अंतरिक्ष में मिला ‘शॉर्टकट’: सौरमंडल को मिल्की वे के दूर कोनों से जोड़ती गर्म प्लाज्मा की विशाल सुरंग

संवाद 24 डेस्क। लंबे समय से साइंस-फिक्शन फिल्मों और उपन्यासों में दिखाई जाने वाली “अंतरतारकीय सुरंगें” अब सिर्फ कल्पना नहीं रह गईं। जर्मनी के मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल फिजिक्स (MPE) की अगुआई में एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने eROSITA एक्स-रे टेलीस्कोप के नए डेटा के आधार पर एक ऐसी वास्तविक संरचना की खोज की है जो हमारे सौरमंडल को आकाशगंगा के सुदूर हिस्सों से जोड़ती है। यह कोई काल्पनिक वॉर्महोल नहीं, बल्कि लाखों डिग्री गर्म और बेहद कम घनत्व वाले प्लाज्मा से बनी एक भौतिक “सुरंग” या “कॉरिडोर” है।

यह खोज नवंबर 2025 में Astronomy & Astrophysics जर्नल में प्रकाशित हुई है और इसे अंतरिक्ष विज्ञान की अब तक की सबसे रोमांचक खोजों में से एक माना जा रहा है।

हम कहाँ रहते हैं? लोकल हॉट बबल की असलियत
हमारा सूर्य और पूरा सौरमंडल एक विशाल, गर्म और लगभग खाली बुलबुले के अंदर स्थित है जिसे वैज्ञानिक “Local Hot Bubble” (LHB) कहते हैं। इसकी खोज सबसे पहले 1970-80 के दशक में हुई थी, जब एक्स-रे ऑब्जर्वेट्री ने हमारे आसपास के अंतरिक्ष से असामान्य रूप से तेज एक्स-रे उत्सर्जन देखा था।
1. व्यास: लगभग 800–1200 प्रकाश-वर्ष
2. तापमान: 1–2 million केल्विन (सूर्य की सतह से 100 गुना ज्यादा गर्म)
3. घनत्व: पृथ्वी के वायुमंडल से 10⁹ (1 अरब) गुना कम
4. आयु: लगभग 10–20 million वर्ष

इस बुलबुले का निर्माण पिछले 15 million वर्षों में हुए दर्जनों सुपरनोवा विस्फोटों से हुआ। इन विस्फोटों ने इतनी ऊर्जा पैदा की कि उन्होंने सैकड़ों प्रकाश-वर्ष के दायरे में मौजूद ठंडी गैस और धूल को पूरी तरह झाड़ू की तरह साफ कर दिया। जो गैस बची, वह लाखों डिग्री तक गर्म होकर फैल गई और एक विशाल गुहा बना दिया। हमारा सूर्य संयोग से इसी गुहा के अंदर है और पिछले 5–10 million वर्षों से इसके भीतर यात्रा कर रहा है।

नई खोज: बुलबुले से निकलती दो विशाल “सुरंगें”
eROSITA (extended ROentgen Survey with an Imaging Telescope Array) रूस-जर्मनी का संयुक्त एक्स-रे टेलीस्कोप है जो 2019 से अंतरिक्ष में कार्यरत है। यह अब तक का सबसे संवेदनशील पूरे आकाश का सर्वेक्षण करने वाला एक्स-रे उपकरण है। इसके पहले 4 ऑल-स्काई सर्वे (2020–2023) के डेटा को नासा के पुराने ROSAT मिशन (1990–1999) के डेटा के साथ मिलाकर वैज्ञानिकों ने एक 3D मॉडल तैयार किया।

इस मॉडल में जो दिखा, वह हैरान करने वाला था:
1. लोकल हॉट बबल से दो प्रमुख “आर्म” या “टनल” बाहर की ओर निकल रही हैं।
2. एक टनल सेंटॉरस (Centaurus) और ल्यूपस (Lupus) तारामंडलों की दिशा में जाती है।
3. दूसरी टनल कैनिस मेजर और पुुपिस (Puppis) क्षेत्र की ओर जाती है।
4. दोनों टनलें कम से कम 3000–5000 प्रकाश-वर्ष लंबी प्रतीत होती हैं और इनका व्यास 200–500 प्रकाश-वर्ष है।
5. इनमें प्लाज्मा का तापमान 1.5–3 million K है और यह एक निश्चित दिशा में बह रहा है – जैसे कोई नदी।
6. इन संरचनाओं को वैज्ञानिक “superbubble outflows” या “galactic chimneys” भी कह रहे हैं।

यह सुरंगें कैसे बनीं?
सुपरनोवा विस्फोट एक साथ नहीं हुए थे। ये अलग-अलग समय पर अलग-अलग तारों से हुए। लेकिन ये सब एक ही तारा-निर्माण क्षेत्र (Gould Belt और Scorpius-Centaurus Association) में हुए थे। जब कई सुपरनोवा एक-दूसरे के बहुत पास होते हैं, तो उनकी शॉक वेव्स आपस में मिलकर एक बहुत बड़ा “सुपरबबल” बना लेती हैं।

इस सुपरबबल का दबाव इतना अधिक होता है कि वह आकाशगंगा क डिस्क को ऊपर-नीचे छेद कर देता है और गर्म गैस को हजारों प्रकाश-वर्ष दूर फेंक देता है। यही प्रक्रिया हमारी दोनों नई खोजी गई “सुरंगों” के पीछे है।

क्या ये वाकई अंतरिक्ष यात्रा के शॉर्टकट हो सकते हैं?
हाँ और नहीं।
नहीं, क्योंकि:
ये वॉर्महोल नहीं हैं, इनमें समय या दूरी में “शॉर्टकट” नहीं होता। इनकी लंबाई हजारों प्रकाश-वर्ष है, प्रकाश को भी 3000–5000 साल लगेंगे पार करने में।

हाँ, क्योंकि:
इनका घनत्व सामान्य अंतरतारकीय माध्यम से 100–1000 गुना कम है। इसका मतलब है कि कोई अंतरिक्ष यान यहाँ बहुत कम ड्रैग (प्रतिरोध) का सामना करेगा। कॉस्मिक किरणों और अंतरतारकीय धूल का घनत्व भी बहुत कम है, जो यान और उसके इंस्ट्रूमेंट्स को कम नुकसान पहुँचाएगा। भविष्य में अगर हम कभी सौरमंडल के बाहर निकलेंगे, तो ये टनल सबसे सुरक्षित और ऊर्जा-कुशल रास्ते हो सकते हैं।

मिल्की वे का स्पंज जैसा ढांचा
यह खोज सिर्फ हमारे इलाके तक सीमित नहीं है। पूरे मिल्की वे में ऐसे सैकड़ों-हजारों सुपरबबल और टनलें हैं। ये सब मिलकर एक जटिल 3D नेटवर्क बनाते हैं जो दिखने में समुद्री स्पंज जैसा लगता है: ठंडे, घने गैस के “फिलामेंट्स” और “क्लाउड्स” जहाँ नए तारे बनते हैं। गर्म, कम घनत्व वाले “वॉइड्स” और “टनल्स” जहाँ सुपरनोवा की गर्म गैस बहती है
यह नेटवर्क लगातार बदलता रहता है। नए सुपरनोवा नई टनलें बनाते हैं, पुरानी ठंडी होकर ढह जाती हैं। यह आकाशगंगा का अपना “सर्कुलेटरी सिस्टम” है जो गैस, ऊर्जा और भारी तत्वों को एक कोने से दूसरे कोने तक पहुँचाता है।

आने वाले मिशनों का महत्व
eROSITA 2026-27 तक 8 ऑल-स्काई सर्वे पूरा कर लेगा। तब हमें मिल्की वे की पूरी 3D एक्स-रे मैप मिल जाएगी। ESA का Athena मिशन (लॉन्च: 2035-37) 100 गुना ज्यादा संवेदनशील होगा और इन टनल्स के अंदर की गैस की गति, रासायनिक संरचना और चुंबकीय क्षेत्र को माप सकेगा। NASA का प्रस्तावित Lynx X-ray Observatory इन संरचनाओं को और भी बारीकी से देखेगा।

पृथ्वी और जीवन पर प्रभाव
इन टनल्स का एक अप्रत्यक्ष लेकिन बहुत महत्वपूर्ण प्रभाव हमारी पृथ्वी पर भी है: कॉस्मिक किरणें (उच्च-ऊर्जा कण) इन गर्म टनल्स में बहुत तेजी से यात्रा करती हैं। जब हमारा सौरमंडल इनमें से किसी टनल के मुहाने पर होता है (जैसा कि अभी है), तो पृथ्वी पर ज्यादा कॉस्मिक किरणें पहुँचती हैं। ये किरणें बादलों के निर्माण को प्रभावित कर सकती हैं और जलवायु पर सूक्ष्म प्रभाव डाल सकती हैं।

कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि पिछले कुछ मिलियन वर्षों में पृथ्वी पर आए हिमयुगों का एक कारण हमारा लोकल हॉट बबल से बाहर निकलना या इन टनल्स के प्रभाव क्षेत्र में आना भी हो सकता है।

लंबे समय तक हमने अंतरिक्ष को खाली, ठंडा और मृत समझा था। लेकिन eROSITA और आने वाले उपकरण बता रहे हैं कि यह एक जीवंत, गतिशील और आपस में जुड़ा हुआ महासागर है, जिसमें गर्म गैस की नदियाँ और सुरंगें बह रही हैं, सुपरनोवा की लहरें उठ रही हैं, और नए तारे जन्म ले रहे हैं।

हमारा सौरमंडल इस महासागर के एक छोटे से, शांत कोने में है, लेकिन अब हम जान चुके हैं कि इसके ठीक बाहर से हाईवे शुरू हो जाते हैं जो हमें हजारों प्रकाश-वर्ष दूर तक ले जा सकते हैं। शायद एक दिन, सुदूर भविष्य में, मानव जाति इन्हीं गर्म प्लाज्मा की सुरंगों में से गुजरकर दूसरे तारा-मंडलों तक पहुँचेगी। तब हम कह सकेंगे कि “इंटरस्टेलर” फिल्म के वो दृश्य सचमुच दूर की कौड़ी नहीं थे, वे तो बस कुछ सौ साल आगे की विज्ञान की झलक थे।

Samvad 24 Office
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