नेपाल में चीख-पुकार: अनियंत्रित होकर उफनती नदी में गिरी यात्री बस, 18 की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
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संवाद 24 नई दिल्ली । हिमालयी देश नेपाल से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है। नेपाल के मध्य पहाड़ी क्षेत्र में यात्रियों से भरी एक बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई को पार करते हुए उफनती नदी में जा गिरी। इस भीषण सड़क हादसे में अब तक 18 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घटनास्थल पर मची चीख-पुकार और बहती नदी की लहरों के बीच नेपाली सेना और पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर जारी है।
कैसे हुआ यह भीषण हादसा?
स्थानीय प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, यह बस यात्रियों को लेकर जा रही थी, तभी एक तीखे मोड़ पर चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया। पहाड़ी रास्ता होने और सुरक्षा घेरे (बैरिकेड्स) के कमजोर होने की वजह से बस सीधे नदी में समा गई। चश्मदीदों का कहना है कि हादसा इतना भयानक था कि बस के नदी में गिरते ही तेज आवाज हुई और लोग मदद के लिए चिल्लाने लगे। स्थानीय ग्रामीण सबसे पहले मौके पर पहुंचे और पुलिस के आने से पहले बचाव कार्य शुरू किया।
मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका
अब तक 18 शवों को नदी और मलबे से बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि, अस्पताल में भर्ती कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है, जिससे मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लापता यात्रियों की तलाश के लिए गोताखोरों की टीम को भी तैनात किया गया है, क्योंकि नदी का बहाव तेज होने के कारण कुछ यात्रियों के बह जाने का डर है।
नेपाल में क्यों बढ़ रहे हैं सड़क हादसे?
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में सड़क हादसे एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हैं:
खराब सड़कें: मानसून और भूस्खलन के कारण सड़कें अक्सर जर्जर हो जाती हैं।
ओवरलोडिंग: यात्री बसों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जाना आम बात है।
पुरानी गाड़ियां: फिटनेस टेस्ट के बिना लंबी दूरी पर चलाई जा रही पुरानी बसें हादसों का बड़ा कारण हैं।
कठिन भूगोल: संकरे और घुमावदार रास्तों पर जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित होती है।
नेपाल सरकार ने दिए जांच के आदेश
इस दुखद घटना पर नेपाल सरकार ने गहरा शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को सहायता राशि देने की घोषणा की है। साथ ही, हादसे के कारणों की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। काठमांडू और आसपास के अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि घायलों को बेहतर इलाज मिल सके।






