दिल्ली लाल किला धमाका: फरीदाबाद मॉड्यूल से लेकर बांग्लादेश तक – आतंक की नई कहानी
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संवाद 24 (डी. के. दुबे, एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट )। 10 नवंबर 2025 की शाम दिल्ली की हवा मेंअचानक उठी एक विस्फोट की गूंज ने न केवल पुरानी दिल्ली के दिल, लाल किले, को झकझोर दिया, बल्कि पूरे देश के भीतर गहराई तक डर और आक्रोश का तूफ़ान खड़ा कर दिया। यह कोई सामान्य हादसा नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित आतंकी हमला, जिसकी जड़ें दिल्ली से सैकड़ों किलोमीटर दूर फरीदाबाद, और उससे भी आगे बांग्लादेश तक फैली मिलीं। यह कहानी सिर्फ़ एक धमाके की नहीं, बल्कि आतंक के बदलते स्वरूप, शिक्षित चेहरों के छिपे नेटवर्क और सीमाओं के पार की गहरी साज़िश की कहानी है।
1. लाल किला धमाका — 10 नवंबर 2025 की भयावह शाम
शाम के लगभग 6:50 बजे, जब पुरानी दिल्ली की गलियाँ रोज़ की तरह चहल-पहल से भरी थीं, तभी लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास एक हुंडई i20 कार मेंज़ोरदार धमाका हुआ। कुछ ही सेकंड में कार आग का गोला बन गई, आसपास की तीन गाड़ियाँ और कई ऑटो जल उठे। अफ़रा-तफ़री मच गई। 8 से 10 लोगों की मौके पर मौत हो गई, और 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। चश्मदीदों ने कहा, “ऐसा लगा जैसे ज़मीन हिल गई हो… जैसे भूकंप आया हो।”दमकल की सात गाड़ियाँ घटनास्थल पर पहुँचीं। पुलिस ने तुरंत इलाक़े को सील किया। शुरू में इसे CNG ब्लास्ट समझा गया, लेकिन कुछ ही घंटों में जांच में सामनेआया कि यह हाई-इंटेंसिटी IED विस्फोट था यानी एक आतंकी हमला।
2. जांच की शुरुआत — दिल्ली पुलिस से NIA तक
धमाके के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, NIA, NSG और IB की टीमें सक्रिय हो गईं। गृह मंत्री अमित शाह ने बयान दिया “यह किसी दुर्घटना का परिणाम नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश है।” CCTV फुटेज, मौके से मिले केमिकल अवशेष और एक जल चुकी कार की नंबर प्लेट ने जांच को हरियाणा की ओर मोड़ दिया। कार हरियाणा नंबर प्लेट की थी और उसके मालिक का नाम मोहम्मद सलमान पाया गया। लेकिन असली चालाकी यहीं थी, कार का उपयोग तारीक नामक व्यक्ति ने किया था, जो पुलवामा, जम्मू-कश्मीर का निवासी था। जल्द ही एक और नाम सामने आया उमर मोहम्मद, जो जैश-ए-मोहम्मद (JeM) सेजुड़ा एक सक्रिय आतंकी ऑपरेटिव था।
3. फरीदाबाद मॉड्यूल — सफेद कोट के पीछे छिपा काला चेहरा
धमाके की दिशा अब दिल्ली से हटकर फरीदाबाद की ओर मुड़ चुकी थी। 29 अक्टूबर 2025 को फरीदाबाद के धौज गांव में एक गुप्त रेड हुई, जहाँ से 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद हुई जिसमें 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट, टाइमर, रिमोट कंट्रोल्स और AK-47 जैसी असॉल्ट राइफल शामिल थीं। जांच में जो सामने आया, उसनेदेश को और चौंका दिया, ये आतंकी कोई अनपढ़ चरमपंथी नहीं, बल्कि डॉक्टर, प्रोफेसर और इंटेलिजेंट प्रोफेशनल्स थे।
मुख्य आरोपियों मेंशामिल थे —
•डॉ. मुजिम्मल अहमद गनाई — अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद में असिस्टेंट प्रोफेसर।
•डॉ. आदिल अहमद राठर — श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से डॉक्टर।
•डॉ. शकील — लखनऊ का चिकित्सक।
•डॉ. शाहीन शाहिद — लखनऊ की महिला डॉक्टर।
इन शिक्षित चेहरों के नेटवर्क को कहा गया “व्हाइट कॉलर टेरर”।
श्रीनगर से सुराग — पोस्टर से आतंकी तक
पूरी कहानी की शुरुआत श्रीनगर से हुई थी।अक्टूबर 2025 के अंत में, श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर लगाए गए थे। पुलिस ने CCTV फु टेज से पता लगाया कि ये पोस्टर डॉ. आदिल राठर ने लगाए थे। गिरफ्तारी के बाद जब उससे पूछताछ हुई, तो उसने खुलासा किया कि वह पाकिस्तान से जुड़े हैंडलर्स के संपर्क में था और IED सामग्री जुटा रहा था। यहीं से फरीदाबाद नेटवर्क का धागा मिला डॉ. आदिल ने अपने साथी डॉ. मुजिम्मल का नाम बताया, जो दिल्ली-NCR में “शिक्षक” की आड़ में आतंकी गतिविधियाँ चला रहा था।
फरीदाबाद रेड और धमाके की कड़ी
9 नवंबर 2025 की रात को NIA और हरियाणा पुलिस ने फरीदाबाद के धौज गांव मेंछापा मारा। यह वही स्थान था जहाँ भारी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखे गए थे। माना जाता है कि लाल किला धमाके में इस्तेमाल IED इसी स्टॉक से बना था। संदेह है कि जब नेटवर्क का भंडाफोड़ शुरू हुआ, तो उमर मोहम्मद और उसके साथियों ने घबराहट में जल्दबाजी में दिल्ली में हमला कर दिया, ताकि ध्यान भटकाया जा सके ।
बांग्लादेश कनेक्शन — आतंक का नया “ईस्टर्नफ्रंट”
अब जांच एक और चौंकाने वाले मोड़ पर पहुँची। इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स केअनुसार, जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) ने पाकिस्तान के दबाव में बांग्लादेश में अपना ऑपरेशनल नेटवर्क तैयार करना शुरू किया था। LeT प्रमुख हाफ़िज़ सईद, जो जेल में है, उसने अपने सहयोगी सैफुल्लाह सैफ को बांग्लादेश भेजा था ताकि स्थानीय युवाओं को “जिहाद” के नाम पर भारत विरोधी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा सके । बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति खासकर सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास आतंकियों के लिए रणनीतिक रूप सेअनुकूल है। ISI की साजिश थी कि कश्मीर रूट पर दबाव के बाद, अब भारत पर हमले के लिए “पूर्वी मोर्चा” (Eastern Front) खोला जाए।
ISI की भूमिका — बांग्लादेश को नया अड्डा बनाना
2024 में शेख हसीना की गिरफ़्तारी और राजनीतिक अस्थिरता के बाद, पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) नेबांग्लादेश को एक “सुरक्षित ठिकाना” बना लिया। ढाका स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में ISI का विशेष सेल बनाया गया, जिसकी निगरानी जनरल फैज़ हमीद मिर्ज़ा कर रहे थे। ISI ने जमात-ए-इस्लामी, JMB (जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश) और HuJI जैसे संगठनों के ज़रिए आतंकी नेटवर्क को पुनर्जीवित किया। दाऊद इब्राहिम की D-कंपनी के साथ मिलकर बांग्लादेश को “नार्को-टेरर हब” बनाया गया यानी ड्रग्स के व्यापार सेआतंक के लिए फंडिंग। चट्टोग्राम पोर्ट से 25 टन पॉपी सीड्स जब्त किए गए थे, जिनकी आय का इस्तेमाल भारत में IED अटैक के लिए किया गया।
पाकिस्तान-अफगान तनाव और भारत की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम का एक और पहलू सामने आया 2025 में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण थे। TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के हमले बढ़ रहे थे, और पाकिस्तान ने अफगान सीमा पर एयरस्ट्राइक की थी। इसी बीच, भारत और तालिबान के बीच कूटनीतिक रिश्ते मजबूत हो रहे थे भारत ने काबुल में अपना दूतावास दोबारा खोला और अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने दिल्ली यात्रा की। पाकिस्तान को डर था कि भारत-अफगानिस्तान की नज़दीकी उसकी रणनीतिक “डेप्थ” को खत्म कर देगी। इसी के चलते कई विश्लेषकों का मानना है कि लाल किला धमाका पाकिस्तान द्वारा इस “नए गठबंधन” को अस्थिर करने की कोशिश हो सकता है।
सोशल मीडिया युद्ध — प्रचार बनाम सच्चाई
धमाके के बाद सोशल मीडिया पर #RedFortBlast, #JeM, #LeT, #ISIBangladesh जैसे हैशटैग ट्रेंड करनेलगे। कुछ खातों ने इसे “फॉल्स फ्लैग” बताया यानी ऐसा हमला जो किसी और के सिर मढ़ा जाए। पाकिस्तानी अकाउंट्स ने दावा किया कि यह भारत की “पॉलिटिकल फेल्योर” को छिपाने की कोशिश है, जबकि भारतीय उपयोगकर्ताओं ने इसे ISI की साजिश बताया। NIA नेइन ट्रेंड्स को भी जांच के दायरे में लिया, क्योंकि कई फर्जी अकाउंट्स बांग्लादेश सेऑपरेट करते पाए गए।
भारत की जवाबी रणनीति
धमाके के बाद भारत ने तुरंत अपनी सुरक्षा और खुफिया चौकसी बढ़ा दी। BSF–BGB (भारत–बांग्लादेश सीमा बल) की बैठकें हुईं, IAF ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर मेंएयर डिफेंस ड्रिल्स शुरू कीं, और राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कहा “भारत किसी भी दिशा से आने वाले खतरे का निर्णायक जवाब देगा।” फरीदाबाद मॉड्यूल की जांच NIA को सौंप दी गई और अब विदेशी फंडिंग, हवाला नेटवर्क, और बांग्लादेश कनेक्शन की ट्रैकिंग चल रही है। भारत ने अमेरिका और बांग्लादेश केसाथ भी इंटेलिजेंस शेयरिंग तेज की है।
शिक्षा और आतंक — एक नया पैटर्न
फरीदाबाद मॉड्यूल नेएक खतरनाक सच्चाई उजागर की , अब आतंक के चेहरेके वल बंदकू और बम नहीं उठाते, बल्कि स्टेथोस्कोप और लैपटॉप भी रखते हैं।“रैडिकल प्रोफे शनलिज़्म” का यह मॉडल दिखाता है कि कैसे आतंकवादी संगठन शिक्षित युवाओं को “आदर्शवाद” और “इस्लामी पहचान” के नाम पर भ्रमित कर अपने नेटवर्क का हिस्सा बना रहे हैं।
एक नई दिशा में बढ़ता खतरा
लाल किला धमाका के वल एक घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी थी कि आतंक की जड़ें अब केवल सीमाओं के पार नहीं, बल्कि हमारे समाज के भीतर तक पहुँच रही हैं। फरीदाबाद के डॉक्टरों का मॉड्यूल, ISI की बांग्लादेश मेंसक्रियता,और JeM–LeT की ईस्टर्न फ्रंट रणनीति सब एक ही धागे से जुड़े हैं। अगर यह साजिश पूरी तरह साबित हो जाती है, तो भारत के लिए यह “पूर्वी सुरक्षा चुनौती” (Eastern Security Challenge) का नया अध्याय होगा। भारत को अब के वल सीमा पर नहीं, बल्कि विचारधारा, शिक्षा और साइबर स्पेस पर भी लड़ाई लड़नी होगी।







