फर्रुखाबाद की ‘मसीहा’ डॉ. रजनी सरीन का अचानक निधन, सेवा के एक स्वर्णिम युग का अंत!

संवाद 24 डेस्क। शहर ने खो दिया अपना ‘कोहिनूर’, हर आंख हुई नम
फर्रुखाबाद के चिकित्सा और सामाजिक जगत से एक बेहद स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। शहर की धड़कन और गरीबों की मसीहा मानी जाने वाली मशहूर लेडी डॉक्टर और प्रखर भाजपा नेता डॉ. रजनी सरीन अब हमारे बीच नहीं रहीं। रविवार की दोपहर जैसे ही उनके निधन की खबर शहर में फैली, मानो पूरे इलाके की रफ्तार थम गई। जिसने भी यह सुना, उसकी आंखें छलक आईं।
मरीजों के लिए ‘भगवान’ और भूखों के लिए ‘अन्नपूर्णा’ थीं डॉक्टर साहिबा
डॉ. रजनी सरीन सिर्फ दवाइयां नहीं लिखती थीं, बल्कि वह टूटते हुए परिवारों को जीने की उम्मीद देती थीं। साल 2018 में उन्होंने एक ऐसी निशुल्क सामुदायिक रसोई की नींव रखी, जिसने कभी किसी गरीब को भूखे पेट सोने नहीं दिया। कोरोना की खौफनाक लहर के दौरान जब लोग घरों में कैद थे, तब वह अपनी जान हथेली पर रखकर सड़कों पर उतरीं, सैकड़ों भूखों को खाना खिलाया और तड़पते मरीजों को उनके घर जाकर मुफ्त दवाइयां बांटीं।
अनाथ बच्चों की ‘मां’ बनकर पलक झपकते बदल दी उनकी तकदीर
उनकी ममता की कोई सीमा नहीं थी। अस्पताल के बाहर या सड़कों पर लावारिस छोड़ दिए गए करीब 23 नवजात बच्चों के लिए वह साक्षात ‘मां’ बनकर सामने आईं। डॉ. सरीन ने न सिर्फ उन मासूमों की जान बचाई, बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करवाकर उन्हें सुरक्षित और अच्छे परिवारों में गोद दिलवाया, ताकि उन बच्चों का भविष्य संवर सके।
दिल्ली के गलियारों से लेकर साहित्य के मंच तक गूंजता था नाम
डॉ. रजनी सरीन का कद सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं था। अपनी काबिलियत के दम पर उन्होंने ‘SJVN लिमिटेड’ जैसी बड़ी नेशनल कंपनी में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर का पद संभाला और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई। इसके साथ ही, वह एक बेहतरीन लेखिका भी थीं। ‘अभिव्यंजना’ जैसी साहित्यिक संस्थाओं और रेड क्रॉस सोसाइटी के मंच पर उनकी आवाज हमेशा गूंजती रहती थी।
पीछे छोड़ गईं सेवा की अधूरी विरासत, पांचालघाट पर होगा अंतिम सफर
उनका जाना एक ऐसा वैक्यूम (खालीपन) पैदा कर गया है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। वह अपने पीछे डॉक्टर बेटियों (डॉ. पायल सरीन, डॉ. कोयल) और बेटे अंकित सरीन सहित रोता-बिलखता पूरा परिवार छोड़ गई हैं। इस महान आत्मा का अंतिम संस्कार पांचालघाट के पवित्र तट पर किया जाएगा, जहां पूरा शहर उन्हें अपनी अंतिम और सबसे भावुक विदाई देगा।

Manvendra Somvanshi
Manvendra Somvanshi

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