
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के नवाबगंज कस्बे में समलैंगिक विवाह से जुड़ा विवाद रविवार सुबह मारपीट में बदल गया। दिल्ली में रहने वाली युवती अपनी महिला साथी को साथ ले जाने के लिए उसके घर पहुंची थी। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जिसके बाद लाठी-डंडे चलने लगे। घटना में दिल्ली से आई युवती और दूसरी युवती के पिता के घायल होने की खबर है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा है।
दिल्ली में साथ रहने के बाद घर लौटी युवती, फिर शुरू हुआ विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नवाबगंज थाना क्षेत्र के बाईपास रोड निवासी युवती की पहचान दिल्ली में रहने वाली एक युवती से हुई थी। दोनों ने कथित तौर पर विवाह किया था और कुछ समय तक दिल्ली में साथ रहीं। बाद में नवाबगंज निवासी युवती की मां उसे वापस घर ले आईं। इसके बाद दोनों के साथ रहने को लेकर विवाद शुरू हो गया।
बताया गया है कि करीब 20 दिन पहले दिल्ली निवासी युवती नवाबगंज थाने पहुंची थी। उसने दूसरी युवती के माता-पिता पर आरोप लगाते हुए अपनी साथी को साथ ले जाने की मांग की थी। रविवार सुबह वह अपने कुछ साथियों के साथ दोबारा नवाबगंज पहुंची और अपनी साथी के घर गई। यहां परिजनों के साथ कहासुनी बढ़ने पर विवाद मारपीट तक पहुंच गया।
मारपीट में दोनों पक्षों के लोग घायल
विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडों से मारपीट हुई। घटना में दिल्ली निवासी युवती और नवाबगंज निवासी युवती के पिता के सिर में चोट लगने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद दोनों घायल थाने पहुंचे। हालांकि, घटना के दौरान किस पक्ष ने पहले मारपीट शुरू की, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
गुमशुदगी के मामले में पुलिस लगा चुकी है फाइनल रिपोर्ट
थाना प्रभारी राजीव कुमार के अनुसार, नवाबगंज निवासी युवती की मां ने पहले अपनी बेटी की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। बाद में पुलिस ने विवाह संबंधी प्रमाणपत्र देखने के बाद मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। ताजा विवाद के संबंध में थाना प्रभारी ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है। तहरीर मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब आगे की कार्रवाई पर नजर
समलैंगिक विवाह के बाद साथ रहने और फिर परिजनों के बीच हुए इस विवाद में पुलिस की अगली कार्रवाई शिकायत मिलने और जांच के तथ्यों पर निर्भर करेगी। फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार दोनों पक्षों की ओर से तहरीर नहीं दी गई थी। मामले में किसी पक्ष के आरोपों को जांच के बिना प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।






