
संवाद 24, फर्रुखाबाद। बुधवार रात आई भीषण आंधी और बारिश ने जिले के ग्रामीण इलाकों, विशेषकर गंगा पार क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। आपदा के 36 घंटे बीत जाने के बाद भी जनजीवन पटरी पर नहीं लौट सका है। राजेपुर और अमृतपुर क्षेत्र में करीब 150 बिजली के खंभे टूटने से लगभग 70 गांव पूरी तरह अंधेरे में डूब गए हैं। वहीं, प्रमुख मार्गों पर विशालकाय पेड़ों के गिरने से स्टेट हाईवे समेत ग्रामीण सड़कों पर यातायात घंटों ठप रहा, जिससे एंबुलेंस और रोडवेज बसों जैसी आवश्यक सेवाएं भी फंसी रहीं।
पानी और संचार का गहराया संकट राजेपुर क्षेत्र के 30 और अमृतपुर के करीब 40 गांवों में डेढ़ दिन से बिजली गुल है। लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने के कारण घरों के इनवर्टर जवाब दे चुके हैं, जिससे मोबाइल फोन की बैटरियां खत्म हो गई हैं और लोगों का आपसी संपर्क कट गया है। बिजली से चलने वाले सबमर्सिबल पंप बंद पड़ने से ग्रामीणों के सामने पीने के पानी की विकराल समस्या खड़ी हो गई है। दैनिक जरूरतों के लिए लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
स्टेट हाईवे पर विशाल पेड़ गिरा, बाल-बाल बचा ऑटो तूफान से यातायात व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई। गुरुवार शाम करीब सात बजे फर्रुखाबाद-बदायूं स्टेट हाईवे पर नगला हूसा के पास एक विशाल पेड़ सड़क पर आ गिरा। इसकी चपेट में आकर एक ऑटो पलट गया, हालांकि गनीमत रही कि उस समय ऑटो में कोई सवारी नहीं थी। पेड़ गिरने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम में 108 एंबुलेंस, रोडवेज बसें, ट्रक और दोपहिया वाहन घंटों फंसे रहे। स्थिति को देखते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने खुद कुल्हाड़ी उठाकर पेड़ की टहनियां काटीं और किनारे से वाहनों को निकालने का सीमित रास्ता बनाया।
बसों के मार्ग बदले, ग्रामीण सड़कों पर भी रुकावट हाईवे और पांचाल घाट मार्ग बाधित होने के कारण हरदोई, बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर की ओर जाने वाली रोडवेज बसों को मसेनी चौराहे से इटावा-बरेली हाईवे के रास्ते डायवर्ट करना पड़ा। इसके अलावा मुजहा-करनपुर दत्त मार्ग पर करीब 10 पेड़ और अमृतपुर-राजेपुर मार्ग पर कई स्थानों पर पेड़ व डालियां गिरने से संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद रहे।
मरम्मत कार्य जारी, ग्रामीणों में नाराजगी विद्युत विभाग की टीमें युद्धस्तर पर खंभों और तारों को दुरुस्त करने में जुटी हैं। राजेपुर विद्युत उपकेंद्र के अवर अभियंता हरिओम सिंह के अनुसार, बड़े पैमाने पर नुकसान होने के बावजूद टीमें तेजी से काम कर रही हैं और जल्द आपूर्ति बहाल करने की कोशिश है। दूसरी ओर, अमृतपुर क्षेत्र के ग्रामीणों ने मरम्मत कार्य की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए लापरवाही का आरोप लगाया है।
ओलावृष्टि से किसानों की बढ़ी चिंता आंधी-बारिश के साथ कमालगंज, राजेपुर और फतेहगढ़ के कुछ इलाकों में ओले भी गिरे हैं, जिससे खेतों में तैयार खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। प्रशासनिक स्तर पर फसल क्षति का विस्तृत आकलन किया जा रहा है।
फिलहाल गंगा पार के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सामान्य करने के लिए बिजली विभाग और वन विभाग की टीमें जुटी हैं। जब तक बिजली बहाल नहीं होती और सड़कों से मलबे पूरी तरह नहीं हटते, तब तक क्षेत्र में जनजीवन सामान्य होना मुश्किल बना हुआ है।






