दिल्ली धमाका मामले में बड़ा खुलासा, आतंकी डॉ. शाहीन के फ्लैट से ₹18.50 लाख कैश, सोने के बिस्किट और विदेशी मुद्रा बरामद
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संवाद 24 दिल्ली। लाल किला के पास हुए ब्लास्ट की जांच के दौरान NIA ने आतंकी मॉड्यूल में शामिल अल-फलाह यूनिवर्सिटी की डॉक्टर शाहीन सईद के फरीदाबाद स्थित फ्लैट से ₹18.50 लाख नकद, दो सोने के बिस्किट, करीब 300 ग्राम सोने के जेवर और अरब देशों की विदेशी मुद्रा बरामद की है। एजेंसी को यह राशि अलमारी में बने सीक्रेट लॉकर में रखे गए पैकेट्स से मिली। माना जा रहा है कि यह रकम टेरर फंडिंग से जुड़ी हो सकती है।
NIA sources के मुताबिक, टीम गुरुवार रात डॉ. शाहीन को लेकर अल-फलाह यूनिवर्सिटी पहुंची। उसके फ्लैट नंबर 22 की तलाशी ली गई, जहां छिपाया गया कैश मिला। फ्लैट में मिले लॉकर को खुलवाने के बाद नोटों की गिनती की गई, जिसमें ₹18,50,000 निकले। इसी अलमारी से सोने के 2 बिस्किट और 300 ग्राम के गहने भी बरामद हुए। अरब देशों की करेंसी भी मिली है, जिससे फंडिंग नेटवर्क खाड़ी देशों तक जुड़ने का शक है।
एजेंसी ने फिर यूनिवर्सिटी के एडमिन ब्लॉक में शाहीन के नाम दर्ज एक आधिकारिक लॉकर खोला, जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। हालांकि इन डॉ큐मेंट्स की सामग्री का खुलासा नहीं हुआ।
शाहीन के खिलाफ जांच कैसे बढ़ी
- शाहीन पहले कानपुर के GSVM मेडिकल कॉलेज (2006–2013) में फार्माकोलॉजी विभाग की प्रवक्ता और प्रमुख रही।
- जांच में सामने आया कि NGO के माध्यम से फंडिंग करने वाला नेटवर्क खाड़ी देशों जैसे बहरीन, कुवैत, कतर, ओमान, सऊदी अरब और UAE तक फैला है।
- NIA के अनुसार, पूछताछ के दौरान शाहीन एजेंसी को बरगलाने की कोशिश करती रही।
कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में
शनिवार को दिल्ली की अदालत ने मामले में गिरफ्तार डॉ. शाहीन सईद, डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. अदील राथर और इरफान वागे को 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
NIA ने शाहीन से की ये पड़ताल
- उसे उसके हॉस्टल रूम, क्लासरूम और डॉक्टर कैबिन में ले जाकर पूछताछ की गई।
- मुलाकात करने वालों की सूची तैयार की जा रही है।
- उसे VC भूपिंद्र कौर आनंद से आमने-सामने मिलाकर पहचान सत्यापित कराई गई।
- फिर टीम उसे खोरी जमालपुर ले गई, जहां उसका और डॉ. मुजम्मिल का निकाह हुआ था।
- निकाह के दौरान मौजूद 10–12 लोगों की पहचान भी एजेंसी ने उससे कराई।
यह कार्रवाई आतंकी मॉड्यूल की फंडिंग और नेटवर्क को ट्रैक करने के लिए अहम मानी जा रही है। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट होता जा रहा है कि मेडिकल शिक्षा के नाम पर यूनिवर्सिटी के भीतर से संगठित आतंकी साजिश का संचालन किया जा रहा था।






