ईरान-इजरायल युद्ध: ‘अब बातचीत का समय खत्म!’ डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान की सुलह की कोशिशों पर जड़ा ताला, क्या महायुद्ध की ओर बढ़ रही है दुनिया
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संवाद 24 नई दिल्ली । पश्चिम एशिया के धधकते मैदानों से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि ईरान अब बातचीत के लिए बहुत देर कर चुका है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपने चिर-परिचित अंदाज में प्रहार करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान की वायुसेना, नौसेना और उसका शीर्ष नेतृत्व अब लगभग खत्म हो चुका है, और ऐसे में बातचीत का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
“देर हो चुकी है”: ट्रंप का कड़ा संदेश
हालिया घटनाक्रमों ने मध्य पूर्व में जारी तनाव को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों ने ईरान के सैन्य ढांचे को भारी चोट पहुंचाई है। ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि ईरान की रक्षा प्रणालियाँ (Air Defense) ध्वस्त हो चुकी हैं और उनका नेतृत्व बिखर गया है। उन्होंने लिखा, “वे अब बात करना चाहते हैं, लेकिन मैंने कह दिया है—बहुत देर हो चुकी है (Too Late!)।” यह बयान उस समय आया है जब खबरें थीं कि ईरान का नया नेतृत्व पर्दे के पीछे से अमेरिका के साथ संपर्क साधने और युद्ध विराम की राह तलाशने की कोशिश कर रहा था। लेकिन ट्रंप के इस सख्त रुख ने कूटनीति के सभी दरवाजों पर फिलहाल ताला लगा दिया है।
मलबे में तब्दील होते सैन्य ठिकाने
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 48 घंटों में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के भीतर 1250 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया है। इन हमलों में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर्स और उनके महत्वपूर्ण नौसैनिक जहाजों को तबाह कर दिया गया है। राजधानी तेहरान से आ रही खबरें दिल दहला देने वाली हैं। इजरायली वायुसेना ने ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के मुख्यालयों पर भी बमबारी की है। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में न केवल सैन्य ठिकाने बल्कि ईरान का राजनीतिक रसूख भी मलबे में तब्दील होता नजर आ रहा है। हमलों की भीषणता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल चार दिनों के भीतर मरने वालों का आंकड़ा सैकड़ों में पहुंच गया है, जिनमें बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारी शामिल हैं।
क्या है ट्रंप का ‘मिशन ईरान’?
व्हाइट हाउस से जारी संकेतों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के इस सैन्य अभियान के चार मुख्य उद्देश्य हैं:
ईरान की मिसाइल क्षमता को पूरी तरह नष्ट करना।
ईरानी नौसेना का अस्तित्व मिटा देना ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापार सुरक्षित रहे।
ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से हर हाल में रोकना।
क्षेत्र में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों (Proxies) की कमर तोड़ना।
हालांकि ट्रंप ने ‘सत्ता परिवर्तन’ (Regime Change) को आधिकारिक लक्ष्य नहीं बताया है, लेकिन उन्होंने ईरानी जनता से आह्वान किया है कि यह उनके लिए अपना देश वापस पाने का सबसे बड़ा अवसर है।
दुनिया पर संकट के बादल
इस युद्ध का असर अब केवल सीमा तक सीमित नहीं रहा है। वैश्विक तेल बाजारों में उथल-पुथल शुरू हो गई है। खाड़ी देशों के हवाई अड्डे, जो वैश्विक विमानन के केंद्र हैं, मिसाइल हमलों के डर से बंद किए जा रहे हैं। अमेरिका ने अपने नागरिकों को पूरे पश्चिम एशिया से निकलने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह “टू लेट” (Too Late) वाला बयान ईरान को पूरी तरह आत्मसमर्पण करने पर मजबूर करने की एक रणनीति हो सकती है।






