जल रहा है सूडान: मौत, चीखें और मानवता का अंत, दरफूर से सामने आ रहे युद्ध और नरसंहार के भयावह दृश्य।

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संवाद 24 (डेस्क)।  सूडान आज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ मानवता अपनी सबसे भीषण परीक्षा में है। राजधानी खार्तूम से लेकर पश्चिमी सूडान के दरफूर (Darfur) क्षेत्र तक, हर दिशा से सिर्फ गोलियों की आवाज़ें, धुएं के बादल और लाशों की कतारें दिखाई दे रही हैं। देश के दो मुख्य सैन्य गुट Sudanese Armed Forces (SAF) और Rapid Support Forces (RSF) के बीच चल रहा यह गृहयुद्ध अब जातीय नरसंहार और मानवीय त्रासदी का भयावह चेहरा बन चुका है।

दरफूर की राजधानी El Fasher आज पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। यहाँ RSF के कब्जे के बाद ऐसे दृश्य सामने आए हैं जिन्हें देखकर संयुक्त राष्ट्र तक सन्न रह गया।

उपग्रह चित्रों में सैकड़ों शव खुले मैदानों में पड़े दिखाई दिए हैं, कई जगहों पर बड़े पैमाने पर खुदाई कर “मास ग्रेव” (सामूहिक कब्रें) बनाए जाने की पुष्टि हुई है। 

स्थानीय स्रोतों के अनुसार, 26 अक्टूबर 2025 से शुरू हुए हमलों में हजारों लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। El Fasher के Saudi Maternity Hospital में चिकित्सक स्टाफ ने विदेशी मीडिया को बताया कि वहाँ 460 से अधिक शव जमा कर दिए गए थे, जिन्हें बाद में RSF के आदेश पर हटाया गया। शहर के कई इलाकों में घर-घर तलाशी, पुरुषों को दीवार से लगाकर गोली मारना, महिलाओं से बलात्कार और अस्पतालों पर हमले जैसी घटनाएँ दर्ज हुई हैं।

मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय नागरिकों द्वारा अपलोड किए गए वीडियो ने दुनिया को हिला दिया है। कई फुटेज में यह साफ दिख रहा है कि लोग मिट्टी के नीचे से शव निकालते हुए रो रहे हैं, सड़क पर जली हुई गाड़ियाँ और बच्चों के शरीर पड़े हैं, अस्पतालों के भीतर घायल मरीजों को फर्श पर लिटाया गया है, और कई वीडियो में RSF के लड़ाके “विजय” का जश्न मनाते हुए गोलियाँ चलाते नजर आते हैं

इन वीडियो को BBC, Al Jazeera, Reuters और AP ने वेरिफाई किया है। The Guardian की रिपोर्ट में कहा गया है कि “El Fasher में बहा खून अब सैटेलाइट से भी दिखाई दे रहा है, दुनिया अब यह नहीं कह सकती कि उसे कुछ पता नहीं।” सोशल मीडिया पर #SaveDarfur और #PrayForSudan जैसे हैशटैग लाखों बार शेयर हो चुके हैं, पर ज़मीन पर हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं।

युद्ध की जड़: सत्ता और जातीय वर्चस्व की लड़ाई – 
Sudanese Armed Forces (SAF) के प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान और RSF के प्रमुख मोहम्मद हमदान दगालो (हेमेदती) के बीच सत्ता संघर्ष ने पूरे देश को जलाकर रख दिया है। RSF की उत्पत्ति जांज़ीवेद मिलिशिया से हुई थी, जिसे 2000 के दशक में दरफूर के विद्रोह को दबाने के लिए खड़ा किया गया था। इन पर पहले से ही जातीय सफाए (ethnic cleansing) और जनसंहार के आरोप हैं। आज वही RSF अब राजधानी से लेकर पश्चिम तक कई इलाकों पर नियंत्रण कर चुकी है। उनका निशाना विशेष रूप से गैर-अरब जनजातियाँ (जैसे Masalit, Fur) हैं, जिन्हें खुलेआम खत्म किया जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार, इस युद्ध ने अब तक 1.2 करोड़ से अधिक लोगों को विस्थापित कर दिया है। El Fasher और आसपास के इलाकों में भोजन खत्म हो चुका है, पानी दूषित है, और अस्पताल बंद हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, “सूडान में भुखमरी अब हथियार की तरह इस्तेमाल की जा रही है।” एक स्थानीय नर्स ने बताया “हमारे पास न दवाइयाँ हैं, न बिजली। हम बच्चों के जख्मों पर पुराने कपड़े बाँधकर खून रोकने की कोशिश करते हैं।” वहीं, कई महिलाएँ बलात्कार और हिंसा की शिकार हुई हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि RSF के सैनिक “युद्ध के हथियार के रूप में” यौन हिंसा का प्रयोग कर रहे हैं।

El Fasher से बाहर आए कई छोटे-छोटे वीडियो दुनिया को वह सच दिखा रहे हैं जो शायद कोई भी नहीं देखना चाहता, एक पिता अपने तीन बच्चों के शवों को एक पुराने कपड़े में लपेटकर दफन करता दिखता है। एक स्कूल के मैदान में महिलाएँ अपने प्रियजनों की लाशों को पहचानती हुई बेहोश हो जाती हैं। RSF के हमलावर वीडियो में हँसते हुए टैंक पर झंडा लहरा रहे हैं। इन वीडियो को सत्यापित करने वाले स्वतंत्र पत्रकारों का कहना है कि यह “21वीं सदी के सबसे भीषण अपराधों में से एक” है। कई वीडियो यूएन और आईसीसी (अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय) के लिए सबूत के रूप में सुरक्षित किए जा रहे हैं।

दुनिया की चुप्पी पर संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी – 
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि सूडान का गृहयुद्ध अब “नियंत्रण से बाहर” हो चुका है। फिर भी, अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब तक निर्णायक कदम नहीं उठा पाया है।

पश्चिमी देशों ने हथियारों की आपूर्ति रोकने और मानवीय सहायता खोलने की अपील की है, लेकिन सुरक्षा परिषद में मतभेद, मध्य-पूर्वी देशों की राजनीतिक भूमिका, और जमीन पर RSF की पकड़ के कारण ठोस कदम नहीं उठाए जा सके हैं। संयुक्त राष्ट्र की मानवीय एजेंसियाँ कह रही हैं कि “अगर मदद जल्द नहीं पहुँची तो यह स्थिति जनसंहार (Genocide) से भी आगे बढ़ जाएगी।”

कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने तुरंत रूप से RSF द्वारा किए गए दुष्कर्मों, निष्पादन और यौन-हिंसा के आरोपों की निंदा की है और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने की माँग की है।  हालांकि, सक्रिय लड़ाई, संचार ब्लॉक, और बार्डरों के बंद होने के कारण सटीक आंकड़ों का आकलन करना मुश्किल हो रहा है। उपग्रह चित्र और वीडियो प्रमाण यह संकेत देते हैं कि अब तक सामने आए आंकड़े वास्तविकता का बहुत छोटा हिस्सा हो सकते हैं। 

भारत सूडान से अपने नागरिकों को निकालने के लिए “ऑपरेशन कावेरी” पहले ही चला चुका है, लेकिन अब यह संघर्ष सिर्फ सूडान की सीमा तक सीमित नहीं है। दक्षिण सूडान, चाड, इथियोपिया और मिस्र में शरणार्थियों की भारी आमद से क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में है। विश्व खाद्य और चिकित्सा आपूर्ति शृंखला पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। भारत ने मानवीय सहायता भेजने का वादा किया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि “इस युद्ध को रोकने के लिए सिर्फ दान नहीं, अंतरराष्ट्रीय दबाव” की जरूरत है।

El Fasher अब खंडहर में बदल चुका है। वहाँ की गलियाँ धुएँ और गंध से भरी हैं, लोग अपने प्रियजनों के नाम से पुकार रहे हैं, और मानवता एक-एक कर दम तोड़ रही है। RSF और SAF दोनों पक्ष अभी भी “पूर्ण विजय” के मूड में हैं। युद्धविराम की बातचीत बार-बार असफल हुई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने RSF और SAF दोनों पर कड़े प्रतिबंध, युद्ध अपराधों की जाँच, और मानवीय सहायता गलियारा (Humanitarian Corridor) नहीं बनाया, तो आने वाले हफ्तों में सूडान “दूसरा सीरिया या रवांडा” बन सकता है।

El Fasher की सड़कों से जो वीडियो और तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे सिर्फ खबरें नहीं, सभ्यता के विवेक पर सवाल हैं। एक महिला ने कैमरे के सामने रोते हुए कहा था “हम भी इंसान हैं, हमें मिट्टी की तरह क्यों कुचला जा रहा है?” और यह सवाल अब सिर्फ सूडान का नहीं, पूरी दुनिया का है।

RSF और उससे जुड़े मिलिशिया ने El Geneina (West Darfur) में अप्रैल-नवम्बर 2023 के बीच में “मासालित (Massalit)” जनजाति एवं अन्य गैर-अरब जनजातियों को लक्षित किया। RSF ने El Fasher (North Darfur) कब्जे के समय पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को घर-घर तलाश कर मारने, भागते नागरिकों को गोलियाँ चलाने और यौन-हिंसा करने की रिपोर्टें सामने आई हैं। 

मानवाधिकार समूहों ने इस व्यवहार को “जातीय सफाया” (ethnic cleansing) और “मानवता के विरुद्ध अपराध” (crimes against humanity) के रूप में देखा है कारण यह कि लक्षित समूह अक्सर गैर-अरब, अफ्रीकी-वंश (African descent) जनजातियाँ हैं, जिनका RSF द्वारा समूह-आधारित रूप से दमन किया जा रहा है। 

सूडान का यह गृहयुद्ध अब केवल सत्ता की लड़ाई नहीं रहा यह मानवता के अस्तित्व की परीक्षा बन चुका है। अब वहां सिर्फ दो सेनाओं के बीच संघर्ष नहीं हो रहा, बल्कि वहाँ नागरिकों पर एक संगठित रूप से चलाए गए नरसंहार, यौन-हिंसा, जातीय सफाया और मानवीय तर्जनाओं का एक गहरा सिलसिला सामने आया है। El Fasher में RSF की कब्जेदारी के बाद जो अत्याचार सामने आए हैं, वे सिर्फ आपदाएं नहीं वे संभावित युद्ध और मानव अधिकार अपराधों की श्रेणी में आते हैं।

मुख्यतः ये संघर्ष  “अरब” बनाम “गैर-अरब” जनजातियों की हिंसा है, न कि मुस्लिम बनाम गैर-मुस्लिम। उदाहरण के लिए RSF खुद मुस्लिम है, एवं पीड़ित समूह भी ज्यादातर मुस्लिम मूल के ही हैं, परंतु उनकी जातीय पहचान के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। 

Samvad 24 Office
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