भारत-फ्रांस ने मिलकर शुरू किया H125 हेलिकॉप्टर उत्पादन — 2026 में रक्षा-एयरोस्पेस साझेदारी को नई उड़ान
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संवाद 24 मुंबई। भारत और फ्रांस के बीच रक्षा और तकनीकी सहयोग एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कर्नाटक के वेमगल (कोलार) में H125 हेलिकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन की शुरुआत की — एक ऐसा कदम जो दोनों देशों की साझेदारी को नहीं केवल मजबूत करेगा, बल्कि दोनों की रक्षा-उद्योग क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा। यह आयोजन फ्रांसीसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान हुआ, जहां दोनों नेताओं ने भारत-फ्रांस रिश्तों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर अपग्रेड किया और कई अहम डील्स पर हस्ताक्षर किए।
‘मेक इन इंडिया’ के तहत ऐतिहासिक कदम
भारतीय उद्योग समूह टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और फ्रांसीसी विमान निर्माता एयरबस हेलिकॉप्टर्स की साझेदारी से H125 हेलिकॉप्टरों की असेंबली लाइन तैयार की गई है। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि इससे अब भारत में हल्के हेलिकॉप्टरों का उत्पादन अपने दम पर संभव होगा, जो पहले पूरी तरह से विदेशों पर निर्भर था। प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन के बाद कहा कि यह पहल भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता के एजेंडे का “एक उज्जवल उदाहरण” है। वेमगल में स्थापित यह असेंबली लाइन ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में एक मील का पत्थर है, जिससे स्थानीय विनिर्माण को नई गति और रोजगार को मजबूती मिलेगी।
H125 हेलिकॉप्टर — एक वैश्विक क्षमता
H125 एक लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर है, जो न केवल सैन्य उपयोग के लिए बल्कि नागरिक सेवाओं जैसे कि एयर एम्बुलेंस, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी और मौजूदा जरूरतों को पूरा करने में भी सक्षम है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस परियोजना को “दोनों देशों की तकनीकी और रक्षा क्षमताओं का सम्मिलित परिणाम” बताया और कहा कि भारत और फ्रांस अब ऐसे हेलिकॉप्टर बनाएंगे, जो माउंट एवरेस्ट जैसी ऊँचाइयों तक उड़ान भरने में सक्षम हैं” — एक वैश्विक उपलब्धि जिसे पहले केवल सीमित हेलिकॉप्टर क्षमता वाली रोटरी-विंग तकनीक से पूरा किया गया था।
रणनीतिक साझेदारी से आगे
H125 असेंबली लाइन का उद्घाटन सिर्फ एक डील नहीं है; यह दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक, नवाचार और वैश्विक सुरक्षा सहयोग को नई ऊँचाई पर ले जाने वाला कदम है। इस पहल के साथ भारत और फ्रांस ने 21 से अधिक समझौतों पर भी सहमति जताई है, जिनमें केवल रक्षा ही नहीं बल्कि डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य, ऊर्जा और अनुसंधान के क्षेत्र शामिल हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने अपनी प्रेस वार्ता में कहा कि “भारत और फ्रांस के बीच सहयोग अब वैश्विक स्थिरता और प्रगति का एक बल बन चुका है” और दोनों देशों के बीच भरोसा और साझेदारी का स्तर अब अतीत की तुलना में कहीं अधिक गहरा है।
रक्षा, आत्मनिर्भरता और रोजगार
H125 कार्यक्रम में अनुमानित निवेश ₹1,000 करोड़ से अधिक है, जो सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों नौकरियों का सृजन करेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि H125 हेलिकॉप्टरों की विश्वसनीयता, बहुमुखी उपयोग और विविध परिस्थितियों में प्रदर्शन इसे वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धी बनाएगा। स्थानीय उत्पादन से न केवल भारत के रक्षा विनिर्माण ढांचे को मज़बूती मिलेगी, बल्कि यह आगे चलकर निर्यात का भी मार्ग खोल सकता है। अनुमान है कि 2027 की शुरुआत में भारत में निर्मित पहला हेलिकॉप्टर तैयार हो जाएगा और अगले 20 वर्षों में इस असेंबली लाइन से लगभग 500 हेलिकॉप्टर्स का उत्पादन किया जा सकता है।
नेतृत्व और वैश्विक रणनीति
दोनों नेताओं की बैठक में यह भी स्पष्ट हुआ कि भारत-फ्रांस साझेदारी केवल रक्षा तक सीमित नहीं है। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, पर्यावरण और उच्च प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश समान उद्देश्य रखते हैं। मैक्रों ने कहा कि ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है, भारत और फ्रांस का संयुक्त दृष्टिकोण बहुपक्षवाद और स्थिरता को बढ़ावा देगा। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस बात पर जोर दिया कि 2026 को भारत-फ्रांस ‘नवाचार वर्ष’ घोषित किया गया है, जिसमें दोनों देशों के छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअपों को नई तकनीकों को विकसित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।






