मंदिर के पास रहने का सच: ‘द्वार वेध’ का खतरा या आध्यात्मिक शक्ति का वरदान? वास्तु के ये नियम जानकर चौंक जाएंगे
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संवाद 24 डेस्क। भारतीय संस्कृति में मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और सामुदायिक केंद्र होते हैं। लेकिन जब बात निजी आवास की आती है, तो एक सवाल अक्सर उठता है: क्या घर के बिल्कुल पास मंदिर होना वास्तु शास्त्र के अनुसार ठीक है?
वास्तु शास्त्र, जो भवन निर्माण के प्राचीन भारतीय विज्ञान पर आधारित है, मानता है कि स्थान और दिशा का ऊर्जा प्रवाह पर सीधा असर होता है। इस सिद्धांत के अनुसार, घर के पास मंदिर होने के अपने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हो सकते हैं, जिन पर विचार करना आवश्यक है।
नकारात्मक पहलू: जब हो सकता है वास्तु दोष
वास्तु विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि आपके घर का मुख्य द्वार (Main Gate) मंदिर के द्वार के ठीक सामने है, तो यह कई तरह के वास्तु दोष उत्पन्न कर सकता है, जिसे ‘द्वार वेध’ के रूप में जाना जाता है।
ऊर्जा का तीव्र प्रवाह: मंदिर से आने वाली अत्यधिक और केंद्रित ऊर्जा (जिसे ‘शक्तिपात’ भी कहते हैं) सीधे घर में प्रवेश करती है। यह ऊर्जा का असंतुलन पैदा कर सकती है, जिससे घर में रहने वालों को मानसिक तनाव, चिंता और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ हो सकती हैं।
दैनंदिन जीवन में बाधा: बड़े मंदिर या आश्रमों के आसपास सुबह-शाम होने वाली धार्मिक गतिविधियों, लाउडस्पीकर पर भजन-कीर्तन और भक्तों की भारी भीड़ से उत्पन्न होने वाला शोर घर के शांतिपूर्ण वातावरण को भंग कर सकता है। यह शोर घर के सदस्यों के दैनिक दिनचर्या और कार्यों में बाधा डाल सकता है।
छाया और दृष्टि दोष: कई बार मंदिर या उसकी संरचना की छाया घर पर पड़ती है, जिसे वास्तु में नकारात्मक माना जाता है। साथ ही, मंदिर के प्रवेश द्वार पर अक्सर लोगों की भीड़ या चप्पल-जूतों का जमावड़ा रहने से एक नकारात्मक दृष्टि दोष (Evil Eye) उत्पन्न होने की संभावना रहती है, जिसका प्रभाव घर की खुशहाली पर पड़ सकता है।
✅ सकारात्मक पहलू: जब मिलता है लाभ
हालांकि, मंदिर का घर के पास होना केवल दोष ही नहीं लाता; यह कई मायनों में शुभ और लाभकारी भी सिद्ध हो सकता है:
सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता: मंदिर के आसपास का क्षेत्र स्वाभाविक रूप से पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है। यहाँ पूजा-पाठ, हवन और मंत्रोच्चार लगातार होते रहते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। इस माहौल में रहने से व्यक्ति मानसिक शांति और धार्मिकता की ओर ज़्यादा आकर्षित होता है।
ज्येष्ठ-मध्यम स्थिति: ज्योतिषियों के अनुसार, मंदिर का अत्यधिक निकट होना उन्हीं व्यक्तियों के लिए अशुभ फलदायी होता है जिनकी कुंडली में अशुभ ग्रह प्रभावी हों या जो गृहस्थ जीवन के दायित्वों से विमुख हो रहे हों। अन्यथा, यह एक आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करता है।
वास्तु अनुसार इन उपायों से करें दोष कम
यदि आपके घर के पास मंदिर है और आप किसी प्रकार के वास्तु दोष से बचना चाहते हैं, तो कुछ सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं:
तुलसी का पौधा: घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने या पास तुलसी का पौधा लगाना मंदिर से आ रही तीव्र ऊर्जा को संतुलित करने में सहायक होता है।
हल्के रंग का पर्दा: यदि मंदिर का प्रभाव आपके घर की खिड़की या दरवाजे के पास पड़ रहा है, तो उस स्थान पर हल्के या हरे रंग का पर्दा लगाना ऊर्जा को विभाजित करता है, जिससे नकारात्मक प्रभाव कम हो जाता है।
संतुलित दिनचर्या: यदि मंदिर के कारण बहुत अधिक शोरगुल होता है, तो आपको अपनी दिनचर्या में ध्यान, योग, या अन्य मानसिक शांति बनाए रखने वाले क्रियाकलापों को शामिल करना चाहिए।
वास्तु शास्त्र यह स्पष्ट करता है कि मंदिर के पास रहने का निर्णय स्थान, मंदिर की बनावट और आपके घर के प्रवेश द्वार की दिशा पर निर्भर करता है। अत्यधिक निकटता, खासकर द्वार के ठीक सामने, समस्या पैदा कर सकती है, लेकिन एक सम्मानजनक दूरी और सही वास्तु नियमों का पालन करके इसके आध्यात्मिक लाभ को प्राप्त किया जा सकता है।






