02 अक्टूबर 2026 का वैदिक पंचांग एवं राशिफल

वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 02 अक्टूबर 2026, शुक्रवार

कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद

मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – भाद्रपद (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – कृष्ण
तिथि – षष्ठी प्रातः 10:17 AM तक, तत्पश्चात् सप्तमी
वार – शुक्रवार

नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – मृगशिरा अगले दिन (03 अक्टूबर) प्रातः 02:55 AM तक, तत्पश्चात् आद्रा
योग – व्यतीपात सायं 06:17 PM तक, तत्पश्चात् वरीयान्
करण – वणिज प्रातः 10:17 AM तक, तत्पश्चात् विष्टि (भद्रा) रात्रि 09:08 PM तक, तत्पश्चात् बव

सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:04 AM
सूर्यास्त – 05:57 PM
चन्द्रोदय – 10:14 PM
चन्द्रास्त – 11:54 AM
चन्द्र राशि – वृषभ अपराह्न 03:41 PM तक, तत्पश्चात् मिथुन
अभिजित मुहूर्त – 11:37 AM से 12:24 PM तक
विजय मुहूर्त – 01:59 PM से 02:47 PM तक

अशुभ काल
राहुकाल – 10:31 AM से 12:01 PM तक
यमगण्ड – 02:59 PM से 04:28 PM तक
गुलिक काल – 07:33 AM से 09:02 AM तक
दुर्मुहूर्त – 08:27 AM से 09:14 AM तक एवं 12:24 PM से 01:12 PM तक
कंटक – 01:12 PM से 01:59 PM तक

शुभ चौघड़िया
चर – 06:04 AM से 07:33 AM तक
लाभ – 07:33 AM से 09:02 AM तक
अमृत – 09:02 AM से 10:31 AM तक
शुभ – 12:01 PM से 01:30 PM तक
चर – 04:28 PM से 05:57 PM तक

दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – पश्चिम
यात्रा उपाय – शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो राई (सरसों) या जौ खाकर अथवा शीशा (दर्पण) देखकर प्रस्थान करें।

व्रत-पर्व एवं विशेष योग
षष्ठी एवं सप्तमी श्राद्ध (पितृपक्ष)
आश्विन कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि प्रातः 10:17 तक रहेगी, जिसके उपरांत सप्तमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। अतः जिन पितरों का देहावसान किसी भी मास की षष्ठी या सप्तमी तिथि को हुआ हो, उनका तर्पण, पिंडदान व ब्राह्मण भोजन कराने का विधान रहेगा। पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक किया गया दान कुल में सुख-शांति व वंश वृद्धि लाता है।

मृगशिरा नक्षत्र का प्रभाव
मृगशिरा नक्षत्र अगले दिन प्रातः 02:55 तक रहेगा, जिसके स्वामी मंगल ग्रह और अधिपति देव चन्द्रमा (सोम) हैं। यह नक्षत्र शोध, अन्वेषण, यात्रा, नवीन योजनाओं के निर्माण और मित्रता के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।

विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
प्रातः 10:17 से रात्रि 09:08 तक भद्रा (विष्टि करण) का प्रभाव रहेगा, अतः इस समयावधि में नए मांगलिक व सांसारिक शुभ कार्य टालें। अपराह्न 03:41 तक चन्द्रमा वृषभ (उच्च) राशि में और उसके बाद मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। दोपहर बाद चन्द्रमा के मिथुन में जाने से बौद्धिक गतिविधियों, संचार व संपर्कों में तेजी देखने को मिलेगी।

आज का राशिफल – 02 अक्टूबर 2026 शुक्रवार

मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
दोपहर तक आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। अपराह्न के बाद तृतीय भाव में चन्द्रमा के आने से साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी। भाई-बहनों और मित्रों का पूरा सहयोग मिलेगा।
उपाय – माता लक्ष्मी को सफेद मिष्ठान का भोग लगाएं।

वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
दोपहर 03:41 तक चन्द्रमा आपकी राशि में रहेंगे, जिससे मानसिक शांति बनी रहेगी। इसके बाद धन भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से रुका हुआ धन वापस मिलेगा और परिवार में प्रसन्नता रहेगी।
उपाय – छोटी कन्याओं को मिश्री या फल बांटें।

मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
दिन के पूर्वार्ध में अनावश्यक भागदौड़ रह सकती है। अपराह्न के बाद चन्द्रमा आपकी ही राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे आत्मविश्वास बढ़ेगा और सोचे हुए कार्य तेजी से पूरे होंगे।
उपाय – भगवान विष्णु के मंदिर में कपूर जलाएं।

कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
दोपहर तक आय के नए स्रोत बनेंगे और मित्रों से सहयोग मिलेगा। अपराह्न के बाद द्वादश भाव में चन्द्रमा होने से खर्चों पर नियंत्रण रखें और स्वास्थ्य का ध्यान दें।
उपाय – शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें।

सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा और मान-सम्मान बढ़ेगा। दोपहर बाद एकादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से व्यापार में बड़ा आर्थिक लाभ और नए संपर्क विकसित होंगे।
उपाय – सूर्यदेव को जल में लाल चंदन मिलाकर अर्घ्य दें।

कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
भाग्य का साथ मिलेगा और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि रहेगी। दोपहर बाद दशम भाव में चन्द्रमा के आने से कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा।
उपाय – भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।

तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
दोपहर तक सेहत और खानपान को लेकर सतर्क रहें। अपराह्न 03:41 के बाद नवम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से भाग्य अनुकूल होगा और अटके कार्य गति पकड़ेंगे।
उपाय – श्री सूक्त का पाठ करें।

वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
दाम्पत्य जीवन में सुख-समृद्धि रहेगी। दोपहर बाद अष्टम भाव में चन्द्रमा के गोचर से वाहन चलाते समय सावधानी रखें और अनावश्यक वाद-विवाद से बचें।
उपाय – लक्ष्मी नारायण जी को गुलाब का फूल अर्पित करें।

धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
विरोधियों पर आपका दबदबा रहेगा। अपराह्न के बाद सप्तम भाव में चन्द्रमा के आने से जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर होंगे और व्यावसायिक साझेदारी से लाभ होगा।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।

मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
रचनात्मक कार्यों और अध्ययन में सफलता मिलेगी। दोपहर बाद षष्ठ भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का उत्तम फल मिलेगा और शत्रुओं पर विजय होगी।
उपाय – जरूरतमंदों को सफेद अन्न का दान करें।

कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
घरेलू सुख-साधनों पर ध्यान रहेगा। अपराह्न के बाद पंचम भाव में चन्द्रमा आने से बौद्धिक कार्यों में बड़ी सफलता मिलेगी और संतान पक्ष से शुभ समाचार मिलेगा।
उपाय – भगवान शिव को अक्षत (चावल) अर्पित करें।

मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
पराक्रम और संपर्कों से लाभ होगा। दोपहर बाद चतुर्थ भाव में चन्द्रमा के आने से पारिवारिक जीवन में सौहार्द बढ़ेगा और भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी।
उपाय – भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें।

॥ शुभम भवतु ॥

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