
संवाद 24 नई दिल्ली। फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत कई बड़े शहरों में भड़की अभूतपूर्व सड़क हिंसा और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के मौजूदा हालात पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की नीतियों की कड़ी आलोचना की है। ट्रंप ने इस पूरे उपद्रव की जड़ अनियंत्रित आव्रजन (इमिग्रेशन) को ठहराते हुए चेतावनी दी है कि यदि यूरोपीय देशों ने अपनी सीमाओं पर सख्त पहरा नहीं बैठाया और कठोर फैसले नहीं लिए, तो पेरिस जैसे ऐतिहासिक शहरों की पहचान पूरी तरह बदल जाएगी।
मैक्रों की नीतियों पर ट्रंप का सीधा प्रहार
वॉशिंगटन में मीडिया और सार्वजनिक मंच पर अपनी राय रखते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फ्रांस में जो कुछ घटित हो रहा है, वह किसी बुनियादी समस्या या शैक्षणिक व्यवस्था का परिणाम नहीं है, बल्कि यह बिना किसी ठोस नीति के खुली छोड़ी गई सीमाओं का स्वाभाविक नतीजा है। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने सीधे राष्ट्रपति मैक्रों से भी इस मुद्दे पर बातचीत की है और उन्हें चेताया है कि वे एक बहुत बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक चूक कर रहे हैं।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “मैंने राष्ट्रपति मैक्रों से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अपनी सीमाओं को तुरंत बंद करें। आप दुनिया भर के लोगों को बिना किसी गहन जांच और नियंत्रण के अपने देश में आने की खुली छूट दे रहे हैं। यदि स्थिति पर तत्काल नियंत्रण नहीं पाया गया, तो बहुत जल्द पेरिस एक मुस्लिम बहुल शहर में तब्दील हो जाएगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर संपूर्ण यूरोप ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी और उपद्रवी व आपराधिक तत्वों को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया, तो आने वाले समय में यूरोपीय पहचान और स्थायित्व गंभीर संकट में पड़ जाएगा।
आसमान छूती महंगाई से दंगों तक: फ्रांस में कैसे बिगड़े हालात?
फ्रांस में भड़की इस अशांति की शुरुआत बढ़ती महंगाई, बुनियादी जीवन-यापन के बढ़ते खर्च और सार्वजनिक संस्थानों की बदहाल स्थिति को लेकर शुरू हुए शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों से हुई थी। हालांकि, कुछ ही दिनों के भीतर यह आंदोलन उग्र हो गया और देखते ही देखते यह हाल के दशकों की सबसे भीषण सड़क हिंसा में तब्दील हो गया। पेरिस, लिली, नीस और मार्सिले जैसे प्रमुख शहरों में सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाया गया। दर्जनों इमारतों में आगजनी, व्यावसायिक दुकानों में खुली लूटपाट और पुलिस बलों पर हमलों के बाद सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में इस तबाही को लेकर भारी रोष है, क्योंकि आगजनी और तोड़फोड़ ने शहरों के सामान्य जनजीवन को पूरी तरह ठप कर दिया है।
प्रशासन का सख्त रुख: कर्फ्यू और इमरजेंसी के संकेत
हालात बेकाबू होते देख फ्रांस की सरकार ने उपद्रवियों से निपटने के लिए बेहद कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नु के निर्देश पर स्थानीय प्रशासन ने पेरिस, लिली और नीस के कई संवेदनशील इलाकों में रात का कर्फ्यू लागू कर दिया है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने फिलहाल पूरे देश में एक साथ पूर्ण कर्फ्यू लगाने से परहेज किया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सड़कों पर अराजकता इसी तरह जारी रही तो सरकार राष्ट्रीय आपातकाल (स्टेट ऑफ इमरजेंसी) घोषित करने में जरा भी संकोच नहीं करेगी। फ्रांसीसी सुरक्षा एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 2,400 से अधिक दंगाइयों और उपद्रवियों को हिरासत में लिया है। सरकार ने इस हिंसक भीड़ को सार्वजनिक रूप से ‘दंगाई और लुटेरे’ करार दिया है। हिंसा में संलिप्त मुख्य साजिशकर्ताओं की पहचान करने के लिए 200 से अधिक विशेष जांच अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय टीम तैनात की गई है। राष्ट्रपति मैक्रों ने भी कानून हाथ में लेने वालों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि जिन्होंने राष्ट्रीय धरोहरों और संपत्तियों को नष्ट किया है, उन्हें कानून के तहत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
यूरोप में गहराता आव्रजन और आंतरिक सुरक्षा का संकट
फ्रांस के ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर पूरे महाद्वीप में आव्रजन, सीमा सुरक्षा और आंतरिक सामाजिक संतुलन की बहस को केंद्र में ला खड़ा किया है। डोनाल्ड ट्रंप की सीधी और बेबाक टिप्पणियों ने न केवल फ्रांस बल्कि समूचे यूरोपीय नेतृत्व को अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं की समीक्षा करने के लिए विवश कर दिया है। अब देखना यह होगा कि मैक्रों प्रशासन इस आंतरिक अशांति को दबाने और सीमाओं पर नियंत्रण बहाल करने के लिए ट्रंप की सलाह पर क्या रुख अपनाता है या अपने पारंपरिक यूरोपीय ढांचे के तहत ही इस संकट का समाधान तलाशता है।






