बुलेट ट्रेन का महाजाल: दिल्ली-मुंबई ही नहीं, अब इन 7 नए रूटों पर 350 की रफ्तार से दौड़ेगी ‘सपनों की रेल’! जानें आपके शहर का नंबर कब?
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत की परिवहन व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। रेल मंत्रालय और नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने देश के अलग-अलग हिस्सों को बुलेट ट्रेन की रफ्तार से जोड़ने के लिए एक महत्वाकांक्षी खाका तैयार किया है। अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के बाद अब सरकार ने सात नए हाई-स्पीड रेल (HSR) कॉरिडोर पर अपनी नजरें टिका दी हैं। यह केवल एक ट्रेन प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि भारत के आर्थिक भूगोल को बदलने की एक बड़ी तैयारी है।
7 नए कॉरिडोर: दिल्ली से वाराणसी तक का सफर होगा चुटकियों में
प्रस्तावित सात नए रूटों में उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत के प्रमुख महानगरों को शामिल किया गया है। इनमें सबसे चर्चित रूट दिल्ली-वाराणसी (करीब 865 किमी) और दिल्ली-अहमदाबाद (886 किमी) हैं। इसके अलावा, मुंबई-नागपुर (753 किमी), मुंबई-हैदराबाद (711 किमी), चेन्नई-मैसूर (435 किमी), दिल्ली-अमृतसर (459 किमी) और वाराणसी-हावड़ा (760 किमी) कॉरिडोर पर भी काम की योजना है। इन रूटों के तैयार होने के बाद, जो सफर अभी 12 से 15 घंटे का समय लेता है, वह महज 3 से 4 घंटे में सिमट जाएगा।
क्या आपके शहर के पास से गुजरेगी बुलेट ट्रेन?
इन सात कॉरिडोर की खास बात यह है कि ये केवल बड़े शहरों को ही नहीं, बल्कि बीच में पड़ने वाले महत्वपूर्ण औद्योगिक और धार्मिक केंद्रों को भी जोड़ेंगे। उदाहरण के लिए, दिल्ली-वाराणसी रूट अयोध्या, लखनऊ और मथुरा जैसे शहरों को कवर कर सकता है। वहीं, मुंबई-नागपुर रूट महाराष्ट्र के पिछड़े इलाकों में विकास की नई गंगा बहा सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि इन ट्रेनों के स्टेशन शहर के मुख्य केंद्रों या भविष्य के ग्रोथ हब के पास बनाए जाएं, जिससे यात्रियों को कनेक्टिविटी में कोई परेशानी न हो।
हवाई जहाज जैसी सुविधाएं और रफ्तार का रोमांच
बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 350 किमी प्रति घंटा प्रस्तावित है, जबकि इसकी परिचालन गति (Operating Speed) 320 किमी प्रति घंटा होगी। इन ट्रेनों के डिब्बे पूरी तरह से अत्याधुनिक होंगे, जिनमें हवाई जहाज की तरह ‘एरोडायनामिक’ डिजाइन, रोटेटिंग सीटें, बायो-टॉयलेट और विशेष सेंसर लगे होंगे ताकि भूकंप या किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में ट्रेन अपने आप सुरक्षित रुक सके। रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट न केवल समय बचाएगा, बल्कि प्रदूषण कम करने और सड़क पर बढ़ते यातायात के दबाव को घटाने में भी मददगार साबित होगा।
चुनौतियां और भविष्य की राह
इतने बड़े स्तर पर हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition), भारी निवेश और तकनीकी बारीकियों पर ध्यान देना होगा। दिल्ली-अहमदाबाद और दिल्ली-वाराणसी जैसे रूटों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। सरकार का इरादा है कि अगले कुछ वर्षों में भारतीय रेलवे का पूरी तरह से कायाकल्प कर दिया जाए, ताकि विकसित भारत का सपना हकीकत बन सके।






