अमोलर में स्मार्ट मीटर विवाद ने लिया उग्र रूप, बिजली आपूर्ति ठप
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कन्नौज जिले के छिबरामऊ क्षेत्र के अमोलर गांव में स्मार्ट मीटर लगाए जाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शनिवार को ग्रामीणों और उपभोक्ताओं ने इस प्रक्रिया का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया, जिसके बाद विद्युत विभाग द्वारा गांव की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। इस घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर तनाव और असंतोष की स्थिति पैदा कर दी है।
बिना सहमति स्मार्ट मीटर लगाने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि विद्युत निगम के ठेकेदार बिना स्पष्ट जानकारी और उनकी सहमति के पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगा रहे हैं। स्थानीय निवासी राम बाबू, राजेंद्र कुमार पाल, अरविंद कुमार और सुषमा कुशवाहा सहित कई उपभोक्ताओं का कहना है कि वे नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करते हैं, इसके बावजूद उन पर स्मार्ट मीटर जबरन थोपे जा रहे हैं।
जेई का सख्त रुख: “स्मार्ट मीटर अनिवार्य”
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए संबंधित जूनियर इंजीनियर (JE) भूपेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि शासन के निर्देशानुसार स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जो उपभोक्ता इसका विरोध करेंगे, उनकी बिजली आपूर्ति बाधित की जा सकती है। इसी क्रम में प्रदर्शन के बाद गांव की बिजली काट दी गई।
भीषण गर्मी में बिजली कटौती से बढ़ी परेशानी
बिजली आपूर्ति बंद होने से गांव में जनजीवन प्रभावित हो गया है। खासकर भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दुकानदारों और छोटे व्यापारियों का कामकाज ठप हो गया, वहीं घरों में पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं पर भी असर पड़ा है।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर पहुंची शिकायत
मामले को लेकर कुछ उपभोक्ताओं ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। ग्रामीणों की मांग है कि स्मार्ट मीटर लगाने से पहले उन्हें पूरी जानकारी दी जाए और उनकी सहमति ली जाए। साथ ही, जबरन कार्रवाई और बिजली कटौती जैसे कदमों को तत्काल रोका जाए।
क्या कहता है व्यापक परिप्रेक्ष्य?
प्रदेश में स्मार्ट मीटर योजना को बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता और बिलिंग सुधार के लिए लागू किया जा रहा है। हालांकि, कई जगहों पर इसके विरोध की खबरें सामने आ रही हैं, जिनका मुख्य कारणजागरूकता की कमी और उपभोक्ताओं की आशंकाएं हैं।अमोलर गांव का यह मामला सिर्फ एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि स्मार्ट मीटर नीति के क्रियान्वयन में सामने आ रही चुनौतियों का उदाहरण है। अब देखना होगा कि प्रशासन और विद्युत विभाग इस मुद्दे को संवाद और संतुलन के जरिए कैसे सुलझाते हैं, ताकि उपभोक्ताओं का भरोसा कायम रह सके।






