
संवाद 24 नई दिल्ली । नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी अर्जु राणा देउबा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोनों की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को कार्रवाई से पहले ठोस कानूनी आधार और प्रक्रिया का पालन करना होगा।
गिरफ्तारी वारंट पर अदालत की सख्त टिप्पणी
काठमांडू जिला अदालत की ओर से जारी गिरफ्तारी वारंट को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी जैसे कदम के लिए यह दिखाना जरूरी है कि आरोपी फरार हो सकते हैं, सबूत मिटा सकते हैं या जांच में बाधा डाल सकते हैं।
देउबा दंपती को फिलहाल राहत
सुप्रीम कोर्ट की संयुक्त पीठ ने संबंधित सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिया कि फिलहाल देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई न की जाए। यह आदेश मनी लॉन्ड्रिंग जांच के बीच नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
नेपाल के मनी लॉन्ड्रिंग जांच विभाग ने देउबा दंपती के खिलाफ संपत्ति और वित्तीय लेन-देन से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की थी। इससे पहले काठमांडू जिला अदालत से गिरफ्तारी की अनुमति ली गई थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रूप से रोक दिया है।
राजनीतिक असर भी बड़ा
शेर बहादुर देउबा नेपाल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और कई बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। ऐसे में उनके खिलाफ जांच और फिर गिरफ्तारी पर रोक ने सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में हलचल बढ़ा दी है।
आगे क्या होगा?
अब जांच एजेंसियों को मामले में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ना होगा। सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश अंतिम फैसला नहीं है, लेकिन फिलहाल देउबा दंपती को गिरफ्तारी से सुरक्षा मिल गई है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि जांच और कार्रवाई कानून के दायरे में हुई या नहीं।






