केरल में अब ‘नेटिविटी कार्ड’ बनेगा नागरिकता की ढाल! विधानसभा में बिल पेश, क्या यह केंद्र के CAA को देगा सीधी टक्कर?
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संवाद 24 केरल। पिनाराई विजयन सरकार ने राज्य के नागरिकों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सोमवार को केरल विधानसभा में ‘केरल नेटिविटी कार्ड बिल, 2026’ पेश किया गया, जो अब राज्य में निवास और जन्म के प्रमाण को एक नई कानूनी पहचान प्रदान करेगा। यह कार्ड न केवल सरकारी सेवाओं के लिए एक आधिकारिक दस्तावेज होगा, बल्कि इसे केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता की जांच को लेकर पैदा हुई चिंताओं के जवाब के रूप में भी देखा जा रहा है।
क्या है ‘नेटिविटी कार्ड’ और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
वर्तमान में केरल में रहने वाले लोगों को अपनी मूल पहचान साबित करने के लिए बार-बार ‘नेटिविटी सर्टिफिकेट’ (मूल निवास प्रमाण पत्र) बनवाना पड़ता था, जिसकी कोई स्थायी कानूनी वैधता नहीं थी। नई व्यवस्था के तहत, सरकार अब फोटोयुक्त एक स्थायी ‘नेटिविटी कार्ड’ जारी करेगी। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के अनुसार, यह कार्ड इस बात का पुख्ता कानूनी सबूत होगा कि संबंधित व्यक्ति केरल का मूल निवासी है। सरकार ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता सत्यापन की प्रक्रियाओं (जैसे CAA और NRC) को सख्त किए जाने के बीच, राज्य के लोगों को अपनी पहचान साबित करने के लिए किसी भी संभावित संकट से बचाना इस बिल का मुख्य उद्देश्य है।
कौन होगा ‘नेटिविटी कार्ड’ का हकदार?
इस बिल के तहत ‘नेटिविटी’ (मूल निवासी) की परिभाषा को काफी व्यापक रखा गया है:
केरल में जन्मे लोग: कोई भी व्यक्ति जो केरल में पैदा हुआ है और जिसने किसी दूसरे देश की नागरिकता नहीं ली है।
पूर्वजों का आधार: यदि किसी व्यक्ति के माता-पिता या पूर्वज केरल में पैदा हुए थे, तो वह भी इस कार्ड का पात्र होगा।
प्रवासी केरलवासी (दुआस्पोरा): वे लोग जो काम के सिलसिले में राज्य से बाहर या विदेश में रहे और उनके बच्चे बाहर पैदा हुए, उन्हें भी ‘नेटिव’ माना जाएगा, बशर्ते उन्होंने भारतीय नागरिकता न छोड़ी हो।
सख्त कानून: गलत जानकारी दी तो होगी जेल
इस बिल में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति कार्ड बनवाने के लिए गलत जानकारी देता है या तथ्यों को छुपाता है, तो उसे 3 महीने तक की कैद, 5000 रुपये का जुर्माना या दोनों भुगतने पड़ सकते हैं। कार्ड जारी करने की जिम्मेदारी तहसीलदार की होगी और इसका स्थायी रिकॉर्ड विलेज ऑफिस (गांव स्तर) पर रखा जाएगा।
राजनीतिक घमासान और कानूनी चुनौतियां
जहाँ सत्ताधारी गठबंधन इसे नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं विपक्षी दल विशेषकर भाजपा ने इसे “अनावश्यक” करार दिया है। आलोचकों का तर्क है कि नागरिकता केंद्र का विषय है और राज्य सरकार इस तरह का कार्ड जारी कर संघीय ढांचे में हस्तक्षेप कर रही है। हालांकि, केरल सरकार का कहना है कि यह केवल राज्य स्तरीय सेवाओं, राशन कार्ड, चिकित्सा लाभ और सामाजिक सुरक्षा के लिए एक प्रशासनिक दस्तावेज है। केरल सरकार का यह फैसला आने वाले समय में केंद्र और राज्य के बीच एक नई कानूनी और राजनीतिक बहस छेड़ सकता है। 12 मार्च से शुरू होने वाले इस कार्ड की प्रक्रिया केरल के लाखों लोगों के लिए पहचान का एक स्थायी आधार बनेगी, लेकिन इसकी संवैधानिक वैधता पर अदालतों की नजर भी बनी रहेगी।






