डूरंड रेखा पर बारूद की गंध: पाकिस्तान का अफगानिस्तान में ‘एयर स्ट्राइक’ वाला बड़ा प्रहार, क्या अब शुरू होगा भीषण युद्ध?
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संवाद 24 नई दिल्ली। दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब रविवार तड़के पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने सीमा पार कर अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांतों—पक्तिका और नंगरहार—में भीषण बमबारी की। इस हमले में पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में स्थित एक मदरसे (धार्मिक शिक्षण संस्थान) को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया है, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में कोहराम मचा हुआ है।
रात के अंधेरे में आसमान से बरसीं मिसाइलें
स्थानीय सूत्रों और अफगान मीडिया आउटलेट ‘टोलो न्यूज’ के मुताबिक, पाकिस्तानी जेट विमानों ने रविवार तड़के पक्तिका के बरमल और उरगुन जिलों के साथ-साथ नंगरहार के खोगयानी, बेहसूद और गनी खेल जिलों में ‘इंटेलिजेंस-बेस्ड’ ऑपरेशन को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि बरमल जिले में स्थित ‘बानुसी मदरसे’ पर विमानों से कई मिसाइलें दागी गईं। हमले के वक्त मदरसे और आसपास के रिहायशी इलाकों में लोग गहरी नींद में थे। शुरुआती रिपोर्टों में जान-माल के भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है, हालांकि तालिबान प्रशासन ने अभी तक हताहतों का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है।
पाकिस्तान की दलील: ‘इस्लामाबाद धमाकों का प्रतिशोध’
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और सूचना मंत्रालय ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे ‘प्रतिशोधात्मक कार्रवाई’ करार दिया है। पाकिस्तान का दावा है कि उसने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), जिसे वह ‘फिटना अल-ख्वारिज’ कहता है, और आईएसकेपी (ISKP) के सात ठिकानों को सटीकता के साथ निशाना बनाया है। पाकिस्तान का आरोप है कि इस महीने की शुरुआत में इस्लामाबाद की एक शिया मस्जिद में हुए आत्मघाती हमले, जिसमें 32 निर्दोष लोगों की जान गई थी, की साजिश अफगानिस्तान की धरती पर रची गई थी। पाकिस्तान का दावा है कि उसके पास ठोस सबूत हैं कि अफगानिस्तान में छिपे आतंकी कमांडर पाकिस्तान के अंदर अशांति फैला रहे हैं। पाकिस्तानी रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला तालिबान को एक कड़ा संदेश है कि यदि वे अपनी जमीन पर आतंकियों को पनाह देना बंद नहीं करते, तो पाकिस्तान अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा।
दोहा समझौते का उल्लंघन और तालिबान का आक्रोश
इस हमले के बाद अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के भीतर भारी उबाल है। अफगान सूत्रों का कहना है कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय नियमों और ‘दोहा समझौते’ का सीधा उल्लंघन है। तालिबान पहले भी कई बार कह चुका है कि वह किसी भी आतंकी गुट को अपनी जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों के खिलाफ नहीं करने देगा, लेकिन पाकिस्तान इन आश्वासनों को मानने को तैयार नहीं है। पक्तिका और नंगरहार के नागरिकों में इस हमले को लेकर भारी रोष है, क्योंकि उनका दावा है कि हवाई हमले में आतंकियों के बजाय आम नागरिकों और छात्रों को निशाना बनाया गया है।
बढ़ता तनाव और युद्ध की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हवाई हमला दोनों देशों के बीच संबंधों में अंतिम कील साबित हो सकता है। पिछले कुछ महीनों में डूरंड रेखा पर कई बार गोलीबारी हुई है, लेकिन लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। अगर तालिबान की ओर से जवाबी कार्रवाई होती है, तो यह संघर्ष एक पूर्ण युद्ध का रूप ले सकता है, जिससे न केवल ये दोनों देश, बल्कि पूरा दक्षिण एशिया अस्थिर हो सकता है।






