
संवाद 24 नई दिल्ली। भारत के पड़ोसी मुल्क श्रीलंका से एक बेहद सनसनीखेज और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। श्रीलंका के पश्चिमी तटीय शहर नेगोंबो (Negombo) की एक सेंट्रल जेल के भीतर कैदियों के दो बड़े गुटों के बीच खूनी संघर्ष छिड़ गया। जेल के अंदर शुरू हुई यह हिंसक झड़प देखते ही देखते एक बड़े और खूनी दंगे (Prison Riot) में तब्दील हो गई। हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि कैदियों ने सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर जेल के सरकारी हथियारों पर कब्जा कर लिया और अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस भीषण और खूनी महासंग्राम में अब तक 7 जेल अधिकारियों (Guards) समेत कम से कम 26 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से अधिक कैदी और सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना के बाद पूरी जेल को सेना और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने चारों तरफ से घेर लिया है।
विवाद की वजह: जेल के भीतर ड्रग सिंडिकेट का खूनी खेल
श्रीलंकाई गृह मंत्रालय और पुलिस सूत्रों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस खूनी खेल की शुरुआत रविवार शाम को नेगोंबो जेल के भीतर हुई थी। इस बेहद क्षमता से अधिक भरी हुई जेल में बंद कैदियों के दो ऐसे गुट आपस में भिड़ गए, जो अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय ड्रग तस्करी (Drug Trafficking) से जुड़े हुए हैं। एक गुट जेल के भीतर अवैध रूप से नशीले पदार्थों के कारोबार और सिंडिकेट को चलाने का समर्थन कर रहा था, जबकि दूसरा प्रतिद्वंद्वी गुट इसके खिलाफ था। दोनों गिरोहों के बीच पहले जुबानी जंग हुई, जो कुछ ही मिनटों में लाठी, सरियों और धारदार हथियारों से लैस खूनी संघर्ष में बदल गई। रविवार की रात को हुई पहली भिड़ंत में ही दो कैदियों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जिसके बाद जेल प्रशासन ने स्थिति को संभालने का दावा किया था, लेकिन यह महज एक बड़े तूफान के आने से पहले की शांति थी।
सोमवार सुबह हुआ ब्लास्ट: हथियार छीने, छत पर चढ़कर की बगावत
सोमवार सुबह होते ही जेल के भीतर का नजारा पूरी तरह बदल गया। रविवार की हिंसा से भड़के कैदियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत सुबह के समय जेल प्रहरियों पर चौतरफा हमला बोल दिया। इस अचानक हुए हमले से सुरक्षाकर्मी संभल नहीं पाए। हिंसक हो चुके कैदियों के हुजूम ने सुरक्षा प्रहरियों को बंधक बनाकर जेल के शस्त्रागार (Armoury) से राइफलें और अन्य घातक हथियार छीन लिए।
हथियार हाथ में आते ही कैदियों ने सुरक्षाबलों पर ही सीधे फायरिंग शुरू कर दी। कई कैदी जेल की छतों पर चढ़ गए और वहां से चिल्लाते हुए तुरंत रिहाई की मांग करने लगे। कुछ ही देर में जेल का मुख्य फाटक तोड़ने और सामूहिक रूप से जेल से भागने (Jailbreak) की कोशिश की गई, जिसे रोकने के लिए गेट पर तैनात सुरक्षा प्रहरियों ने जवाबी फायरिंग की। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, जेल के भीतर से कई घंटों तक लगातार एके-47 और अन्य ऑटोमैटिक हथियारों के चलने की आवाजें आती रहीं, जिससे पूरे नेगोंबो शहर में दहशत फैल गई।
अस्पताल का नजारा: गोलियों और धारदार चोटों से लथपथ शव
नेगोंबो स्टेट अस्पताल की निदेशक डॉ. पुष्पा गमलथ ने मीडिया को बताया कि जेल से लाए जा रहे घायलों की स्थिति बेहद गंभीर है। अस्पताल में अब तक 23 से अधिक शव लाए जा चुके हैं, जबकि 3 अन्य गंभीर रूप से घायल कैदियों ने कोलंबो नेशनल अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। कुल मौतों का आंकड़ा 26 तक पहुंच चुका है। डॉ. गमलथ ने बताया, “मृतकों और घायलों के शरीर पर गोलियों के गहरे निशान, धारदार हथियारों के कट और बेरहमी से पीटे जाने के कारण अंदरूनी ब्लीडिंग के लक्षण मिले हैं। 100 से अधिक घायलों का इलाज चल रहा है, जिनमें से 18 की हालत अत्यंत नाजुक होने के कारण उन्हें राजधानी कोलंबो के बड़े अस्पतालों में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रेफर किया गया है।”
न्याय मंत्री का बयान: ‘यह देश के लिए गहरा सदमा’
इस भीषण मानवीय त्रासदी और सुरक्षा चूक पर श्रीलंका के न्याय मंत्री हर्षना नानायक्कारा (Harshana Nanayakkara) ने गहरी संवेदना और गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मीडिया के सामने आकर इस पूरी घटना की जिम्मेदारी स्वीकार की। न्याय मंत्री ने कहा, “यह घटना हमारे देश की जेल प्रणाली के इतिहास में एक काला धब्बा है। मारे गए लोग चाहे अंडरवर्ल्ड से जुड़े हों या कैदी हों, लेकिन वे इंसान थे। इस तरह की घटना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकती।” उन्होंने आगे बताया कि सरकार ने तुरंत प्रभाव से हिंसक गुटों को अलग-अलग जेलों में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है और तीन मुख्य साजिशकर्ता कैदियों को पल्लनसेना जेल कैंप (Pallansena Prison Camp) भेज दिया गया है। जेल विभाग के प्रवक्ता एसी गजानायके ने बताया कि कमिश्नर जनरल ऑफ प्रिजंस के निर्देश पर एक हाई-लेवल स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया गया है जो इस भारी सुरक्षा चूक की जांच करेगी।
जेलों में ओवरक्राउडिंग बनी बड़ी मुसीबत
इस खूनी दंगे ने एक बार फिर श्रीलंका की जेलों की बदहाल स्थिति और ओवरक्राउडिंग (Overcrowding) के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर ला दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, श्रीलंका की जेलों की कुल वास्तविक क्षमता लगभग 10,000 कैदियों की है, लेकिन वर्तमान में इनमें 41,250 से अधिक कैदियों को ठूंस-ठूंस कर रखा गया है, जो क्षमता से चार गुना अधिक है। अकेले नेगोंबो जेल में ही कई हजार कैदी बंद हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि क्षमता से अधिक कैदी होने और स्टाफ की कमी के कारण ही ड्रग माफिया जेल के भीतर समानांतर सरकार चलाने में कामयाब हो जाते हैं, जिसका नतीजा इस खौफनाक नरसंहार के रूप में सामने आया है।






