
संवाद 24 नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी अशांति के बीच वेस्ट बैंक एक बार फिर भारी हिंसा और बारूदी टकराव की चपेट में आ गया है। इजरायल में बहुप्रतीक्षित संसदीय चुनावों के लिए मतदान शुरू होने में महज चार दिन का वक्त बाकी था कि शुक्रवार सुबह एक दुस्साहसिक हमले ने समूचे सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया। हथियारबंद हमलावरों ने वेस्ट बैंक स्थित एक इजरायली सैन्य चौकी को निशाना बनाकर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। अचानक हुए इस घात लगाकर किए गए हमले में दो इजरायली सैनिकों की मौके पर ही जान चली गई, जबकि कई अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने करीब 20 मिनट तक चली भीषण मुठभेड़ में दोनों हमलावरों को ढेर कर दिया। इस खूनी झड़प के तुरंत बाद पूरे इलाके में तनाव चरम सीमा पर पहुंच गया है और इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने व्यापक स्तर पर दंडात्मक व आतंकवाद-विरोधी अभियान छेड़ दिया है।
20 मिनट तक गूंजती रहीं गोलियों की तड़तड़ाहट
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह सनसनीखेज वारदात हेब्रोन शहर के निकट स्थित अति-संवेदनशील येहुदा जंक्शन के पास घटी। शुक्रवार तड़के दो आधुनिक हथियारों से लैस फलस्तीनी हमलावर चुपचाप इजरायली सैन्य ठिकाने की अग्रिम पोस्ट के बेहद करीब पहुंच गए। जब तक संतरी और चौकी पर तैनात सैनिक स्थिति को पूरी तरह भांप पाते, हमलावरों ने अपनी स्वचालित बंदूकों के मुंह खोल दिए। अचानक हुई गोलाबारी से चौकी पर अफरातफरी मच गई। हालांकि, इजरायली सैनिकों ने तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग शुरू की। दोनों पक्षों के बीच करीब बीस मिनट तक भीषण गोलीबारी का दौर चला। सेना की त्वरित कार्रवाई में दोनों हमलावर गोलियों से छलनी होकर वहीं गिर पड़े। मुठभेड़ समाप्त होने के बाद जब तलाशी ली गई, तो मारे गए हमलावरों के कब्जे से एक अमेरिकी मूल की एम-16 (M-16) असॉल्ट राइफल, एक हैंडगन और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद किए गए।
हेब्रोन की पूर्ण घेराबंदी, मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू
घटना के तुरंत बाद इजरायल सरकार और रक्षा मुख्यालय में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए रक्षा बलों ने तत्काल प्रभाव से पूरे वेस्ट बैंक में आम नागरिकों और वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। विशेष रूप से हेब्रोन शहर को चारों तरफ से बख्तरबंद गाड़ियों और कंटीले तारों से सील कर दिया गया है। आईडीएफ और खुफिया शाखा ‘शिन बेत’ ने हमलावरों के नेटवर्क और उनके सहयोगियों को चिन्हित करने के लिए हेब्रोन में घर-घर सघन तलाशी अभियान (Cordon and Search Operation) शुरू किया है। इस दौरान दर्जनों संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए अज्ञात स्थानों पर भेजा गया है। यही नहीं, इजरायल की पारंपरिक सख्त नीति के तहत हमलावरों से जुड़े बुनियादी ढांचे और ठिकानों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। सेना का कहना है कि यह हमलावरों के पूरे समर्थन नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए लक्षित कार्रवाई का हिस्सा है।
चुनाव में खलल डालने का सुनियोजित षड्यंत्र: नेतन्याहू का कड़ा रुख
संसदीय चुनाव से ठीक चार दिन पहले हुए इस हमले ने इजरायल के सियासी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। घटना के फौरन बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा मामलों की विशेष कैबिनेट, शीर्ष सैन्य कमांडरों और खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों के साथ एक आपातकालीन उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। बैठक के पश्चात कड़ा संदेश जारी करते हुए प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि सेना की मुस्तैदी और पराक्रम की बदौलत एक बहुत बड़े आतंकी षड्यंत्र को समय रहते नाकाम कर दिया गया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने और अराजकता फैलाने की फलस्तीनी चरमपंथियों की कोई भी मंशा कामयाब नहीं होने दी जाएगी। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि चरमपंथी ताकतों के लिए अब कोई सुरक्षित पनाहगाह बाकी नहीं रहेगी और इस हमले में शामिल अथवा इसे पर्दे के पीछे से समर्थन देने वाले हर तत्व को भारी कीमत चुकानी होगी।
क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराता नया खतरा
वेस्ट बैंक लंबे समय से इजरायल और फलस्तीनी नागरिकों के बीच टकराव का प्रमुख केंद्र रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के मुहाने पर इस तरह के घातक हमलों से न केवल घरेलू चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं, बल्कि यह पूरे इलाके में हिंसा की एक नई और खतरनाक लहर को जन्म दे सकता है। आम लोगों की आवाजाही ठप होने और बख्तरबंद टुकड़ियों के मार्च से पूरे वेस्ट बैंक में सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन जमीन के भीतर सुलगता आक्रोश किसी भी वक्त एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप अख्तियार कर सकता है। सीमाई चौकियों पर अतिरिक्त कुमुक तैनात कर दी गई है और पूरे इलाके को हाई अलर्ट पर रखा गया है।






