
कन्नौज। देश के विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन का दर्द झेलने वाले परिवारों की स्मृति में शुक्रवार को कन्नौज में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया। तिर्वा रोड स्थित नारायण पैलेस में विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसके बाद कलेक्ट्रेट तक मौन जुलूस निकाला गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए मृतकों और पीड़ित परिवारों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की।
संगोष्ठी में याद किया गया 1947 का दर्द
विचार संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिंसा, विस्थापन और अपनों से बिछड़ने की पीड़ा झेलनी पड़ी। वक्ताओं ने कहा कि इतिहास के इस दर्दनाक अध्याय को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां विभाजन के मानवीय पक्ष को समझ सकें और राष्ट्रीय एकता व सामाजिक सद्भाव की भावना और मजबूत हो।14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस समय कहा था कि यह दिवस विभाजन के दौरान विस्थापित हुए और जान गंवाने वाले लोगों के संघर्ष एवं बलिदान की स्मृति को जीवित रखने के साथ सामाजिक सद्भाव और एकता को मजबूत करने की प्रेरणा देगा।
नारायण पैलेस से कलेक्ट्रेट तक मौन जुलूस
संगोष्ठी के बाद तिर्वा रोड स्थित नारायण पैलेस से कलेक्ट्रेट परिसर तक मौन जुलूस निकाला गया। जुलूस में शामिल लोगों ने बिना नारेबाजी के विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।कन्नौज में इससे पहले भी विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर मौन यात्राओं का आयोजन होता रहा है। वर्ष 2022 में शहर में निकली मौन तिरंगा यात्रा में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया था।
सलिल बिश्नोई ने कहा—इतिहास की पीड़ा को भूलना नहीं चाहिए
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कानपुर के भाजपा नेता एवं एमएलसी सलिल बिश्नोई शामिल हुए। उन्होंने विभाजन को भारतीय इतिहास का बेहद पीड़ादायक अध्याय बताते हुए कहा कि उस दौर में लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा और बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई।उन्होंने उन परिवारों के संघर्ष और साहस को नमन किया, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में जीवन को फिर से खड़ा किया। उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा को याद करना केवल अतीत को दोहराना नहीं, बल्कि उससे भविष्य के लिए सीख लेने का माध्यम भी है।
कैलाश राजपूत ने भी दी श्रद्धांजलि
ऊर्जा राज्यमंत्री कैलाश सिंह राजपूत ने कहा कि 14 अगस्त उन लोगों के त्याग, संघर्ष और पीड़ा को याद करने का अवसर है, जिन्होंने विभाजन की त्रासदी झेली। उन्होंने कहा कि इतिहास के इस अध्याय को भुलाया नहीं जा सकता और नई पीढ़ी को इसके मानवीय पक्ष से परिचित कराया जाना चाहिए।कन्नौज में भाजपा ने इससे पहले भी 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर संगोष्ठी, मौन जुलूस और अन्य कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की थी।
भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे मौजूद
कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष वीर सिंह भदौरिया, नरेंद्र सिंह राजपूत सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। मुनीश मिश्रा, अशोक सिंह, श्यामू राजपूत, शैलेंद्र द्विवेदी, आर्यन कटियार, रतन भदौरिया, सुनीता राजपूत, प्रमोद राजपूत, शैलेंद्र दुबे, गोपाल चतुर्वेदी, मंगलम पांडेय, श्याम दुबे, अजय वर्मा, राजन अवस्थी और विकास त्रिपाठी समेत अन्य लोग भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
विभाजन की स्मृति से एकता का संदेश
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य केवल 1947 की घटनाओं को याद करना नहीं, बल्कि विभाजन के दौरान सामने आई मानवीय त्रासदी से सीख लेकर सामाजिक एकता, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का संदेश देना भी है। केंद्र सरकार ने 14 अगस्त को इस स्मृति दिवस के रूप में मनाने की घोषणा इसी उद्देश्य से की थी।कन्नौज में आयोजित संगोष्ठी और मौन जुलूस के माध्यम से भी यही संदेश देने का प्रयास किया गया कि इतिहास के दर्दनाक अध्यायों को याद रखते हुए समाज में एकता और सद्भाव की भावना को और मजबूत किया जाए।






