
संवाद 24 नई दिल्ली। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर लगातार उठ रहे सवालों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों के बीच केंद्र सरकार ने विस्तृत सफाई जारी करते हुए लोगों की प्रमुख आशंकाओं को दूर करने का प्रयास किया है। सरकार का कहना है कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लंबे वैज्ञानिक परीक्षणों और विशेषज्ञों की सलाह के बाद लागू किया गया है। इसका उद्देश्य केवल प्रदूषण कम करना नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना और किसानों की आय में वृद्धि करना भी है।
क्या E20 पेट्रोल से इंजन को होगा नुकसान?
सरकार के अनुसार E20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन, धातु या प्लास्टिक के पुर्जों को किसी प्रकार का गंभीर नुकसान होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। मंत्रालय ने बताया कि वाहन अनुसंधान संस्थानों, तेल कंपनियों और ऑटोमोबाइल निर्माताओं ने संयुक्त रूप से व्यापक परीक्षण किए हैं। इन परीक्षणों में अधिकांश वाहनों के लिए E20 को सुरक्षित पाया गया है। हालांकि कुछ पुराने मॉडलों में रबर के कुछ हिस्सों या गैस्केट को समय के साथ बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है, जिसे सामान्य रखरखाव का हिस्सा माना गया है।
माइलेज को लेकर क्या है सरकार की राय?
E20 पेट्रोल के कारण माइलेज कम होने की चर्चा भी काफी समय से हो रही है। इस पर सरकार ने माना कि कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता पर हल्का असर पड़ सकता है, लेकिन यह बहुत सीमित है। सरकार का कहना है कि वाहन की सर्विसिंग, टायर में सही हवा, ड्राइविंग का तरीका और इंजन की स्थिति जैसे कई अन्य कारक भी माइलेज को प्रभावित करते हैं। वाहन निर्माताओं ने भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कमी आती है तो वह लगभग तीन से साढ़े तीन प्रतिशत तक ही सीमित रहती है।
बीमा और वारंटी को लेकर फैली अफवाहों पर क्या बोली सरकार?
सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया जा रहा था कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से वाहन की वारंटी या बीमा अमान्य हो सकता है। सरकार ने इसे पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि ऐसी किसी भी आशंका का कोई आधार नहीं है। मंत्रालय के अनुसार बीमा कंपनियों और वाहन निर्माताओं से इस विषय पर चर्चा की गई है और सभी ने स्पष्ट किया है कि E20 ईंधन के उपयोग से बीमा या वारंटी पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
दुनिया के कई देशों में पहले से हो रहा है उपयोग
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत इस दिशा में पहला देश नहीं है। ब्राज़ील सहित कई देशों में वर्षों से अधिक इथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफल उपयोग किया जा रहा है। वहां भी वही प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां अपनी गाड़ियां बेचती हैं जो भारत में मौजूद हैं। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय अनुभव और भारतीय परीक्षणों के आधार पर ही इस ईंधन को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है।
किसानों और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ
सरकार का दावा है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है। गन्ने और मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। इसके साथ ही कच्चे तेल के आयात में कमी आने से विदेशी मुद्रा की भी बचत हो रही है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी और देश ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनेगा।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार E20 पेट्रोल से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिलता है। सरकार इसे वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानती है। मंत्रालय का कहना है कि जैव ईंधन के अधिक उपयोग से प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई गति मिलेगी।
आगे की रणनीति पर भी दिया भरोसा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल E20 कार्यक्रम तय योजना के अनुसार आगे बढ़ेगा। यदि भविष्य में इससे अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को लागू करने पर विचार किया जाता है तो उससे पहले वैज्ञानिक संस्थानों, वाहन निर्माताओं, तेल कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा की जाएगी। बिना पर्याप्त परीक्षण और तैयारी के कोई नया निर्णय नहीं लिया जाएगा।
लोगों से अफवाहों से बचने की अपील
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट दावों पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक जानकारी पर विश्वास करें। मंत्रालय का कहना है कि E20 पेट्रोल को लेकर फैलाए जा रहे कई दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए ही इस योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर समय-समय पर तकनीकी सुधार भी किए जाएंगे।






