2026 चैत्र नवरात्रि, 72 साल बाद बना दुर्लभ संयोग! जानें घटस्थापना का महा-मुहूर्त और 9 दिनों का संपूर्ण मार्गदर्शन
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विशेष संवाददाता | संवाद 24
मुख्य विश्लेषक: आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री (वैदिक ज्योतिष, धर्मनिर्णय एवं कर्मकांड विशेषज्ञ)
शक्ति की उपासना और नव संवत्सर (हिंदू नव वर्ष) का महापर्व ‘चैत्र नवरात्रि’ इस वर्ष न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा लेकर आ रहा है, बल्कि खगोलीय दृष्टि से भी अत्यंत दुर्लभ है। ज्योतिषविदों के अनुसार, इस बार घटस्थापना के समय अमावस्या का प्रभाव रहने से 72 वर्षों के बाद एक विशेष दुर्लभ महासंयोग बन रहा है। ‘संवाद 24’ की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए नवरात्रि का सटीक समय, माँ दुर्गा के आगमन का वाहन और आपकी उन्नति के अचूक उपाय।
कब से प्रारंभ है नवरात्रि? तिथि का सटीक गणित
पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026 को प्रातः 06:52 बजे प्रारंभ होगी। उदया तिथि की मान्यता के कारण नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च, गुरुवार से होगा। इस पावन पर्व का समापन 27 मार्च को ‘रामनवमी’ के महापर्व के साथ होगा।
माँ का आगमन और गमन: इस वर्ष माँ दुर्गा डोली पर सवार होकर आ रही हैं, जो राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल का संकेत है। हालांकि, माँ का गमन हाथी पर होगा, जो आने वाले समय में सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और कृषि लाभ का शुभ प्रतीक है।
घटस्थापना (कलश स्थापना) का महा-मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार, शुभ मुहूर्त में स्थापित कलश ही घर में सुख-शांति लाता है। 19 मार्च को दो सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त उपलब्ध हैं:
- प्रातः काल (प्रथम मुहूर्त): सुबह 06:52 AM से 07:43 AM तक।
- अभिजीत मुहूर्त (द्वितीय मुहूर्त): दोपहर 12:05 PM से 12:53 PM तक।
कलश स्थापना और सरल पूजन विधि
शुद्धि और संकल्प: ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर लाल वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें और लाल वस्त्र बिछाकर माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें।
जौ और कलश: मिट्टी के पात्र में स्वच्छ मिट्टी भरकर ‘जौ’ (समृद्धि का प्रतीक) बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश में जल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और नारियल को लाल वस्त्र में लपेटकर स्थापित करें。
अखंड ज्योति और मंत्र: यदि संभव हो तो 9 दिनों की अखंड ज्योति प्रज्वलित करें। ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का निरंतर जप और ‘दुर्गा सप्तशती’ का पाठ आपके जीवन से नकारात्मकता को जड़ से मिटा देगा।
माँ के ९ स्वरूप: शक्ति के ९ आयाम
प्रत्येक दिन माँ के एक विशिष्ट स्वरूप की पूजा करें, जो आपके जीवन के विभिन्न चक्रों (Chakras) को जागृत करती है:
- प्रथम (शैलपुत्री): स्थिरता और साहस हेतु (मूलाधार चक्र)।
- द्वितीय (ब्रह्मचारिणी): तप और संयम हेतु।
- तृतीय (चंद्रघंटा): भय मुक्ति और वीरता हेतु।
- चतुर्थ (कूष्मांडा): बुद्धि और सृजन हेतु।
- पंचम (स्कंदमाता): संतान सुख और मातृत्व हेतु।
- षष्ठम (कात्यायनी): बाधाओं के नाश और शीघ्र विवाह हेतु।
- सप्तम (कालरात्रि): शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा हेतु।
- अष्टम (महागौरी): शुद्धता और शांति हेतु (अष्टमी कन्या पूजन)।
- नवमी (सिद्धिदात्री): पूर्णता और मोक्ष हेतु (महानवमी/रामनवमी)।
संवाद 24 विशेष: नवरात्रि में विशेष अनुष्ठान का लाभ
आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री के अनुसार, इन 9 दिनों में किए गए अनुष्ठान सामान्य दिनों से सैकड़ों गुना अधिक फलदायी होते हैं:
- समृद्धि हेतु: श्री लक्ष्मी पूजन, श्रीसूक्त हवन और कुबेर पूजन।
- आरोग्य हेतु: महामृत्युंजय जप और रुद्राभिषेक।
- दोष निवारण: पितृ दोष और कालसर्प दोष शांति हेतु सर्वश्रेष्ठ समय।
- दान का महत्व: कन्याओं, असहायों और दिव्यांगों की सहायता करना ही माँ दुर्गा की सच्ची आराधना है।
आत्मशुद्धि का महा-अवसर
चैत्र नवरात्रि केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि अपनी आत्मा को शुद्ध करने और ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ने का मार्ग है। इस 19 मार्च से संकल्प लें, संयम अपनाएं और माँ जगदंबा के चरणों में अपनी भक्ति अर्पित करें।
“या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”







