आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ‘महाकुंभ’: क्या रोबोट छीन लेंगे इंसान की जगह? पीएम मोदी ने दुनिया को दिखाया ‘डिजिटल इंडिया’ का नया चेहरा

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संवाद 24 नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली का भारत मंडपम आज एक ऐसे ऐतिहासिक पल का गवाह बना, जो आने वाले दशकों में मानवता की दिशा तय करने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ (India AI Impact Summit 2026) का भव्य उद्घाटन किया। यह केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि तकनीक के उस महाकुंभ की शुरुआत है जहाँ दुनिया भर के दिग्गज यह तय करने जुटे हैं कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंसान का सबसे बड़ा मददगार बनेगा या उसकी जगह ले लेगा।

ग्लोबल साउथ की आवाज बना भारत
यह पहली बार है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर इतना बड़ा वैश्विक शिखर सम्मेलन ‘ग्लोबल साउथ’ के किसी देश में आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में साफ कर दिया कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि दुनिया को रास्ता दिखाने वाला नेतृत्वकर्ता बन चुका है। उन्होंने कहा, “एआई केवल डेटा और एल्गोरिदम का खेल नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाने का एक सशक्त माध्यम है।”

20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 500 एआई दिग्गजों का जमावड़ा
इस समिट की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस जैसे दिग्गज शामिल हुए। समिट में दुनिया भर के 20 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्षों और 500 से अधिक एआई लीडर्स ने शिरकत की। ओपनएआई (OpenAI) के सीईओ सैम ऑल्टमैन और गूगल के सुंदर पिचाई की मौजूदगी ने इस इवेंट को तकनीकी दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया है।

‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ का मूल मंत्र
प्रधानमंत्री ने इस शिखर सम्मेलन के लिए ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ का विजन दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य एआई को केवल अमीरों या खास वर्ग तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि इसे समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है। पीएम ने विश्वास जताया कि एआई के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे।

क्या एआई से खत्म हो जाएंगे रोजगार? पीएम ने दिया जवाब
समिट के दौरान जब एआई के कारण नौकरियों के खतरे पर चर्चा हुई, तो पीएम मोदी ने युवाओं को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि “तैयारी ही डर की सबसे बड़ी दवा है।” सरकार कौशल विकास और री-स्किलिंग (Re-skilling) पर भारी निवेश कर रही है ताकि हमारे युवा एआई के दौर में पिछड़ें नहीं, बल्कि उसे लीड करें। भारत एआई मिशन के तहत 10,372 करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है, जो देश में कंप्यूटिंग पावर और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा।

भारत मंडपम में एआई एक्सपो का आकर्षण
समिट के साथ-साथ आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट एक्सपो’ में 600 से ज्यादा स्टार्टअप्स ने अपनी तकनीक का प्रदर्शन किया। पीएम मोदी ने रिलायंस जियो के ‘जियो संस्कृति एआई’ और ‘जियो आरोग्य एआई’ जैसे मॉडल्स का अवलोकन किया। 70,000 वर्ग मीटर में फैले इस एक्सपो में 13 देशों के पैवेलियन लगाए गए हैं, जहाँ लोग देख सकते हैं कि कैसे एआई भविष्य के घरों, अस्पतालों और स्कूलों को बदलने वाला है।

सुरक्षा और नैतिकता पर जोर
पीएम मोदी ने एआई के गलत इस्तेमाल और इसके पूर्वाग्रहों (Bias) पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एआई सिस्टम में लैंगिक, भाषाई या सामाजिक भेदभाव नहीं होना चाहिए। दुनिया को एक साथ मिलकर ‘ग्लोबल एआई गवर्नेंस’ का ढांचा तैयार करना होगा ताकि यह तकनीक मानवता के विनाश का कारण न बने। यह पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन 21 फरवरी तक चलेगा, जिसमें 500 से अधिक सत्रों के माध्यम से भविष्य की रूपरेखा तैयार की जाएगी। भारत ने इस आयोजन के जरिए स्पष्ट संदेश दे दिया है कि ‘विकसित भारत 2047’ का सपना तकनीक और मानवीय मूल्यों के संगम से ही पूरा होगा।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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