
कन्नौज। नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने के मामले में कन्नौज की विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी युवक को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 1 लाख 1 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आदेश के मुताबिक जुर्माने की धनराशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिए जाने के निर्देश हैं।
22 जून 2024 की शाम घर से लापता हुई थी किशोरी
मामला गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र के एक मोहल्ले का है। अभियोजन के अनुसार, इसी मोहल्ले में रहने वाला शिवम कश्यप 22 जून 2024 की शाम 15 वर्षीय किशोरी को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। किशोरी के घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।तलाश के दौरान परिजनों को आरोपी युवक के संबंध में जानकारी मिली। इसके बाद किशोरी के पिता ने गुरसहायगंज कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही वापस आया आरोपी
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस कार्रवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, कार्रवाई के दबाव में आरोपी 28 जून 2024 को वापस लौटा और किशोरी को उसके घर भेज दिया। इसके बाद मामले की विवेचना पूरी कर पुलिस ने न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
साक्ष्यों और बयानों के आधार पर अदालत ने सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद विशेष न्यायाधीश रामगोपाल सिंह ने आरोपी को दोषी माना और उसे 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।शासकीय अधिवक्ता बृजेश शुक्ला और सुधीर पांडेय के अनुसार, अदालत ने आरोपी पर 1,01,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
जुर्माना नहीं देने पर दो साल अतिरिक्त सजा
अदालत के आदेश के मुताबिक आरोपी द्वारा जुर्माने की धनराशि जमा नहीं करने पर उसे दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जुर्माने से प्राप्त धनराशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिए जाने का आदेश भी न्यायालय ने दिया है।
नाबालिगों से जुड़े मामलों में अदालत का सख्त रुख
इस फैसले ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में अदालत साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर गंभीरता से सुनवाई कर रही है। हालांकि, किसी भी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि का आधार न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्य और कानूनी प्रक्रिया होती है।






