कानपुर कोर्ट ने 79.18 करोड़ की GST चोरी मामले में वकील की जमानत याचिका खारिज की
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संवाद 24 संवाददाता। फर्जी कंपनियाँ बनाकर 79.18 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी करने के गंभीर आरोप में गिरफ्तार हरियाणा के सोनीपत निवासी अधिवक्ता अमन जिंदल को बड़ा झटका लगा है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई घोटाले) विनय सिंह की अदालत ने सोमवार को उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। फिलहाल आरोपी जेल में ही रहेगा।
मामला डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) कानपुर रीजनल यूनिट का है। जांच टीम ने अमन जिंदल को पिछले दिनों गिरफ्तार किया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार अमन जिंदल ने अपने साथियों लोकेश हसीजा, शुभम जैन और तुषाल रहेजा के साथ मिलकर कुल 20 फर्जी फर्में खड़ी कीं। इन फर्जी कंपनियों के नाम पर बिना किसी वास्तविक कारोबार के फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल जारी किए गए, जिससे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी की गई। अब तक की जांच में 79.18 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी सामने आ चुकी है और जांच अभी जारी है।
विशेष लोक अभियोजक अंबरीश तंड़न ने अदालत को बताया कि यह कोई साधारण अपराध नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश के तहत सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँचाने का मामला है। अभियुक्त ने जानबूझकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और टैक्स चोरी का जाल बिछाया। यदि जमानत दे दी गई तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है या सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है।
दूसरी ओर बचाव पक्ष ने दलील दी कि अमन जिंदल को वकालत शुरू किए मात्र दो साल हुए हैं और वह इस साजिश का हिस्सा नहीं है। केवल सह-आरोपियों के बयान के आधार पर उसे फंसाया गया है, इसलिए उसे जमानत मिलनी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पाया कि अपराध की गंभीरता और सरकारी राजस्व को पहुँचे नुकसान को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया मामला आरोपी के विरुद्ध बनता है।
यह मामला एक बार फिर फर्जी फर्मों और कागजी कंपनियों के जरिए जीएसटी चोरी के बढ़ते रैकेट को उजागर करता है। पिछले कुछ वर्षों में देश भर में ऐसे कई गिरोह पकड़े गए हैं जिनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, वकील और व्यापारियों का नेक्सस शामिल रहा है। DGGI ने इस साल अब तक अकेले उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड जोन में सैकड़ों करोड़ की जीएसटी चोरी के मामले पकड़े हैं। अमन जिंदल की जमानत खारिज होने से जांच एजेंसी को और मजबूती मिली है। अब सह-आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से टैक्स चोरी का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।






