धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनने के बाद SC लाभ लेना ‘संविधान के साथ धोखा’: इलाहाबाद हाईकोर्ट, UP प्रशासन को कार्रवाई के आदेश
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संवाद 24 संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनने वाले व्यक्तियों को अनुसूचित जाति (SC) के लाभ लेना संवैधानिक सिद्धांतों के विरुद्ध है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि ईसाई धर्म ग्रहण करने पर व्यक्ति अपनी मूल जातीय पहचान और उससे जुड़े संवैधानिक लाभ विशेषकर SC आरक्षण का अधिकार खो देता है। अदालत ने ऐसे मामलों को “संविधान के साथ धोखा” बताते हुए इन लाभों को तुरंत रोकने के लिए उत्तर प्रदेश प्रशासन को निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट का कड़ा रुख
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि SC के लिए आरक्षण का आधार सामाजिक और ऐतिहासिक रूप से झेली गई छुआछूत और सामाजिक भेदभाव की स्थितियाँ हैं, जो ईसाई धर्म में बदलने के बाद लागू नहीं रहतीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि धर्मांतरण के बाद भी आरक्षण का लाभ लेना न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि यह सामाजिक न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा: “धर्म बदलकर ईसाई बनने के बाद भी यदि कोई व्यक्ति SC श्रेणी के लाभ लेता है, तो यह संविधान के साथ धोखा है।”
UP प्रशासन को चार महीने की समय सीमा
हाईकोर्ट ने इस फैसले के साथ राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार –
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव,
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव,
राज्य के सभी जिलाधिकारी (DM)
को चार महीने के भीतर ऐसे मामलों की पहचान कर लाभ रोकने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। कोर्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धर्मांतरण के बाद SC/ST आरक्षण और आर्थिक-सामाजिक लाभों का किसी भी प्रकार से दुरुपयोग न हो।
दुरुपयोग पर होगी कानूनी कार्रवाई
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो लोग धर्म परिवर्तन के बावजूद गलत तरीके से SC लाभ लेते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें जाति प्रमाणपत्र रद्द करना, लाभ वापसी, और धोखाधड़ी के मामलों में FIR दर्ज करना शामिल हो सकता है। राज्य सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि –
- ऐसे सभी मामलों की व्यापक जांच की जाए,
- आवश्यक रिकॉर्ड सत्यापित किए जाएं,
- और भविष्य में दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त प्रशासनिक व्यवस्था तैयार की जाए।
फैसले का व्यापक सामाजिक प्रभाव
इस आदेश का असर न सिर्फ उत्तर प्रदेश में बल्कि देशभर में धर्मांतरण और आरक्षण से जुड़े बहसों पर पड़ सकता है। लंबे समय से चल रहे विवाद में कोर्ट का यह निर्णय कानूनी व्याख्याओं को स्पष्ट करता है और यह बताता है कि
- आरक्षण की पात्रता धर्म परिवर्तन से सीधे प्रभावित होती है।
- SC श्रेणी का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध समुदायों के लिए मान्य है।
- धर्म बदलने पर जाति आधारित सामाजिक दमन का आधार समाप्त माना जाता है।
सरकार और प्रशासन की तैयारी, UP सरकार के संबद्ध विभागों ने इस आदेश के बाद समीक्षा प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए हैं। जिलों में प्रशासनिक टीमें ऐसे मामलों की सूची तैयार करेंगी और संवैधानिक मानकों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी






