NEET और JEE में बड़े बदलाव की तैयारी: 11वीं में ही एग्जाम कराने का प्रस्ताव, बोर्ड मार्क्स भी जुड़ेंगे;
Share your love

कोचिंग के घंटे घटाकर 3 घंटे तक सीमित करने की योजना
NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार बड़े बदलावों पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार, इन परीक्षाओं को 11वीं में ही आयोजित किया जा सकता है। साथ ही छात्रों की कोचिंग पर निर्भरता कम करने के लिए कोचिंग सेंटर के घंटे रोज 2–3 घंटे तक सीमित करने की सिफारिश की गई है।
केंद्र का उद्देश्य है कि छात्रों पर 12वीं कक्षा में पढ़ाई और एंट्रेंस टेस्ट—दोनों का संयुक्त दबाव कम किया जाए, और डमी स्कूल जैसी समस्याओं पर भी अंकुश लगे।
NEET–JEE + बोर्ड परीक्षा को मिलाकर हाइब्रिड मॉडल का सुझाव
एक केंद्रीय पैनल को इन सुधारों की जिम्मेदारी दी गई थी। समिति ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
✔ क्लास 11 में NEET-JEE कराना
✔ कोचिंग के दैनिक घंटे घटाना
✔ बोर्ड परीक्षा और एंट्रेंस परीक्षा को मिलाकर एक हाइब्रिड मार्किंग सिस्टम बनाना
इस मॉडल में बोर्ड के नंबर और प्रतियोगी परीक्षा दोनों को वेटेज दिया जा सकता है।
15 नवंबर की बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा
11 सदस्यीय समिति की 15 नवंबर को हुई बैठक में इन प्रस्तावों पर विस्तार से विचार हुआ।
पैनल ने यह जांचा कि छात्रों को कोचिंग लेने के लिए मजबूर करने वाली स्थितियाँ क्या हैं और उन्हें कैसे बदला जा सकता है।
सुझावों में यह भी शामिल है कि:
➡ परीक्षाएँ साल में दो बार — अप्रैल और नवंबर में आयोजित हों
➡ कोचिंग की लंबी दिनचर्या से होने वाली थकान को कम किया जाए
समिति के अनुसार, स्कूल के बाद 5–6 घंटे कोचिंग करना छात्रों के लिए अत्यधिक भार बन चुका है। इसे कम करने से स्कूल शिक्षा मजबूत होगी और तनाव घटेगा।
हाइब्रिड मार्किंग मॉडल: बोर्ड + एंट्रेंस टेस्ट
पैनल ने सुझाव दिया कि प्रवेश परीक्षाओं के लिए ऐसा मॉडल बनाया जाए:
- बोर्ड परीक्षा के अंकों को वेटेज दिया जाए
- प्रतियोगी परीक्षा के स्कोर को भी शामिल किया जाए
अधिकारियों के मुताबिक, इससे:
✔ क्लासरूम शिक्षा मजबूत होगी
✔ इंटरनल असेसमेंट की गुणवत्ता बढ़ेगी
✔ कोचिंग पर निर्भरता कम होगी






