क्या आपकी रसोई में पहुंच रहा है ज़हर? खुले मसालों पर सरकार का बड़ा प्रहार, बिक्री पर लगा पूर्ण प्रतिबंध

​संवाद 24 मुंबई। भारतीय रसोई की पहचान और व्यंजनों की आत्मा माने जाने वाले मसालों को लेकर एक चौंकाने वाला और बड़ा फैसला सामने आया है। अगर आप भी बाजार से खुला पिसा हुआ मसाला खरीदने के आदी हैं, तो अब आपको अपनी यह आदत तुरंत बदलनी होगी। महाराष्ट्र सरकार के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने आम जनता की सेहत के साथ हो रहे गंभीर खिलवाड़ को रोकने के लिए खुले व बिना पैकेट वाले पिसे मसालों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। प्रशासन का यह कदम न केवल मिलावटखोरों पर नकेल कसेगा, बल्कि हर घर की थाली तक पहुंचने वाले खाने की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा।

​उत्पादन स्थल पर ही होगी पैकिंग और सीलिंग
​एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा जारी किए गए सख्त दिशानिर्देशों के अनुसार, अब किसी भी प्रकार के मसाले को खुले रूप में बेचना कानूनी अपराध माना जाएगा। नए नियमों के तहत उत्पादकों को मसालों को तैयार करते ही उत्पादन स्थल (मैन्युफैक्चरिंग यूनिट) पर ही पूरी तरह पैक और सीलबंद करना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि बाजार में बिक रहे प्रत्येक मसाले की गुणवत्ता का सत्यापन किया जा सके और किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर उत्पाद के मूल स्रोत का आसानी से पता लगाया जा सके।

​कैंसरकारी रंगों और घातक रसायनों पर पूरी तरह रोक
​मसालों को आकर्षक, चमकदार और गहरा रंग देने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले खतरनाक औद्योगिक रंगों पर प्रशासन ने कड़ा संज्ञान लिया है। जांच में सामने आया है कि कई जगह मसालों में मेटानिल येलो, रोडामाइन बी, सूडान डाई और लेड क्रोमेट जैसे जानलेवा रंगों का उपयोग किया जा रहा था। इसके साथ ही मसालों को कीटाणुरहित करने के नाम पर इस्तेमाल किए जाने वाले एथिलीन ऑक्साइड (Ethylene Oxide) के प्रयोग को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एथिलीन ऑक्साइड और ये कृत्रिम रंग सीधे तौर पर कैंसर जैसी असाध्य बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

​ईंट का चूरा, लकड़ी का बुरादा और चॉक मिलाने वालों की खैर नहीं
​खुले मसालों में मुनाफे के लिए वजन और मात्रा बढ़ाने वाले असामाजिक तत्वों को प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि मिर्च पाउडर में ईंट का चूरा, धनिये में लकड़ी का बुरादा, हल्दी में चॉक पाउडर या स्टार्च जैसे अखाद्य पदार्थ मिलाने वालों के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा, घटिया और सड़े-गले कच्चे माल को पीसकर मसाला तैयार करने वाले सिंडिकेट्स पर भी पैनी नजर रखी जा रही है।

​स्वच्छता और भंडारण को लेकर कड़े नियम
​अक्सर देखा जाता है कि मसालों को सुखाने के लिए खुले मैदानों या सड़कों का सहारा लिया जाता है। नए आदेश के मुताबिक, अब किसी भी सार्वजनिक सड़क, नाली, कूड़ेदान या पशुशाला के पास मसाले सुखाने पर पाबंदी होगी। मसालों के निर्माण और भंडारण स्थल को सूखा, कीटाणुमुक्त और पूरी तरह स्वच्छ रखना होगा। साथ ही, जहां मसाले रखे जा रहे हों, वहां कीटनाशक, औद्योगिक रसायन या अन्य जहरीले पदार्थ रखने की सख्त मनाही होगी।

​किन-किन पर लागू होगा यह आदेश?
​यह व्यापक आदेश केवल खुदरा दुकानों तक सीमित नहीं है। हल्दी, लाल मिर्च, धनिया, जीरा, काली मिर्च, दालचीनी, लौंग, इलायची, हींग, केसर, खसखस, गरम मसाला और करी पाउडर समेत सभी मसाला श्रेणियों के निर्माताओं, थोक व्यापारियों, रिटेलर्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स, होटलों, रेस्टोरेंट्स, कैटरर्स और बड़े संस्थागत भोजनालयों (कैंटीन) पर भी यह नियम सख्ती से लागू होगा।

​पैकेट पर इन जानकारियों का होना अनिवार्य
​पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर पैकेट पर उत्पाद का नाम, उसमें प्रयुक्त सामग्री की पूरी सूची, निर्माता का नाम व पूरा पता, वैध FSSAI लाइसेंस नंबर, बैच नंबर, निर्माण और पैकेजिंग की तारीख, तथा ‘बेस्ट बिफोर’ (उपयोग की अंतिम तिथि) स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए। इसके अलावा, जो कंपनियां अपने मसालों के 100% शुद्ध, प्राकृतिक या जैविक (ऑर्गेनिक) होने का झूठा व भ्रामक दावा करेंगी, उनके खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

​नियम तोड़ा तो जेल की हवा खानी तय
​खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने साफ कर दिया है कि तय मानकों की अनदेखी करने वालों के उत्पाद तत्काल जब्त किए जाएंगे, बिक्री पर रोक लगेगी, बाजार से माल वापस मंगाया जाएगा और उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे। साथ ही दोषियों के खिलाफ अदालती कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजा जाएगा। यह फैसला आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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