जुड़ेंगे किनारे, खुलेगी तरक्की की राह फर्रुखाबाद में जल्द शुरू होगा सेतु निर्माण अभियान।
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फर्रुखाबाद में गंगा, रामगंगा और काली नदी पर प्रस्तावित नए पुल – स्थिति, महत्व और चुनौतियाँ
संवाद 24 (संजीव सोमवंशी)। नदियों की लय में बसा यह ज़िला लंबे समय से यातायात लालित्य और संरचनात्मक गिरावट से जूझ रहा है। गंगा, रामगंगा और काली नदी पर स्थित पुराने पुल दशकों से शहर-व्यापारिक धुरी के रूप में काम कर रहे हैं, पर जर्जर हालत, बढ़ती आवाजाही और बाढ़-क्षरण की चुनौतियों ने नए एवं चौड़ीकरण वाले पुलों की मांग को अनिवार्य कर दिया है। पिछले एक-डेढ़ साल में प्रशासनिक मंजूरी, सर्वे और डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है, पर काम अभी प्रारम्भिक चरणों और योजना-निर्माण के बीच टिका हुआ नज़र आता है।
क्या मंजूर हुआ और किस स्तर पर है योजना?
केंद्र एवं राज्य स्तरीय चर्चा के बाद फर्रुखाबाद जिले के 730C हाईवे और आसपास के हिस्सों में जाम और वर्क-लोड कम करने के उद्देश्य से कई नए पुलों का प्रस्ताव सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार गंगा, रामगंगा व काली नदी सहित सात स्थानों पर फोरलेन पुलों के निर्माण के लिए स्वीकृति मिली है और डीपीआर तैयार कराने के उद्देश्य से सर्वे और ठेका प्रक्रियाएँ शुरू की गईं। दिल्ली की एक इंजीनियरिंग कंपनी को डीपीआर बनाने का ठेका दिया गया और प्रारम्भिक रूप से डीपीआर/सर्वे कार्यों के लिए समयसीमा तथा अनुमानित लागत का जिक्र भी किया गया है।
प्रमुख बिंदु –
प्रस्तावित पुलों का स्वरूप – फोरलेन/ चौड़ीकरण केंद्रित (हाईवे/अन्य वाह्य मार्गों के अनुरूप)।
डीपीआर और सर्वे की कार्रवाई चल रही – डीपीआर तैयार होने के बाद ही फाइनल टेंडर और निर्माण एजेंसी चुनने की प्रक्रिया तेज़ होगी।
किन पुलों की बात हो रही है? मौजूदा हालत क्या है?
फर्रुखाबाद में गंगा व रामगंगा पर बने मौजूदा पुल लगभग 4–5 दशक पुराने हैं और कई जगहों पर संरचनात्मक समस्याएँ सामने आ चुकी हैं। काली नदी पर बने कुछ पुलों में भी धंसाव, बियरिंग समस्या और बुनियादी मरम्मत आवश्यकताओं की रिपोर्टें आती रही हैं, जिसके कारण भारी वाहनों पर प्रतिबंध और वैकल्पिक मार्गों का प्रावधान होता रहा है। सेतु निगम (Bridge Corporation) और स्थानीय PWD ने पुरानी संरचनाओं के नवीनीकरण तथा पुनर्निर्माण की आवश्यकता पर पहले भी रिपोर्टें और प्रस्ताव तैयार किए हैं।
कब तक बनेंगे समयरेखा और बजट (वर्तमान हालात)
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित कई पुलों के लिये प्रारम्भिक आर्थिक अनुमान और समयरेखा बनाई जा चुकी है। उदाहरण के लिए कुछ रिपोर्ट्स में लगभग 200–250 करोड़ रुपये के आसपास निर्माण खर्च का आकलन दिखा है, जबकि डीपीआर तैयार करने के लिये ठेकेदारों को कुछ महीनों की समयसीमा दी गई रही। हालाँकि, इन समय सीमाओं का अर्थ यह नहीं कि निर्माण का काम तुरंत शुरू हो जाएगा। डीपीआर, भूमि अधिग्रहण, वित्तीय स्वीकृति, पर्यावरण/नदी संरक्षण अनुमतियाँ और ठेकेदारी प्रक्रियाएँ समय लेती हैं। इन प्रशासनिक और तकनीकी पड़ावों के पार होते हुए ही कार्य का वास्तविक आरम्भ संभव है।
तात्कालिक चुनौतियाँ –
नदी कटान और बैंकों की अस्थिरता: गंगा के किनारे कटान से पुलों के अप्रोच मार्गों और पायों पर असर पड़ता है; इसलिए पुल-डिजाइन में कटान-रोधी संरचनाओं और नदी संरक्षण के उपायों का समावेश आवश्यक है। हाल ही में जिलाधिकारी स्तर पर भी कटान और नदियों के निगरानी-कार्य का निरीक्षण हुआ है।
पुराने संरचनाओं का जीर्ण-सीम अंतर्विरोध: समानांतर में चलते पुराने पुलों की मरम्मत/रिनोवेशन और नए निर्माण का तालमेल रखना होगा एक असंतुलन से यातायात ब्लॉकेज और बजट-संकट बन सकता है।
आवागमन और जाम-समस्या: रामगंगा पुल पर मरम्मत/एक-लेन बंद होने के कारण प्रदेशीय ट्रैफिक प्रभावित होता रहा है; नए पुलों का आश्वासन भी तभी सार्थक होगा जब अप्रोच रोड व हाईवे विस्तार भी साथ हों।
वित्त और अनुबंध-प्रणाली: डीपीआर के बाद फंडिंग के स्त्रोत (केंद्र/राज्य/पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) तय होंगे। हालांकि लोक-निर्माण विभाग और सेतु निर्माण निगम के पास पहले से प्रस्ताव आए हैं, पर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ प्रोजेक्ट-लाइफसाइकल में बहुत-सी औपचारिकताएँ लेती हैं।
क्या बदलेगा स्थानीय तथा आर्थिक प्रभाव –
यातायात सुगमता: फोरलेन पुल और अप्रोच-रोड बनने से राष्ट्रीय/राज्यीय मार्गों पर प्रवाह में सुधार होगा; जहाँ आज रोज़ाना जाम पड़ता है, वहाँ आवागमन का समय घटेगा और माल-ढुलाई तेज़ होगी।
आर्थिक गतिशीलता: फर्रुखाबाद की हस्तशिल्प, कपड़ा व स्थानीय व्यापारिक इकाइयों को बेहतर कनेक्टिविटी से मार्केट पहुंचने में मदद मिलेगी; वहीं परियोजना निर्माण काल में स्थानीय रोज़गार भी बढ़ेगा।
सुरक्षा व आपदा प्रबंधन: पुराने पुलों के पुनर्निर्माण और नए, मजबूत पुल बनने से बाढ़ एवं आपदा के समय निकासी तथा राहत कार्यों में मदद मिलेगी—बशर्ते नदी संरक्षण उपाय समुचित हों।
आगे की राह
फर्रुखाबाद में गंगा, रामगंगा और काली पर प्रस्तावित नए पुल प्राथमिक तौर पर प्रशासन और केंद्रीय/राज्य एजेंसियों की योजनाओं में शामिल हैं, पर वर्तमान स्थिति अधिकतर योजना-निर्माण (डीपीआर/सर्वे) और मरम्मत-अनुमोदन के चरण में है। अगले कदमों में पारदर्शी डीपीआर, समयबद्ध निष्पादन, नदी-अभिरक्षा योजनाओं का समावेश और स्थानीय समुदाय के साथ परामर्श आवश्यक होगा। परियोजना-निर्माण के साथ-साथ मौजूदा पुलों की मेंटेनेंस-अनुभाग भी बराबर रखा जाना चाहिए, अन्यथा अर्धनिर्मित बुनियादी ढाँचा स्थानीय लोगों की रोज़मर्रा की ज़रूरतों को अस्थायी रूप से ही हल करेगा।






