
संवाद 24 नई दिल्ली। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और युद्ध के हालातों के बीच अमेरिकी नौसेना (US Navy) के सबसे शक्तिशाली परमाणु-संचालित विमानवाहक युद्धपोत ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ (USS Abraham Lincoln) के भीतर से एक बेहद हैरान और परेशान कर देने वाली खबर सामने आई है। लगभग 250 दिनों से बिना किसी बंदरगाह पर रुके लगातार समंदर में तैनात इस युद्धपोत पर तैनात हजारों अमेरिकी नौसैनिकों का मानसिक संतुलन और मनोबल पूरी तरह टूट चुका है।
तनाव, खराब खाना, दूषित पानी, सीवेज की समस्याओं और महीनों से परिवार से दूर रहने के कारण नौसैनिकों में अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति इस कदर बढ़ गई है कि कई सैनिकों ने समंदर में छलांग लगाने तक की कोशिश की है। इस गहराते संकट को देखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने आनन-फानन में प्रशांत महासागर में तैनात अपने दूसरे बड़े युद्धपोत ‘यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन’ (USS George Washington) को मध्य पूर्व के लिए रवाना कर दिया है।
250 दिनों से लगातार समंदर में तैनात: न ताजी हवा, न स्वच्छ पानी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यूएसएस अब्राहम लिंकन नवंबर में अमेरिका से रवाना हुआ था और जनवरी से मध्य पूर्व में तैनात है। युद्ध के कारण इस युद्धपोत को 200 से अधिक दिनों से किसी भी पोर्ट (बंदरगाह) पर रुकने का मौका नहीं मिला, जो आधुनिक नौसेना इतिहास में एक रिकॉर्ड बन गया है।
नौसैनिकों के परिजनों और अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, महीनों तक लगातार कॉम्बैट जोन (युद्ध क्षेत्र) में तैनात रहने की वजह से जहाजों पर बुनियादी सुविधाओं का घोर अकाल पड़ गया है:
सड़ा हुआ खाना और दूध की किल्लत: जहाजों पर राशन की भारी किल्लत हो गई है। नौसैनिकों को बासी और सड़ा हुआ खाना परोसा जा रहा है।
शौचालय ठप और पानी दूषित: कई हफ्तों से प्लंबिंग लाइनें खराब हैं और पीने के पानी में सीवेज का पानी मिलने जैसी शिकायतें आई हैं।
अत्यधिक थकान: चौबीसों घंटे अलर्ट रहने के कारण सैनिकों को रोजाना मात्र 4 से 5 घंटे की ही नींद मिल पा रही है।
जान देने की कोशिश और ‘पानी में कूदने’ की घटनाएं
रिपोर्ट्स में सबसे भयानक खुलासा सैनिकों के गिरते मानसिक स्वास्थ्य को लेकर हुआ है। अमेरिकी रक्षा पत्रिकाओं और परिजनों के हवाले से सामने आया है कि डिप्रेशन और एंग्जायटी के शिकार कई नौसैनिकों ने चलती जहाज से समंदर में कूदकर जान देने की कोशिश की है। हालांकि साथी नौसैनिकों की तत्परता से कुछ को बचा लिया गया, लेकिन इस तरह की लगातार घटनाओं ने पेंटागन और अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में हड़कंप मचा दिया है। संसदीय समिति के सदस्यों ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) से इस गंभीर लापरवाही पर जवाब तलब किया है। हालांकि रक्षा मंत्री ने मीडिया रिपोर्टों को ‘अतिरंजित’ बताते हुए खारिज करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि युद्ध के हालात में लंबी तैनाती ने सैनिकों पर अत्यधिक मानसिक और शारीरिक दबाव डाला है।
यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन की आपातकालीन रवानगी
हालात हाथ से निकलते देख अमेरिकी नौसेना ने वियतनाम और सिंगापुर के पास तैनात अपने दूसरे विमानवाहक पोत ‘यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन’ को तत्काल प्रभाव से मलक्का जलडमरूमध्य के रास्ते हिंद महासागर होते हुए मध्य पूर्व की ओर रवाना कर दिया है। जॉर्ज वाशिंगटन जल्द ही यूएसएस अब्राहम लिंकन की जगह लेगा, जिसके बाद अब्राहम लिंकन और उस पर सवार 5,000 से अधिक थक चुके सैनिकों को वापस स्वदेश लाया जाएगा। इस घटनाक्रम ने दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका की सैन्य तैयारियों और अपने सैनिकों की देखभाल करने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।






