26 सितंबर 2026 का वैदिक पंचांग एवं राशिफल

वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 26 सितंबर 2026, शनिवार

कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद

मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – भाद्रपद (अमांत), भाद्रपद (पूर्णिमांत)
पक्ष – शुक्ल
तिथि – पूर्णिमा रात्रि 10:20 PM तक, तत्पश्चात् आश्विन कृष्ण प्रतिपदा
वार – शनिवार

नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – पूर्वाभाद्रपद पूर्वाह्न 11:32 AM तक, तत्पश्चात् उत्तराभाद्रपद
योग – गण्ड दोपहर 01:17 PM तक, तत्पश्चात् वृद्धि
करण – विष्टि (भद्रा) पूर्वाह्न 10:46 AM तक, तत्पश्चात् बव रात्रि 10:20 PM तक, तत्पश्चात् बालव

सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:01 AM
सूर्यास्त – 06:04 PM
चन्द्रोदय – 05:44 PM
चन्द्रास्त – चन्द्रास्त नहीं
चन्द्र राशि – मीन
अभिजित मुहूर्त – 11:38 AM से 12:27 PM तक
विजय मुहूर्त – 02:03 PM से 02:51 PM तक

अशुभ काल
राहुकाल – 09:02 AM से 10:32 AM तक
यमगण्ड – 01:33 PM से 03:03 PM तक
गुलिक काल – 06:01 AM से 07:32 AM तक
दुर्मुहूर्त – 06:01 AM से 06:49 AM तक एवं 06:49 AM से 07:38 AM तक
कंटक – 11:38 AM से 12:27 PM तक

शुभ चौघड़िया
शुभ – 07:32 AM से 09:02 AM तक
चर – 12:03 PM से 01:33 PM तक
लाभ – 01:33 PM से 03:03 PM तक
अमृत – 03:03 PM से 04:34 PM तक

दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – पूर्व
यात्रा उपाय – शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो अदरक या उड़द खाकर अथवा श्री हनुमान चालीसा का पाठ करके प्रस्थान करें।

व्रत-पर्व एवं विशेष योग
भाद्रपद पूर्णिमा व्रत एवं श्राद्ध पक्ष (पितृपक्ष) प्रारंभ
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर श्री सत्यनारायण भगवान का पूजन, व्रत एवं पूर्णिमा का स्नान-दान अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इसी पावन तिथि के साथ महालय (पितृपक्ष) का आरंभ होता है और पूर्णिमा श्राद्ध संपन्न किया जाता है। पितरों के निमित्त तर्पण व पिंडदान करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र एवं पंचक
पूर्वाह्न 11:32 के बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र प्रारंभ होगा, जिसके स्वामी शनिदेव और अधिपति देव अहिर्बुध्न्य हैं। चन्द्रमा के मीन राशि में संचरण करने से पंचक प्रभावी रहेगा। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र दान, साधना, धार्मिक अनुष्ठान और दीर्घकालिक कार्यों के लिए विशेष शुभ फलदायी होता है।

विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज प्रातः 10:46 तक भद्रा (विष्टि करण) का प्रभाव रहेगा, अतः इस समय तक कोई भी नया सांसारिक शुभ कार्य आरंभ न करें। इसके पश्चात दिन-रात मीन राशि में चन्द्रमा का संचरण मानसिक शांति, दयाभाव और आध्यात्मिक चिंतन में वृद्धि करेगा। दोपहर 01:17 के बाद वृद्धि योग का प्रभाव कार्यों में समृद्धि लाएगा।

आज का राशिफल – 26 सितंबर 2026 शनिवार

मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से धार्मिक एवं मांगलिक कार्यों में धन व्यय होगा। दूर की यात्रा के योग बन सकते हैं। आध्यात्मिक गतिविधियों में मन शांत रहेगा।
उपाय – हनुमान जी को चमेली का तेल और सिन्दूर अर्पित करें।

वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नवीन स्रोत निर्मित करेगा। मित्रों और बड़े भाई-बहनों का पूर्ण सहयोग मिलेगा। लंबे समय से सोची हुई योजनाएं गति पकड़ेंगी।
उपाय – पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा और प्रभाव बढ़ाएगा। अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल बनेगा। पिता के सहयोग से नए अवसर प्राप्त होंगे।
उपाय – शनि चालीसा का पाठ करें।

कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
नवम भाव में चन्द्रमा भाग्य की वृद्धि करेंगे। धार्मिक आयोजनों और तीर्थ यात्रा में रुचि बढ़ेगी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रयासरत जातकों को उत्तम परिणाम मिलेंगे।
उपाय – शिवलिंग पर जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें।

सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
अष्टम भाव में चन्द्रमा होने से स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी बरतें। खानपान में संयम रखें और यात्रा के दौरान सतर्क रहें। वाणी पर नियंत्रण रखें।
उपाय – ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जप करें।

कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
सप्तम भाव में चन्द्रमा दाम्पत्य जीवन में सुख और सौहार्द बढ़ाएगा। साझेदारी के व्यापार में अच्छा मुनाफा हो सकता है। सामाजिक दायरा बढ़ेगा।
उपाय – भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाएं और मोदक का भोग लगाएं।

तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर आपका वर्चस्व स्थापित करेगा। नौकरी में आपकी मेहनत की सराहना होगी। पुराने कर्जों से मुक्ति का मार्ग निकलेगा।
उपाय – जरूरतमंदों को काले वस्त्र या भोजन का दान करें।

वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
पंचम भाव में चन्द्रमा बौद्धिक कार्यों और शोध में सफलता दिलाएगा। संतान पक्ष से मन प्रसन्न रहेगा। प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी।
उपाय – सुंदरकांड का पाठ करें।

धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा पारिवारिक मामलों में सक्रिय रखेगा। सुख-सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित रहेगा। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और उनसे आशीर्वाद लें।
उपाय – भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें।

मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
तृतीय भाव में चन्द्रमा पराक्रम और साहस में वृद्धि करेगा। मित्रों और भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। छोटी लेकिन लाभकारी यात्राएं संभव हैं।
उपाय – शमी वृक्ष पर जल चढ़ाएं और दीपक जलाएं।

कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
धन भाव में चन्द्रमा आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा। अटका हुआ धन मिलने की संभावना है। परिवार में उत्सव जैसा वातावरण बना रहेगा।
उपाय – काले कुत्ते को तेल चुपड़ी रोटी खिलाएं।

मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
चन्द्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता और निर्णय शक्ति मजबूत होगी। व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा और सोचे हुए कार्य पूरे होंगे।
उपाय – भगवान शिव का जलाभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करें।

॥ शुभम भवतु ॥

Samvad 24 Office
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