गंगा की बाढ़ से राहत की बड़ी पहल: फर्रुखाबाद में 465 करोड़ की लागत से 49 किमी तटबंध निर्माण की तैयारी तेज
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संवाद 24 फर्रुखाबाद। गंगा नदी की बाढ़ से हर साल होने वाले भारी नुकसान को रोकने के लिए फर्रुखाबाद प्रशासन ने एक बड़ी परियोजना पर काम तेज कर दिया है। जनपद में गंगा किनारे 465 करोड़ रुपये की लागत से 49 किलोमीटर लंबा तटबंध बनाने की प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है।
कलक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में इस परियोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने तटबंध की उपयोगिता, संभावित प्रभाव और ज़मीनी जरूरतों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। जनप्रतिनिधियों ने मौजूदा 49 किमी तटबंध के अतिरिक्त लगभग 50 किमी और बढ़ाए जाने का सुझाव दिया, ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को व्यापक सुरक्षा मिल सके।
हर वर्ष लाखों लोगों को झेलनी पड़ती है बाढ़ की मार
गंगा की बाढ़ से फर्रुखाबाद क्षेत्र में हर साल भारी तबाही होती है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, हर वर्ष एक लाख से अधिक आबादी सीधे प्रभावित होती है। किसानों की हजारों बीघा फसलें जलमग्न हो जाती हैं, जिससे बड़ी आर्थिक क्षति होती है। कई स्थानों पर पानी के तेज बहाव से सड़कें कट जाती हैं, जिसके चलते ग्रामीण इलाकों का बाहरी दुनिया से संपर्क महीनों तक बाधित रहता है।
इन संकटों को देखते हुए स्थानीय सामाजिक संगठनों, विशेषकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) सहित कई समूह वर्षों से गंगा किनारे मजबूत तटबंध निर्माण की मांग कर रहे थे। शासन द्वारा अब इस परियोजना को मंजूरी मिलना ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
दो चरणों में होगा तटबंध का निर्माण
नई परियोजना के अंतर्गत तटबंध का निर्माण दो प्रमुख हिस्सों में किया जाएगा, पहला, पांचालघाट से शमसाबाद तक 29 किलोमीटर लंबा तटबंध बनाया जाएगा। दूसरा, पांचालघाट से दुर्वासा ऋषि आश्रम होते हुए अमृतपुर क्षेत्र के हुसैनपुर गूजरपुर तक 20 किलोमीटर लंबा तटबंध प्रस्तावित है।
इन दोनों हिस्सों की कुल लागत 465 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि परियोजना से प्रभावित 29 ग्रामों के विस्तृत आंकड़े तैयार किए जाएं। इनमें उन गांवों की जानकारी एकत्रित करना शामिल है जो मड़ैया जैसी अस्थायी बस्तियों में बसे हैं, साथ ही कुल प्रभावित आबादी का भी सटीक आकलन किया जाए।
जनप्रतिनिधियों ने दी तटबंध विस्तार की सिफारिश
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष मोनिका यादव ने शमसाबाद क्षेत्र में तटबंध की लंबाई को 10 किलोमीटर और बढ़ाने का सुझाव दिया, ताकि अधिक से अधिक गांवों को सुरक्षा कवच मिल सके। वहीं कायमगंज विधायक प्रतिनिधि ने तटबंध को आगे बढ़ाकर कासगंज और बदायूं जिले तक ले जाने का प्रस्ताव रखा। इसके लिए उन्होंने विस्तृत फिजिबिलिटी स्टडी और सर्वे कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि गंगा की धारा में होने वाले प्राकृतिक बदलाव और बाढ़ की आवृत्ति को ध्यान में रखते हुए तटबंध का विस्तार वैज्ञानिक तरीके से किया जाना चाहिए।
संभावित नुकसान का भी होगा समग्र आकलन
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तटबंध बनने के बाद संभावित नुकसान का भी पूर्व-आकलन किया जाए। इसमें उन क्षेत्रों का भी अध्ययन शामिल होगा जहां पानी का प्राकृतिक प्रवाह बदल सकता है या जहां कटान की नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी बड़े निर्माण कार्य के पहले उसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभावों को समझना ज़रूरी है, ताकि परियोजना पूरी तरह सुरक्षित और टिकाऊ साबित हो।
इस महत्वपूर्ण बैठक में जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन के प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रमुख रूप से पर्यावरण गतिविधि के विभाग संयोजक सुधेश दुबे, गंगा विचार मंच के जिला संयोजक भूपेंद्र प्रताप सिंह, सीडीओ विनोद कुमार गौड़, एडीएम अरुण कुमार सिंह, डीडीओ श्याम कुमार तिवारी सहित अन्य अधिकारी बैठक में शामिल हुए। सभी ने अपने-अपने सुझाव साझा किए और तटबंध निर्माण को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने पर सहमति जताई।
ग्रामीणों में उम्मीद की नई किरण
तटबंध निर्माण की मंजूरी से गंगा किनारे बसे ग्रामीणों में उत्साह और उम्मीद की नई लहर है। हर साल बाढ़ की भयावहता झेलने वाले लोगों को अब उम्मीद है कि यह तटबंध उनके खेतों, घरों, रास्तों और जीवन को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभाएगा। कृषि उत्पादन में भी स्थिरता आएगी और आर्थिक नुकसान कम होगा। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन के स्तर पर प्रशासन को भी राहत मिलेगी, क्योंकि बड़े पैमाने पर होने वाले विस्थापन और राहत कार्यों का बोझ काफी हद तक कम होगा।
आगे की प्रक्रिया
अब प्रशासन आगामी सप्ताह में तटबंध निर्माण से जुड़ी भूमि सर्वेक्षण, तकनीकी मूल्यांकन, और फिजिबिलिटी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। रिपोर्ट के बाद निर्माण एजेंसियों को टेंडर जारी करने और काम शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अनुमान है कि प्रशासन अगले वर्ष बरसात से पहले परियोजना का प्रारंभिक चरण शुरू करने का प्रयास करेगा।






