तेहरान में तबाही की तस्वीरें, अमेरिकी हमले से IRGC हेडक्वार्टर खाक

Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। अमेरिका के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक बड़े सैन्य हमले में ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुख्यालय को नष्ट करने की पुष्टि की है। CENTCOM के बयान में कहा गया है कि यह हमला उस संगठन की क्षमताओं को कमजोर करने के लिए किया गया, जिसे उसने पिछले लगभग 47 वर्षों में 1,000 से अधिक अमेरिकियों की मौत का जिम्मेदार बताया है। CENTCOM ने इस कार्रवाई को “सांप का सिर काट देना” कहा, इसका तात्पर्य यह था कि IRGC की कलेजे जैसी कमान क्षमता को लक्ष्य बनाया गया। यह हमला अमेरिका की ओर से मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच किया गया, जिसमें संयुक्त राज्य और इज़रायल दोनों ने ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ाया है। CENTCOM ने कहा कि अब IRGC के पास कोई स्पष्ट मुख्यालय नहीं बचा है, और अमेरिका के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य क्षमता है।

हमले का व्यापक सैन्य संदर्भ – अमेरिका और इज़राइल का संयुक्त अभियान
यह हमला अकेला घटना नहीं है, बल्कि एक बड़े सैन्य अभियान का हिस्सा माना जाता है जिसमें अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के कई सैन्य और कमांड केंद्रों पर निशाना साधा है। इज़रायली सेना ने भी दर्जनों कमान केंद्रों, खुफिया केंद्रों, वायु सेना कमान केंद्र और आंतरिक सुरक्षा मुख्यालय समेत कई स्थानों पर हमले किए हैं, जिससे ईरान की कमान और नियंत्रण क्षमताओं पर बड़ा झटका लगा है।
इन हमलों के वीडियो फुटेज और तस्वीरें भी अमेरिकी सेंट्रल कमांड के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की गयी हैं, जिनमें मिसाइलों, ड्रोन हमलों और वायु बल द्वारा किए गए सटीक हमलों के दृश्यों को देखा जा सकता है।

‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ – क्या है पूरा अभियान?
सेंट्रल कमांड के अधिकारियों ने इस सैन्य अभियान को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया है, जिसका उद्देश्य ईरान की सैन्य और सुरक्षा संरचना को कमजोर करना बताया गया है। CENTCOM कमांडर ने अपने बयान में यह भी उल्लेख किया कि अमेरिकी सैनिकों, नौसेना और अन्य बलों ने स्पष्ट आदेश के तहत इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। सेंट्रल कमांड ने यह भी दावा किया है कि ईरान ने पिछले दशकों में अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों को बार-बार निशाना बनाया, जिसके जवाब में यह ‘निर्णायक कार्रवाई’ की गयी है। हालांकि, तहरीर में यह भी कहा गया कि अमेरिका ने यह लड़ाई शुरू नहीं की है, लेकिन अब उसे समाप्त करने की ठानी है।

ईरान की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय तनाव
ईरान सरकार और स्थानीय मीडिया ने इस हमले को प्रतिक्रिया में जवाबी कार्रवाई बताया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमले के जरिए प्रतिक्रिया जताई है, जो कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लक्षित कर रहा है। कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है और क्षेत्र में तनाव की आशंका बढ़ गयी है। इस सैन्य तनाव के बीच वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें भी अस्थिर हुई हैं और कई देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एकआपसी बातचीत और तनाव कम करने की अपील की है।

रणनीतिक और राजनीतिक मायने
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सैन्य अभियान सिर्फ एक निरोधात्मक हमला नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और वैश्विक रणनीति का एक बड़ा हिस्सा है। अमेरिका और उसके सहयोगियों ने इसे ईरान की सैन्य संरचना को तोड़ने का प्रयास बताया है, जबकि ईरान इसे विदेशी आक्रमण के रूप में पेश कर रहा है। यह तनाव पहले से बनी राजनीतिक और सैन्य खाई को और बढ़ा सकता है, जिससे मध्य पूर्व में बेहद गंभीर सुरक्षा चुनौतियाँ पैदा हो सकती हैं। वैश्विक स्तर पर कई देश तनाव की जल्द समाप्ति और कूटनीतिक समाधान की वकालत कर रहे हैं।

क्या यह आगे बढ़ेगा या कूटनीति में बदलेगा?
हालिया घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच टकराव अभी समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि यह एक व्यापक संघर्ष की दिशा में बढ़ रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष कूटनीतिक बातचीत के रास्ते को अपनाते हैं तो यह संकट दब सकता है, लेकिन अभी तक दोनों पक्षों ने स्थायी समाधान की ओर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News