निचले क्रम का धमाका, 7वें विकेट से बरसी रन की आंधी, 84 रन की साझेदारी ने टी20 वर्ल्ड कप में मचा दी सनसनी
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संवाद 24 डेस्क। टी20 विश्व कप जैसे बड़े मंच पर अक्सर चमकते सितारे टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज होते हैं, लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग रही। जब टीम मुश्किल में फंसी हुई थी और विकेट लगातार गिर रहे थे, तब निचले क्रम के दो खिलाड़ियों ने ऐसा कमाल कर दिखाया, जिसने पूरे स्टेडियम को हैरान कर दिया। सातवें विकेट के लिए हुई 84 रन की साझेदारी ने न सिर्फ मैच का रुख बदला, बल्कि रिकॉर्ड बुक में भी नया इतिहास दर्ज कर दिया।
शुरुआती झटकों से डगमगाई पारी
मुकाबले की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। टीम के प्रमुख बल्लेबाज जल्दी-जल्दी पवेलियन लौट गए। पावरप्ले में ही कई अहम विकेट गिरने से रन गति पर ब्रेक लग गया। विरोधी गेंदबाजों की धारदार गेंदबाजी के सामने बल्लेबाज खुलकर शॉट नहीं खेल पा रहे थे। स्कोरबोर्ड पर दबाव साफ झलक रहा था और ऐसा लग रहा था कि टीम सम्मानजनक स्कोर तक भी नहीं पहुंच पाएगी।
जब उम्मीदें हुईं धुंधली, तब आए दो जांबाज़
ऐसे नाजुक मोड़ पर क्रीज पर थे Cole McConchie और उनके साथ थे अनुभवी ऑलराउंडर Mitchell Santner। दोनों ने शुरुआत में बेहद संयम दिखाया। तेज गेंदबाजों की उछाल और स्पिनरों की चालाकी को समझते हुए पहले पारी को संभाला। धीरे-धीरे दोनों ने स्ट्राइक रोटेट करनी शुरू की और जब लय मिल गई, तो बड़े शॉट्स भी निकलने लगे। दर्शकों को अंदाजा ही नहीं था कि वे इतिहास बनने का गवाह बन रहे हैं।
84 रन की साझेदारी, नया इतिहास
सातवें विकेट के लिए 84 रन की साझेदारी ने टी20 वर्ल्ड कप में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया। इससे पहले सातवें या उससे नीचे के विकेट के लिए इतनी बड़ी साझेदारी देखने को नहीं मिली थी। यह उपलब्धि इस बात का सबूत है कि क्रिकेट में आखिरी क्रम के बल्लेबाज भी मैच का नक्शा बदल सकते हैं।
रणनीति, संयम और आक्रामकता का मिश्रण
इस साझेदारी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि दोनों बल्लेबाजों ने परिस्थिति के अनुसार खेला। शुरुआत में सिंगल-डबल लेकर दबाव कम किया गया। जैसे-जैसे आत्मविश्वास बढ़ा, चौकों-छक्कों की बरसात शुरू हो गई।सैंटनर ने अपने अनुभव से पारी को दिशा दी, जबकि मैककॉनची ने आक्रामक अंदाज में रन गति को तेज किया। दोनों के बीच तालमेल इतना सटीक था कि मैदान पर ऊर्जा साफ महसूस की जा सकती थी।
विपक्षी गेंदबाजों की टूटी लय
जो गेंदबाज शुरुआती ओवरों में हावी थे, वे इस साझेदारी के आगे बेबस नजर आए। फील्डिंग में बदलाव, गेंदबाजी में विविधता और रणनीतिक कोशिशों के बावजूद विकेट नहीं मिल पाया। इस दौरान विपक्षी टीम पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बढ़ता गया।
ड्रेसिंग रूम में लौटी जान
जब यह साझेदारी आगे बढ़ती गई, तो ड्रेसिंग रूम में भी नई ऊर्जा देखने को मिली। कोचिंग स्टाफ और साथी खिलाड़ी हर रन पर तालियां बजाते नजर आए। यह सिर्फ रन जोड़ने की कहानी नहीं थी, बल्कि आत्मविश्वास वापस लाने की कहानी थी।
मैच का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई साझेदारी
84 रन की यह साझेदारी मैच का असली टर्निंग प्वाइंट बन गई। जहां एक समय टीम संघर्ष करती दिख रही थी, वहीं अंत तक स्कोर चुनौतीपूर्ण बन चुका था। विपक्षी टीम को लक्ष्य का पीछा करते समय अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ा।
क्रिकेट का असली रोमांच
यह मुकाबला एक बार फिर साबित करता है कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है। यहां आखिरी गेंद तक कुछ भी संभव है। निचले क्रम के बल्लेबाजों ने दिखा दिया कि जज्बा और धैर्य हो तो हालात कैसे भी हों, बाजी पलटी जा सकती है। इस ऐतिहासिक साझेदारी ने न सिर्फ टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया, बल्कि टी20 वर्ल्ड कप के रोमांच में भी एक यादगार अध्याय जोड़ दिया।






