जैनपुर में विकास कार्यों पर सवाल: सड़क-नाली निर्माण में अनियमितताओं का आरोप
Share your love

कन्नौज जनपद के विकास खण्ड उमर्दा के जैनपुर ग्राम पंचायत में सड़क और नाली निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मामला उमर्दा ब्लॉक का है, जो प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण के विधानसभा क्षेत्र में आता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी कर घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है।
घटिया निर्माण सामग्री से गुणवत्ता पर उठे सवाल
ग्रामीणों के अनुसार, जैनपुर के मौजा बिलंदापुर में बन रही सड़क और नाली में ठेकेदार द्वारा गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। आरोप है कि नाली निर्माण में पुरानी नींव का ही उपयोग किया जा रहा है और उसके ऊपर कमजोर व निम्न स्तर की ईंटें लगाई जा रही हैं। नियमानुसार जहां गिट्टी या रोड़ी की मजबूत परत बिछाई जानी चाहिए, वहां सीधे मिट्टी पर ही निर्माण किया जा रहा है, जिससे कार्य की मजबूती संदिग्ध हो गई है।
गंदगी और क्षतिग्रस्त नालियों से ग्रामीण परेशान
गांव की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। मुख्य सड़क से लेकर गलियों तक कूड़े के ढेर लगे हैं और कई स्थानों पर नालियां क्षतिग्रस्त हैं। इससे न केवल जलभराव की समस्या उत्पन्न हो रही है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने कई बार इस संबंध में आपत्ति जताई, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन की जानकारी से बाहर रहा मामला
ग्रामीणों का दावा है कि एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद स्थानीय प्रशासन को इस कथित भ्रष्टाचार की जानकारी तक नहीं थी। यह स्थिति शासन-प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है, खासकर तब जब प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति की बात करती है।
जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर्दा की बीडीओ सोनिया श्रीवास्तव ने कहा कि शिकायत की जांच कराई जाएगी और यदि अनियमितताएं पाई गईं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सवालों के घेरे में सिस्टम, जवाबदेही की मांग तेज
यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं कमी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच के बाद क्या वास्तव में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होती है या यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।






