वाशिंगटन के दावे पर नेतन्याहू का पलटवार: क्या अमेरिका ही इजरायल का एकमात्र सहारा? ‘140 करोड़’ आबादी वाले इस दोस्त का लिया नाम!

संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति के मंच से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ा ऐतराज जताया है, जिसमें दावा किया गया था कि इजरायल का दुनिया में अमेरिका ही एकमात्र शक्तिशाली मददगार बचा है। अमेरिकी न्यूज चैनल ‘फॉक्स न्यूज’ को दिए एक बेबाक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने वाशिंगटन के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए भारत का नाम सबसे आगे रखा। उन्होंने पूरी दुनिया को याद दिलाया कि संकट की इस घड़ी में 140 करोड़ की आबादी वाला भारत उनका सबसे अटूट और भरोसेमंद दोस्त बनकर खड़ा है।

जेडी वेंस के किस तीखे बयान पर मचा बवाल?
दरअसल, यह पूरा विवाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पिछले दिनों दिए गए एक बयान से शुरू हुआ। अमेरिकी सरकार द्वारा ईरान के साथ किए गए शांति समझौते (MOU) को लेकर इजरायली कैबिनेट के कुछ मंत्रियों ने नाराजगी जाहिर की थी और अमेरिकी नीतियों की सार्वजनिक आलोचना की थी। इस पर भड़कते हुए जेडी वेंस ने इजरायल को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी थी। वेंस ने कहा था, “डोनाल्ड ट्रम्प ही इस समय पूरी दुनिया में एकमात्र राष्ट्राध्यक्ष हैं जो इजरायल के प्रति सहानुभूति रखते हैं। अगर मैं इजरायल सरकार की कैबिनेट में होता, तो मैं दुनिया में अपने बचे हुए एकमात्र शक्तिशाली दोस्त (अमेरिका) पर इस तरह सार्वजनिक हमले कभी नहीं करता।” वेंस ने इजरायल की रणनीति पर सवाल उठाते हुए यह भी कह दिया था कि महज 90 लाख की आबादी वाला देश सिर्फ सैन्य ताकत के बल पर अपनी सभी सुरक्षा समस्याओं को हल नहीं कर सकता।

नेतन्याहू का जवाब: ‘हम अकेले नहीं, भारत हमारे साथ है’
अमेरिकी उपराष्ट्रपति के इसी ‘अहंकार’ और दावे पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पलटवार किया है। इंटरव्यू के दौरान जब उनसे जेडी वेंस की इस टिप्पणी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही नपे-तुले लेकिन बेहद सख्त लहजे में कहा, “मैं जेडी वेंस का सम्मान करता हूं और हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि मैं उनकी हर बात से सहमत हूं।” नेतन्याहू ने आगे कहा, “यह सच है कि व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रम्प हमारे अब तक के सबसे महान मित्र रहे हैं और मैं इस बात पर पूरी तरह कायम हूं। लेकिन यह सोचना गलत है कि अमेरिका ही हमारा इकलौता मददगार है। हमारे पास भारत जैसे और भी बेहतरीन दोस्त हैं। भारत की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है, और वहां से हमें जो जबरदस्त समर्थन मिलता है, उसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते।” प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सोशल मीडिया का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका फेसबुक अकाउंट भारतीय नागरिकों के अटूट समर्थन और प्यार भरे संदेशों से हमेशा भरा रहता है।

‘पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और है’
इंटरव्यू के दौरान नेतन्याहू ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर इजरायल के खिलाफ चल रहे नैरेटिव को भी खारिज किया। उन्होंने खुलासा किया कि भले ही दुनिया के कई देश घरेलू राजनीतिक दबाव और पब्लिक ओपिनियन के कारण खुलकर सामने न आ रहे हों, लेकिन पर्दे के पीछे के संबंध बिल्कुल अलग हैं। नेतन्याहू ने दावा किया, “दुनिया के कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष मुझे व्यक्तिगत रूप से फोन करते हैं। वे कहते हैं कि उनके देश में जनता का दबाव है, लेकिन वे दिल से इजरायल का सम्मान करते हैं। वे हमसे रक्षा सौदे करना चाहते हैं, हमारी सेना की आधुनिक तकनीक सीखना चाहते हैं और इजरायल की विश्व प्रसिद्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व साइबर विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं।”* उन्होंने याद दिलाया कि इजरायल साइबर सुरक्षा के मामले में दुनिया का दूसरे नंबर का सबसे ताकतवर देश है, इसलिए उसकी तकनीक की मांग हर जगह है।

ट्रम्प से मुलाकात और भविष्य की रणनीति
अमेरिकी प्रशासन और इजरायल के बीच ईरान समझौते और लेबनान में सैन्य अभियानों को लेकर हाल के दिनों में कुछ मतभेद उभरे हैं। यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा नेतन्याहू की रणनीतियों की आलोचना की खबरें भी सामने आई थीं। हालांकि, नेतन्याहू ने ट्रम्प के साथ किसी भी तरह की बड़ी दरार से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के संबंध केवल स्वार्थ पर नहीं बल्कि साझा मूल्यों पर आधारित हैं। नेतन्याहू बहुत जल्द वाशिंगटन का दौरा करने वाले हैं, जहां नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के बाद व्हाइट हाउस में उनकी डोनाल्ड ट्रम्प के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच उपजे हालिया तनाव को दूर करने और पश्चिम एशिया की भविष्य की सुरक्षा रणनीति पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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