BAFTA मंच पर नस्लीय शब्द से तूफान, अवॉर्ड नाइट बनी विवाद की रात

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संवाद 24 लंदन। दुनिया के प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में शुमार British Academy of Film and Television Arts (BAFTA) के भव्य मंच पर उस वक्त माहौल असहज हो गया, जब समारोह के दौरान एक नस्लीय अपशब्द सुनाई दिया। कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों और लाइव प्रसारण देख रहे लाखों लोगों के लिए यह क्षण चौंकाने वाला था। यह घटना तब हुई जब फिल्म Sinners के कलाकार Michael B. Jordan और Delroy Lindo मंच पर पुरस्कार प्रस्तुत कर रहे थे।

मंच पर पेशेवर अंदाज़, अंदर उठते सवाल
घटना के तुरंत बाद दोनों कलाकारों ने बेहद संयम और पेशेवर रवैये के साथ कार्यक्रम जारी रखा। हालांकि मंच पर उनकी शालीनता ने स्थिति को संभाल लिया, लेकिन दर्शकों के मन में कई सवाल उठ खड़े हुए। सोशल मीडिया पर वीडियो क्लिप्स तेजी से वायरल होने लगे और बहस छिड़ गई कि आखिर ऐसी स्थिति से निपटने के लिए आयोजकों ने पहले से क्या तैयारी की थी।

मेडिकल कंडीशन या असंवेदनशीलता?
बाद में स्पष्ट किया गया कि दर्शक दीर्घा में मौजूद एक व्यक्ति टॉरेट सिंड्रोम से पीड़ित था, जिसके कारण अनैच्छिक रूप से वह शब्द निकल गया। टॉरेट सिंड्रोम एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को अनियंत्रित वोकल या मोटर टिक हो सकते हैं। हालांकि, इस स्पष्टीकरण के बावजूद यह बहस जारी रही कि लाइव प्रसारण में ऐसे संवेदनशील क्षणों को संभालने के लिए पर्याप्त सावधानी क्यों नहीं बरती गई।

BAFTA की बिना शर्त माफी
विवाद बढ़ने के बाद BAFTA ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए पूरी जिम्मेदारी स्वीकार की और मंच पर मौजूद कलाकारों से बिना शर्त माफी मांगी। संस्था ने कहा कि इस घटना से जुड़े शब्द का ऐतिहासिक और भावनात्मक दर्द समझा जाता है, और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए प्रसारण प्रोटोकॉल की समीक्षा की जाएगी।आयोजकों ने विशेष रूप से माइकल बी. जॉर्डन और डेलरॉय लिंडो के पेशेवर व्यवहार की सराहना भी की।

प्रसारण पर उठे सवाल
लाइव टेलीकास्ट के दौरान उस शब्द को न तो तुरंत म्यूट किया गया और न ही प्रसारण से हटाया गया, जिससे दर्शकों की नाराजगी और बढ़ गई। बाद में डिजिटल प्लेटफॉर्म से उस हिस्से को संपादित किया गया। मीडिया जगत में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या बड़े अवॉर्ड शो में देरी (delay) तकनीक और कंटेंट मॉनिटरिंग को और सख्त करने की जरूरत है।

इस्तीफे से और बढ़ा विवाद
घटना के बाद BAFTA से जुड़े एक वरिष्ठ सदस्य ने संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इस्तीफा दे दिया। उनका कहना था कि संवेदनशील मुद्दों पर संस्थागत प्रतिक्रिया और भी सशक्त होनी चाहिए थी। इस इस्तीफे ने पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया और यह मुद्दा सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संस्थागत जवाबदेही की बहस में बदल गया।

Sinners की चमक पर पड़ा साया
विडंबना यह रही कि जिस फिल्म Sinners के लिए यह सितारे मंच पर मौजूद थे, वह समारोह में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर रही थी। अश्वेत संस्कृति और संगीत की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म चर्चा के केंद्र में थी। लेकिन इस अप्रत्याशित घटना ने फिल्म की उपलब्धियों से ज्यादा विवाद को सुर्खियों में ला दिया।

सोशल मीडिया पर बंटी राय
घटना के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा नजर आया। एक वर्ग ने इसे नस्लीय संवेदनशीलता का गंभीर मामला बताया, जबकि दूसरा वर्ग इसे एक मेडिकल स्थिति का अनियंत्रित परिणाम मानता रहा। बहस सिर्फ एक शब्द तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह चर्चा में बदल गई कि आधुनिक समाज में संवेदनशीलता और समझदारी का संतुलन कैसे बनाया जाए।

आगे की राह क्या?
BAFTA ने संकेत दिया है कि भविष्य में लाइव प्रसारण के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा उपाय और तकनीकी सतर्कता अपनाई जाएगी। यह घटना अवॉर्ड समारोहों के इतिहास में एक अहम सीख बन सकती है, कि भव्य मंच पर हर क्षण सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी होता है। इस विवाद ने एक बार फिर याद दिलाया कि शब्दों की ताकत कितनी गहरी होती है, और एक पल की चूक भी वैश्विक बहस को जन्म दे सकती है।

Manvendra Somvanshi
Manvendra Somvanshi

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