीमारी की वजह से उसने दुकान नहीं लगाई थी और बेंच वहीं पड़ी थी। माना जा रहा है कि किसी शरारती तत्व ने उसी बेंच को उठाकर ट्रैक पर रख दिया। मंगलवार सुबह एसीपी, जीआरपी और स्थानीय पुलिस ने पूरे इलाके में एक किलोमीटर तक ट्रैक की बारीकी से जांच-पड़ताल की। फिलहाल अज्ञात आरोपियों की तलाश जारी है।
दो साल में चौथी कोशिश यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले दो सालों में चौबेपुर थाना क्षेत्र के इसी रेल ट्रैक पर तीन बार गंभीर साजिश हो चुकी है।कभी ट्रैक पर गैस सिलेंडर रखा गया कभी कंक्रीट के स्लीपर कन्नौज के पास लकड़ी के गुटके डाले गए हर बार रेलवे, जीआरपी, स्थानीय पुलिस, आईबी और यहां तक कि NIA ने जांच की, लेकिन एक भी मामले का खुलासा नहीं हो सका। हर बार इसे “शरारती तत्वों की करतूत” बताकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सवाल अब भी बरकरार आखिर बार-बार एक ही रेल खंड को क्यों निशाना बनाया जा रहा है?
क्या यह महज शरारत है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश चल रही है?इतनी जांचों के बाद भी आरोपी क्यों नहीं पकड़े जा रहे?रेलवे और पुलिस प्रशासन भले ही इसे “छोटी घटना” बता रहा हो, लेकिन जिस तरह से लगातार जानलेवा खेल खेला जा रहा है, उसने सैकड़ों-हजारों यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रात के वक्त इस रूट पर कम ट्रेनें होने की वजह से बड़ी अनहोनी टल गई, लेकिन अगली बार किस्मत साथ देगी, इसकी गारंटी कोई नहीं ले सकता।रेलवे और प्रशासन को चाहिए कि इस बार सिर्फ मुकदमा दर्ज करके न रुकें, बल्कि पेट्रोलिंग दोगुनी करें और असामाजिक तत्वों पर सख्त नजर रखें। क्योंकि एक बेंच तो टूट गई, लेकिन यात्रियों का भरोसा अभी बरकरार है, उसे टूटने न दिया जाए।






