रहस्यमयी बीमारी से दहशत: बैरागपुर में एक ही दिन में तीन भैंसों की मौत

छिबरामऊ विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत मिघौली के बैरागपुर गांव में अचानक हुई तीन भैंसों की मौत ने पूरे गांव में चिंता और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। एक ही दिन में हुई इन मौतों से पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि भैंसों की तबीयत अचानक बिगड़ी और उन्हें उपचार का मौका तक नहीं मिल सका, जिससे किसी रहस्यमय बीमारी के प्रकोप की आशंका जताई जा रही है।

पीड़ित परिवारों पर टूटा आर्थिक संकट

ग्रामीणों के अनुसार, मृत पशुओं में से एक भैंस सिद्ध श्री पत्नी मुकेश कुमार की थी, जिसे उन्होंने लगभग दो वर्ष पहले करीब एक लाख रुपये में खरीदा था। वहीं सुधीश पुत्र मुकेश ने बताया कि उन्होंने बैंक से ऋण लेकर भैंस खरीदी थी और अभी उसकी किस्तें भी पूरी नहीं हुई थीं। इसी प्रकार ज्ञानदेवी पत्नी वीरेंद्र ने लगभग डेढ़ वर्ष पहले अपनी बचत से 75 हजार रुपये में भैंस खरीदी थी। इन पशुओं की अचानक मौत से इन परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है, क्योंकि दूध उत्पादन ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन था।

रहस्यमय बीमारी की आशंका से गांव में दहशत

एक ही दिन में तीन पशुओं की मौत से गांव के अन्य पशुपालक भी चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह कोई संक्रामक बीमारी है तो बाकी पशुओं के लिए भी खतरा बढ़ सकता है। पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कई बार संक्रमण, खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियां या अन्य पशु रोग अचानक पशुओं की मौत का कारण बन सकते हैं, इसलिए समय पर जांच और टीकाकरण बेहद जरूरी होता है।

पशु चिकित्सा विभाग से जांच की मांग

घटना के बाद ग्रामीणों ने पशु चिकित्सा विभाग से तत्काल गांव में टीम भेजने की मांग की है, ताकि मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कर बीमारी के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि गांव में अन्य पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक टीकाकरण कराया जाए, जिससे संभावित संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

मुआवजे की मांग और प्रशासन से उम्मीद

पीड़ित पशुपालकों ने शासन-प्रशासन से आर्थिक सहायता और मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि भैंसें ही उनकी आय का मुख्य साधन थीं और उनकी अचानक मौत से परिवार पर आर्थिक संकट आ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन यदि जल्द जांच कर आवश्यक कदम उठाए तो गांव के अन्य पशुओं को बचाया जा सकता है।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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