क्या व्यायाम एक साधना है? जानिए कैसे बढ़ाता है यह उम्र और मानसिक शक्ति।
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संवाद 24 (संजीव सोमवंशी)। हम सब जानते हैं कि व्यायाम हमारे दैनिक जीवन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन शायद हम लोग यह नहीं जानते होंगे कि हमें व्यायाम क्यों करना चाहिए? महर्षि बागभट्ट जी ने कहा है –
देहे सर्वत्र चोष्णस्य समता लाघवं सुखम्।
क्षत् तीक्ष्णा गाढ़निद्रा च मनसोSपि प्रसन्नता।।
शरीरे कर्मसामर्थ्य अनालस्य च कर्मसु।
स्वतः स्वेदोगमःकाले स्वस्थतांलक्षयन्ति हि।।
अर्थात शरीर की त्वचा निरोगी एवं चमकदार हो, वजन नियंत्रित हो, दिन में एक बार तेज भूख लगे, रात्रि में अच्छी नींद आए, मन में प्रसन्नता का अनुभव हो, शरीर के किसी भी हिस्से में कोई दर्द ना हो, आलस्य का अनुभव ना हो, प्रतिदिन स्वतः एक बार पेट अच्छी तरह से साफ हो, यही अच्छे स्वास्थ्य या अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता के लक्षण हैं।
महर्षि बागभट्ट जी ने स्वास्थ्य की जो परिभाषा दी, वह आधुनिक विज्ञान की भाषा में “फिजिकल, मेंटल और इमोशनल वेलबीइंग” का प्रतीक है। इस संतुलन को बनाए रखने का सबसे आसान, प्राकृतिक और निःशुल्क उपाय है व्यायाम।
हम क्यों करें व्यायाम? –
मनुष्य का शरीर स्थिरता के लिए नहीं, गतिशीलता के लिए बना है। हमारे पूर्वज खानाबदोश जीवन जीते थे वे भोजन, आश्रय और सुरक्षा के लिए प्रकृति के साथ निरंतर चलते, दौड़ते, श्रम करते थे। ईश्वर ने हमारे शरीर को उसी अनुरूप रचा है कि वह तभी स्वस्थ रहेगा जब उसकी प्रत्येक मांसपेशी, नस और जोड़ निरंतर सक्रिय रहेंगे।
लेकिन आज की जीवनशैली में, जहां सुबह से रात तक हम स्क्रीन और कुर्सी से बंधे रहते हैं, वह प्राकृतिक सक्रियता लगभग समाप्त हो चुकी है। परिणामस्वरूप मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, तनाव और अवसाद जैसी बीमारियाँ आज के समय की सबसे बड़ी महामारी बन चुकी हैं।
व्यायाम का सीधा प्रभाव हमारे शरीर की आंतरिक यांत्रिकी पर पड़ता है। जब हम नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ता है, कोशिकाएं अधिक ऑक्सीजन ग्रहण करती हैं, और पाचन, चयापचय तथा प्रतिरक्षा प्रणाली अधिक कुशल बन जाती है।
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि व्यायाम से शरीर में “एंटी-इंफ्लेमेटरी मायोकिन्स” नामक पदार्थ बढ़ता है, जो न केवल वसा को कम करता है बल्कि अंगों के आसपास जमा आंतरिक चर्बी (visceral fat) को भी घटाता है। यही वसा हृदय रोग, डायबिटीज़ और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों की जड़ मानी गई है।
नियमित व्यायाम से शरीर की कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन बढ़ता है, जिससे व्यक्ति में स्थायी स्फूर्ति और हल्कापन बना रहता है। व्यायाम से मिलने वाले प्रमुख शारीरिक लाभ –
1️⃣ हृदय को मजबूत बनाता है- नियमित व्यायाम से हृदय की मांसपेशियाँ सुदृढ़ होती हैं, रक्त का संचार बेहतर होता है और रक्तचाप नियंत्रित रहता है। यह “हार्ट अटैक” और “स्ट्रोक” जैसी घातक बीमारियों से बचाव करता है।
2️⃣ मांसपेशियाँ और हड्डियाँ मजबूत होती हैं- व्यायाम मांसपेशियों के विकास में मदद करता है और हड्डियों के घनत्व को बढ़ाता है। यह ऑस्टियोपोरोसिस जैसे रोगों से बचाव में अत्यंत उपयोगी है।
3️⃣ वजन नियंत्रित करता है- व्यायाम शरीर की कैलोरी बर्निंग क्षमता को बढ़ाता है। यह वसा घटाने, वजन संतुलित रखने और मोटापे से बचने का सबसे स्वाभाविक तरीका है।
4️⃣ मधुमेह और उच्च रक्तचाप से सुरक्षा- व्यायाम इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ाता है, जिससे शरीर रक्त शर्करा का सही उपयोग कर पाता है। यह डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर दोनों के लिए रामबाण है।
5️⃣ नींद की गुणवत्ता में सुधार- जब शरीर थकान का “संतुलित” अनुभव करता है, तो नींद गहरी और आरामदायक होती है। नियमित व्यायाम अनिद्रा की समस्या को भी दूर करता है।
6️⃣ प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है- जो व्यक्ति व्यायाम करता है, उसका शरीर संक्रमणों से लड़ने में सक्षम होता है। यह बात कोविड काल के दौरान सिद्ध भी हुई जहाँ जिनकी इम्युनिटी मजबूत थी, वे गंभीर संक्रमण से सुरक्षित रहे।
व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य – जहाँ व्यायाम शरीर को सुदृढ़ बनाता है, वहीं यह मन के लिए एक दवा का काम करता है।???? तनाव से मुक्ति का सर्वोत्तम उपाय – व्यायाम के दौरान मस्तिष्क में एंडोर्फिन नामक “खुशी के हार्मोन” का स्राव होता है, जो चिंता, तनाव और अवसाद को दूर करते हैं।
????♀️ एकाग्रता और स्मरण शक्ति में वृद्धि – नियमित शारीरिक गतिविधि से मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ता है। यह नई कोशिकाओं के निर्माण को प्रेरित करता है, जिससे स्मरण शक्ति और सीखने की क्षमता दोनों बढ़ती हैं।
???? आत्मविश्वास और आत्म-संतोष में वृद्धि – व्यायाम करने वाला व्यक्ति अपने शरीर से अधिक संतुष्ट होता है, जिससे उसका आत्म-सम्मान बढ़ता है और मानसिक शांति बनी रहती है।
वैज्ञानिक रूप से सिद्ध प्रभाव –
आधुनिक विज्ञान ने भी यह प्रमाणित किया है कि रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी मृत्यु दर को 25–30% तक घटा सकती है। जो लोग हर दिन 30–40 मिनट व्यायाम करते हैं, उनकी जीवन प्रत्याशा निष्क्रिय लोगों से औसतन दो वर्ष अधिक होती है। कई मेडिकल रिसर्च बताती हैं कि व्यायाम से डिप्रेशन, हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज़, और यहां तक कि कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है।
कैसे करें शुरुआत? –
बहुत से लोग सोचते हैं कि व्यायाम का मतलब जिम जाना या भारी वर्कआउट करना है, लेकिन यह गलत धारणा है। व्यायाम का मूल सिद्धांत है नियमितता, न कि तीव्रता।
???? शुरुआत में सिर्फ 15–20 मिनट की सैर भी पर्याप्त है। धीरे-धीरे समय और तीव्रता बढ़ाई जा सकती है।
???? योगासन, सूर्य नमस्कार, तेज चाल, साइक्लिंग, तैराकी, या नृत्य ये सब समान रूप से लाभकारी हैं।
???? अपने लिए वही तरीका चुनें जो आपको आनंद दे, ताकि व्यायाम बोझ नहीं, बल्कि दिनचर्या का हिस्सा बन जाए।
व्यायाम से पहले की सावधानियाँ –
1️⃣ हमेशा हल्के वार्मअप से शुरुआत करें.
2️⃣ व्यायाम से पहले और बाद में पर्याप्त पानी पीएं।
3️⃣ भोजन के तुरंत बाद भारी व्यायाम न करें।
4️⃣ अगर कोई पुरानी बीमारी है तो चिकित्सक की सलाह लें।
5️⃣ और सबसे महत्वपूर्ण Consistency is the key.
भारतीय योग दर्शन में शरीर को “मंदिर” कहा गया है। जब हम व्यायाम करते हैं, तो केवल शरीर नहीं, बल्कि उस शरीर में स्थित मन और आत्मा को भी सशक्त करते हैं। योग, प्राणायाम और ध्यान जैसे अभ्यासों को “डायनमिक एक्सरसाइज” माना जा सकता है, जो न केवल मांसपेशियों बल्कि विचारों और भावनाओं को भी अनुशासित करते हैं। इसलिए कहा गया है “जो शरीर को वश में कर लेता है, वह मन को भी जीत लेता है।”
आधुनिक जीवन और व्यायाम की अनिवार्यता –
आज की मशीनरी जीवनशैली में “एक्सरसाइज” केवल स्वास्थ्य नहीं, बल्कि जीवित रहने की आवश्यकता बन चुकी है। हम अपने जीवन का बड़ा हिस्सा मोबाइल, लैपटॉप या ऑफिस कुर्सी पर बिताते हैं। यह निष्क्रियता धीरे-धीरे शरीर की ऊर्जा, आत्मविश्वास और प्रतिरोधक क्षमता तीनों को कम करती है। व्यायाम इस जड़ता को तोड़ता है, रक्त में ऑक्सीजन बढ़ाता है, और हमें हमारी “प्राकृतिक गति” से दोबारा जोड़ता है।
निष्कर्ष, चलना ही जीवन है –
यदि आप प्रतिदिन थोड़ा चल रहे हैं, थोड़ा श्रम कर रहे हैं, थोड़ा पसीना बहा रहे हैं तो आप अपने शरीर को सबसे बड़ा उपहार दे रहे हैं। “जो व्यक्ति व्यायाम करता है, वह न केवल अपनी उम्र बढ़ाता है, बल्कि हर दिन को सार्थक बनाता है।” व्यायाम केवल फिटनेस नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है, एक ऐसी प्रक्रिया जो शरीर को मजबूत, मन को शांत और आत्मा को प्रसन्न रखती है।
“व्यायाम वह यज्ञ है जिसमें आलस्य की आहुति देकर ऊर्जा, प्रसन्नता और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।”






