स्क्रीन टाइम पर सख्ती की आहट: क्या भारत में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगेगा प्रतिबंध?
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भारत में बच्चों और किशोरों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया लत को लेकर नई बहस छिड़ गई है। हाल ही में कुछ राज्यों में कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने या सख्त नियम बनाने के प्रस्ताव सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अत्यधिक समय बिताने से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार पर असर पड़ सकता है, जिसके चलते नीति-निर्माताओं के बीच इसे नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा तेज़ हो गई है।
राज्यों की पहल ने बढ़ाई राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा
रिपोर्टों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध का प्रस्ताव सामने आया है, जबकि कर्नाटक में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के उपयोग पर रोक या सख्त नियंत्रण पर विचार किया जा रहा है। इन प्रस्तावों ने पूरे देश में एक व्यापक बहस को जन्म दिया है कि क्या बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए सख्त नियम जरूरी हैं।
केंद्र सरकार का रुख: पूर्ण प्रतिबंध नहीं, लेकिन सख्त नियम संभव
केंद्र सरकार फिलहाल बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं दिख रही है। हालांकि सरकार उम्र के आधार पर अलग-अलग नियम बनाने के विकल्प पर विचार कर रही है। प्रस्तावित मॉडल के तहत बच्चों को तीन आयु वर्गों—8-12 वर्ष, 12-16 वर्ष और 16-18 वर्ष—में बांटकर उनके लिए अलग-अलग स्तर की निगरानी और उपयोग की सीमा तय की जा सकती है। साथ ही सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए समय-सीमा और माता-पिता की सहमति को अनिवार्य करने जैसे उपायों पर भी चर्चा चल रही है।
क्यों उठ रही है यह मांग?
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों में चिंता, अवसाद, ध्यान की कमी और नींद से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है। इसके अलावा साइबर बुलिंग, अनुचित सामग्री और खतरनाक ऑनलाइन ट्रेंड्स भी बच्चों के लिए जोखिम पैदा करते हैं। इसी वजह से कई शिक्षाविद और अभिभावक सोशल मीडिया पर नियंत्रण या नियमन की मांग कर रहे हैं।
दुनिया के उदाहरण भी बढ़ा रहे दबाव
वैश्विक स्तर पर भी कई देशों ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने के कदम उठाए हैं। उदाहरण के तौर पर ऑस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खाता बनाने पर प्रतिबंध लागू करने का कानून बनाया है। इस कदम का उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन खतरों और डिजिटल लत से बचाना बताया गया है।
चुनौती: नियम बनाना आसान, लागू करना मुश्किल
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के नियम लागू करना आसान नहीं होगा। अलग-अलग राज्यों में अलग आयु सीमा तय होने से सोशल मीडिया कंपनियों के लिए तकनीकी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। साथ ही आयु सत्यापन, निजता और बच्चों के डिजिटल कौशल विकास जैसे मुद्दों को भी संतुलित करना होगा।
भारत में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर नियंत्रण को लेकर बहस अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन राज्यों की पहल और वैश्विक उदाहरणों के बीच यह मुद्दा तेजी से नीति-निर्माण के केंद्र में आ रहा है। आने वाले समय में संभव है कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने वाले नए नियम सामने आएं।






