लखनऊ में प्रतिबंधित मांझे से दो वर्षों में 104 लोग घायल, सरकार ने सख्ती के निर्देश दिए
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संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में प्रतिबंधित मांझे का मुद्दा उठने के बाद सरकार ने इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार ने सदन में जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में केवल लखनऊ शहर में ही प्रतिबंधित मांझे से घायल होने के 104 मामले सामने आए हैं।
मंत्री ने बताया कि इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए लखनऊ पुलिस ने संबंधित मामलों में कार्रवाई की है तथा लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जानलेवा मांझे के उपयोग से आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरा होता है, इसलिए इस पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम-1986 की धारा-5 के तहत 1 मई 2017 से ही सिंथेटिक, नायलॉन, सीसा-लेपित तथा विदेशों से आने वाले खतरनाक मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इस संबंध में सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को समय-समय पर सख्त निर्देश जारी किए जाते रहे हैं।
विधान परिषद में ही सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। सदस्यों ने बाइक में लगाए जाने वाले मॉडिफाइड साइलेंसरों पर चिंता जताते हुए कहा कि पटाखों जैसी तेज आवाज निकालने वाले ये साइलेंसर ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के लिए खतरा भी बन रहे हैं। इस पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई है।






